(आलेख : सवेरा, अनुवाद : संजय पराते) एक पुरानी बुराई, जो भारतीय समाज को परेशान कर रही है, उच्च शिक्षा में इसके कुछ प्रभावों को कम करने के लिए एक दशक लंबा
राजेंद्र शर्मा एक तो 30 जनवरी की तारीख के बावजूद, तीस जनवरी वाली कोई बात नहीं थी। न मुकर्रर वक्त पर साइरन के जरिए पुकार और न जगह-जगह लाउडस्पीकरों से ‘‘दे दी
(आलेख : राम पुनियानी, अनुवाद : अमरीश हरदेनिया) इस साल शहीद दिवस (30 जनवरी 2026) पर महात्मा गांधी को याद करते हुए हमें यह एहसास भी है कि गांधीजी के मूल्यों और
(आलेख : सागर) 13 अप्रैल 2023 को, संविधान निर्माता डॉ. भीम राव आंबेडकर की जयंती के एक दिन पहले, सुप्रीम कोर्ट के आंबेडकरवादी वकीलों ने कोर्ट के पुस्तकालय में पुष्पांजलि अर्पण का
(आलेख : राम पुनियानी, अनुवाद : अमरीश हरदेनिया) भारतीय संस्कृति क्या है? क्या वह विशुद्ध हिन्दू संस्कृति है या फिर कई संस्कृतियों का मिश्रण है? इन दिनों इस तरह के कई सवाल
(व्यंग्य : संजय पराते) आजकल हमारे देश में सब काम भगवान भरोसे चल रहा है। भगवान भरोसे इसलिए कि दुनिया के इस कोने में जितने भगवान हैं और अंधभक्त बनकर उसको मानने
(आलेख : विक्रम सिंह) संसद के शीतकालीन सत्र में देश की सत्ता अपने मकसद में साफ़ और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ी है। ऐसा लगता है, मानो शासक वर्ग ने ठान लिया
राजेंद्र शर्मा दुनिया वालों, अब तो तुम्हें झख मारकर मानना पड़ेगा कि मोदी जी का भारत ही विश्व गुरु है! और किसी के विश्व गुरु होने का तो पहले भी कोई चांस
विष्णु नागर बांग्लादेश या पाकिस्तान में किसी हिंदू की हत्या वहां के सांप्रदायिक तत्व कर देते हैं, तो यहां के हिंदूवादियों का ‘हिंदुत्व ‘ उर्फ ‘ सनातनत्व ‘ बड़े जोर-शोर से जाग