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विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक : स्वायत्तता से नियंत्रण की ओर उच्च शिक्षा का पुनर्गठन

(आलेख : विक्रम सिंह) संसद के शीतकालीन सत्र में देश की सत्ता अपने मकसद में साफ़ और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ी है। ऐसा लगता है, मानो शासक वर्ग ने ठान लिया
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अब तो विश्व गुरु मान लो, भाई! (राजनैतिक व्यंग्य-समागम)

राजेंद्र शर्मा दुनिया वालों, अब तो तुम्हें झख मारकर मानना पड़ेगा कि मोदी जी का भारत ही विश्व गुरु है! और किसी के विश्व गुरु होने का तो पहले भी कोई चांस
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अधर्म का हिंदुत्व (राजनैतिक व्यंग्य-समागम)

विष्णु नागर बांग्लादेश या पाकिस्तान में किसी हिंदू की हत्या वहां के सांप्रदायिक तत्व कर देते हैं, तो यहां के हिंदूवादियों का ‘हिंदुत्व ‘ उर्फ ‘ सनातनत्व ‘ बड़े जोर-शोर से जाग
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दूसरे दौर ने खोल दी एसआईआर की पोल

योगेंद्र यादव इंसान की अजीब फ़ितरत है। हम कभी भी किसी भी तरह की हकीकत के आदी हो सकते हैं। किसी भी त्रासदी और बर्बरता के साथ जीना सीख लेते हैं। उसे
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संघ प्रमुख के दावे : कुल्हाड़ियों से छेद और तलवार से तुरपाई की चतुराई

(आलेख : बादल सरोज) एक मित्र हुआ करते थे, जो संघी थे, लेकिन बुद्धिहीन भक्त नहीं थे। एक तो वर्किंग क्लास से थे, दूसरे पढ़ते-लिखते भी थे। संघ की भुजा भाजपा में
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वेनेजुएला : सत्ता में सरकार और दृढ़-प्रतिज्ञ लोग

(आलेख : विजय प्रसाद और कार्लोस रॉन, अनुवाद : संजय पराते) 3 जनवरी की सुबह, अमेरिका की सरकार ने काराकास, वेनेज़ुएला और इस देश के तीन राज्यों पर बड़ा हमला किया। लगभग
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अरावली : संतुष्ट होने की कोई गुंजाइश नहीं

(आलेख : इंदरजीत सिंह, अनुवाद : संजय पराते) सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर, 2025 को अरावली पर्वत श्रृंखला पर अपने ही फैसले को रोक दिया है। इस फैसले के खिलाफ किसानों, महिलाओं,
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आरएसएस नेटवर्क का खुलासा

(आलेख : सवेरा, अनुवाद : संजय पराते) पहली बार, शोधकर्ताओं ने आरएसएस से जुड़े संगठनों के रहस्यमयी नेटवर्क की तस्वीर सामने लाने के लिए सबूत इकट्ठा किए हैं — और नतीजा परेशान
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केरल के निकायों में भाजपा की जीत का नैरेटिव और जमीनी हकीकत

(आलेख : संजय पराते) केरल के स्थानीय निकायों के चुनाव में भाजपा द्वारा बड़ी छलांग लगाने और तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन में कब्जा करने का गोदी मीडिया द्वारा बड़े पैमाने पर प्रचार किया जा
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नेताजी के कंधे चढ़कर, गांधी को धकियाते हुए, हिन्दू-राष्ट्र का भागवत एलान

(आलेख : बादल सरोज) लगता है, आरएसएस ने अपने शताब्दी वर्ष की चहलकदमियों का उद्यापन महात्मा गाँधी के तर्पण के साथ करने का निर्णय ले ही लिया है। धीरे-धीरे उन्होंने उस वेदी