(आलेख : राजेंद्र शर्मा) सड़कें अगर खामोश हो जाती हैं, तो संसद आवारा हो जाती है! जनतंत्र के भारतीय अभ्यास से निकली इस जानी-मानी कहावत के हिसाब से संसद के मानसून सत्र
(आलेख : राम पुनियानी, अंग्रेजी से रूपांतरण अमरीश हरदेनिया) आरएसएस के मुखिया मोहन भागवत हिन्दू राष्ट्र के विचार को सही ठहराने के लिए तरह-तरह की वैचारिक कलाबाजियां खाते रहते हैं। वे कई
(आलेख : नीलोत्पल बसु) उत्तर-सत्य या पोस्ट ट्रुथवाली दुनिया की समस्या यह है कि इसकी एक एक्सपायरी डेट जरूर होती है। एक लंबे समय के लिए तो सच्चाई पर मुलमा चढ़ाकर उसे
एस आर दारापुरी आई.पी.एस. (से.नि.) प्रस्तावना वर्तमान समय में भारत को विश्व की सबसे तेज़ी से विकसित होती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है। सरकारी वक्तव्यों, कॉरपोरेट रिपोर्टों तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय
(आलेख : अपूर्वानंद) 2026 में नई विधानसभाओं के लिए 5 राज्यों में हुए चुनाव के नतीजों की सबसे बड़ी खबर यह है कि सार्वभौम वयस्क मताधिकार के विचार को गहरे कब्र में
(आलेख : राजेंद्र शर्मा) विधानसभा चुनाव के मौजूदा चक्र के संबंध में और खासतौर पर प. बंगाल के संबंध में जो बदतरीन आशंकाएं जतायी जा रही थीं, सच साबित हुई है। भाजपा
(आलेख : राम पुनियानी, अनुवाद : अमरीश हरदेनिया) दिल्ली के त्रिनगर के निवासी कुछ हिन्दू परिवारों ने पूजा-अर्चना का एक नया तरीका ईजाद किया है। इसका एक लाभ यह है कि इससे
(आलेख : बादल सरोज) 17 अप्रैल की शाम देश की लोकसभा ने एक खतरनाक साजिश को ठुकरा दिया। पांच राज्यों की विधानसभा चुनावों के बीचों-बीच विशेष अधिवेशन बुलाकर मोदी सरकार ने 131वें