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केरल के निकायों में भाजपा की जीत का नैरेटिव और जमीनी हकीकत

(आलेख : संजय पराते) केरल के स्थानीय निकायों के चुनाव में भाजपा द्वारा बड़ी छलांग लगाने और तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन में कब्जा करने का गोदी मीडिया द्वारा बड़े पैमाने पर प्रचार किया जा
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नेताजी के कंधे चढ़कर, गांधी को धकियाते हुए, हिन्दू-राष्ट्र का भागवत एलान

(आलेख : बादल सरोज) लगता है, आरएसएस ने अपने शताब्दी वर्ष की चहलकदमियों का उद्यापन महात्मा गाँधी के तर्पण के साथ करने का निर्णय ले ही लिया है। धीरे-धीरे उन्होंने उस वेदी
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छत्तीसगढ़ के प्रवासी मजदूर की केरल में संघी गिरोह द्वारा भीड़-हत्या

(आलेख : संजय पराते) केरल के पलक्कड़ जिले में वलयार नामक जगह पर छत्तीसगढ़ के प्रवासी मज़दूर राम नारायण बघेल की हत्या की देशव्यापी गूंज हुई है। केरल में माकपा के नेतृत्व
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मनरेगा का खात्मा : संविधान के नीति-निर्देशक सिद्धांतों पर बुलडोजर

(आलेख : बृंदा करात, अनुवाद : संजय पराते) केंद्र सरकार ने संसद में अपने बहुमत का इस्तेमाल करके महात्मा गांधी ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म कर दिया है। इसकी जगह
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एसआईआर : शुद्घीकरण का नाम, ध्वस्तीकरण का काम!

(आलेख : राजेंद्र शर्मा) आखिरकार, मतदाता सूचियों के विशेष सघन पुनरीक्षण या सर के नाम पर, थोक में लोगों के मताधिकार की चोरी की आंच, खुद सत्ताधारी संघ-भाजपा परिवार के घर तक
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सावरकर की प्रतिमा का अनावरण या हिन्दू राष्ट्र के एजेंडे का निरावरण

(आलेख : बादल सरोज) आजकल के हालचाल में दर्ज किये जाने लायक नई बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छाप तिलक सब छोड़ अनावृत, निरावृत धजा में आने की चाल-ढाल है। राजनीति से
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महात्मा गांधी — जै राम जी!

(आलेख : संजय पराते) संघी गिरोह को महात्मा गांधी के काम से ही नहीं, उनके नाम से भी कितनी नफरत है, यह मनरेगा को खत्म करने और उसकी जगह वीबी-जी राम जी
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संचार साथी : साइबर सुरक्षा या साइबर निगरानी?

(आलेख : प्रबीर पुरकायस्थ) मोबाइल फोन उपयोगकर्ताओं, प्राइवेसी समूहों और मोबाइल फोन बनाने वालों के विरोध के बाद, नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने निर्देश को वापस ले लिया है, जिसमें सभी मोबाइल
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महात्मा अब बापू बने, जिनके रूप अनेक!

(आलेख : संजय पराते) इस देश में महात्मा केवल एक है — महात्मा गांधी, रघुपति राघव राजाराम वाले महात्मा गांधी। वहीं महात्मा गांधी, जो इस देश की बहुलतावादी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते
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कांशीराम की बहुजन राजनीति ने दलितों के अम्बेडकरवादी राजनीतिक, सामाजिक और बौद्ध आंदोलनों के साथ क्या किया?

 एस आर दारापुरी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट 20वीं सदी के उत्तरार्ध में कांशीराम का उदय भारत की दलित और बहुजन राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। डॉ. बी.आर. आंबेडकर द्वारा