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गलगोटिया कांड : बीजेपी-मोदी के भारत में झूठ का पर्दाफाश

(आलेख : अपूर्वानंद) दिल्ली में लगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मेले में गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा एक चीनी रोबोट को अपना ‘आविष्कार’ बतलाकर प्रदर्शित किए जाने के बाद से देश और विदेश में गलगोटिया यूनिवर्सिटी
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भारत में कमजोर हो रहे लोकतंत्र पर चिंताएं

हाल के वर्षों में भारत में लोकतंत्र के स्वास्थ्य को लेकर बहस तेज़ हुई है। स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के क्षरण संबंधी चिंताएँ न तो हाशिए की हैं और न ही केवल दलगत
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समानता बनाम मनुवाद : यूजीसी नियमावली और जाति वर्चस्व का प्रतिरोध

(आलेख : विक्रम सिंह) जाति प्रथा कितनी घृणित और अमानवीय है, यह हमारे देश में बताने की ज़रूरत नहीं है। दलितों पर रोज़ होने वाले अमानवीय अत्याचार और उनके साथ पशुओं से
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प. बंगाल : सवाल उनके, जवाब हमारे

(आलेख : शमिक लाहिड़ी, अनुवाद : संजय पराते) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पास आ रहे हैं। वामपंथी पार्टियों, खासकर सीपीआई(एम) पर मीडिया की कड़ी नज़र है, जिससे उनकी मौजूदा राजनीतिक स्थिति के
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संविधान की छाती पर पाइंट ब्लैंक फायर!

(आलेख : राजेंद्र शर्मा) आखिरकार, हिमांत बिश्वशर्मा ने और अकेेले विश्व शर्मा ने ही नहीं, उनके नेतृत्व में भाजपा की असम इकाई ने भी, भारतीय संविधान को खुली चुनौती दे ही दी।
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अंधेरे अतीत की ओर बुलेट ट्रेन पर सवार

(आलेख : राजेन्द्र शर्मा) अगर यह संयोग था, तब भी बहुत-बहुत कुछ उजागर करने वाला संयोग था। 26 जनवरी को, जब देश एक गणतंत्र के रूप में अपने रूपांतरण के 76 साल
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फिर फंस गया बेचारा गरीब का बेटा

विष्णु नागर फंस गया बेचारा, गरीब का बेटा, चारों तरफ से बल्कि ऊपर और नीचे से भी! जब भी संकट आता है, गरीब के इस बेटे पर ही आता है, जो बेचारा
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व्यवस्था जातिगत भेदभाव का बचाव कैसे करती है?

(आलेख : सवेरा, अनुवाद : संजय पराते) एक पुरानी बुराई, जो भारतीय समाज को परेशान कर रही है, उच्च शिक्षा में इसके कुछ प्रभावों को कम करने के लिए एक दशक लंबा
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शुक्र है बापू, तुम ना हुए!

राजेंद्र शर्मा एक तो 30 जनवरी की तारीख के बावजूद, तीस जनवरी वाली कोई बात नहीं थी। न मुकर्रर वक्त पर साइरन के जरिए पुकार और न जगह-जगह लाउडस्पीकरों से ‘‘दे दी
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के खिलाफ आरएसएस का दुष्प्रचार

(आलेख : राम पुनियानी, अनुवाद : अमरीश हरदेनिया) इस साल शहीद दिवस (30 जनवरी 2026) पर महात्मा गांधी को याद करते हुए हमें यह एहसास भी है कि गांधीजी के मूल्यों और