प्रधानमंत्री मोदी से जलती हैं  विरोधी पार्टियां: उमा भारती

प्रधानमंत्री मोदी से जलती हैं विरोधी पार्टियां: उमा भारती

लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीब परिवार से आते हैं और गरीबी का दर्द जानते हैं, इसलिए गरीबों के कल्याण के लिए जीजान से काम रहे हैं। सामंती सोच वाले कांग्रेस, सपा-बसपा और वामपंथियों सहित कई राजनीतिक दलों को यह हजम नहीं हो रहा है कि गरीब और पिछड़े परिवार का एक बेटा मोदी प्रधानमंत्री बनकर निःस्वार्थ भाव से किसान, गरीब, नौजवान, दलित, पिछड़े और महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत करने में अपना जीवन समर्पित कर दिया है। ये दल मोदी का विरोध कर गरीबों और देश की जनता का विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड सहित प्रदेश की जनता प्रधानमंत्री मोदी के भारत और भारत के लोगों को दुनिया की ताकत बनाने के कार्यों से प्रभावित है। गुरुवार को 53 विधानसभा क्षेत्रों में चैथे चरण का मतदान किया जायेगा। चार चरणों में जनता ने सपा, बसपा व कांग्रेस को उसकी हैसियत बता दी। पांचवें चरण में जनता भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार के लिए वोट करने जा रही है। उन्होंने कहा कि पांचवें चरण में हमारे बुन्देलखण्ड भी मतदान होगा, जहां से मैं लोकसभा की प्रतिनिधि भी हूूं। बुंदेलखंड सपा, बसपा व कांग्रेस के कुकर्माें के कारण गरीबी, भुखमरी और पलायन के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। इसकी गिनती देश के तीन प्रमुख निर्धन क्षेत्रों में होती है। बुंदेलखंड की जनता अपनी गरीबी, भुखमरी और दुर्दशा के लिए सपा, बसपा व कांग्रेस के खिलाफ वोट देकर बदला लेगी।

बुंदेलखंड का सैकड़ों करोड़ चढ़ा सपा-बसपा, कांग्रेस के भ्रष्टाचार की भेंट

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लिए 3630 करोड़ रूपये आवंटित किये थे। इस आवंटन में से 1304 करोड़ रूपये राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन कोष से प्रदेश सरकार को दिये। मोदी सरकार ने यह धन सीधे प्रभावित लोगों के बैंक खाते में भेजने के लिए दिया था। लेकिन अखिलेश सरकार इस धन को प्रभावितों तक पहुंचाया ही नहीं गया। केंद्र सरकार ने महोबा, चित्रकूट और बांदा, बुन्देलखण्ड क्षेत्र को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए योजना बनाई थी, लेकिन सपा सरकार ने यह योजना सफल नहीं होने दी। वित्तीय वर्ष 2016-17 में 700 करोड़ रूपये बुन्देलखण्ड को मनरेगा के तहत दिया गया, जिससे बदहाल जनता को राहत मिल सके। बुंदेलखंड के किसानों को सूखे की मार से उबारने के लिए मोदी सरकार ने सिंचाई की सुविधा, जलाशयों की मरम्मत आदि के लिए बुन्देलखण्ड क्षेत्र को राशि दी। बुन्देलखण्ड के विकास के लिए सहकारी संस्थाओं के माध्यम से पेयजल और विद्युतीकरण की योजनाएं चलाई जानी थी, जो कि लम्बे समय तक बुन्देलखण्ड की तरक्की में मददगार हो सकती थी। इसके लिए 932.32 करोड़ रूपये राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन कोष से 2015-16 में आवंटित किया गया और 265.87 करोड़ रूपये की पहली किश्त एसडीआरएफ द्वारा 2016-17 में दी गई। सुश्री उमाभारती ने कहा कि अगर जनता का पैसा जनता को दिया जाता तो स्थिति कुछ और ही होती। अखिलेश यादव जवाब दें कि इस धन का क्या हुआ और जनता का पैसा किसकी जेब चला गया? उन्होंने कहा कि अप्रैल 2016 में नीति आयोग ने प्रदेश सरकार के साथ अर्जुन सहायक, वरूणा और बाना सागर सिंचाई परियोजना की समस्याओं को सुलझाने के लिए एक बैठक की, लेकिन अखिलेश सरकार की निष्क्रियता और असहयोग के कारण यह परियोजना परवान नहीं चढ़ सकी। उत्तरप्रदेश में स्थित बुंदेलखंड के क्षेत्रों में आज भी लोग पानी के लिए परेशान हैं, जलाशय सूखे हैं और खेतों से पानी के कमी के कारण हरियाली गायब है। किसानों और आम लोगों की इस परेशानी के जिम्मेदार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हैं। मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने बुन्देलखण्ड के सूखा प्रभावित गरीब किसानों के लिए रबी की फसल के लिए 250 करोड़ रूपये और खरीफ के लिए 180 करोड़ रूपये दिए। लेकिन यह धन भी सपा सरकार की लूट-खसोट का शिकार हो गया और जनता तक एक भी पाई भी नहीं पहुंची। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मार्च 2016 को खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में खाद सुरक्षा स्कीम मंजूर की। इसके तहत 3 रूपये किलो चावल, 2 रूपये किलो गेहूं और 1 रूपये किलो मोटा अनाज दिया जाना था। केंद्र सरकार की अंत्योदय परिवार योजना के तहत बुन्देलखण्ड को विशेष पैकेज के तहत 2.3 लाख गरीब परिवारों को 10 किलो गेहूं 5 किलो चावल, 25 किलो आलू, 5 किलो सरसों का तेज और घी दिया जाना था। अगर राज्य सरकार इन सभी योजनाओं को ईमानदारी से जमीन पर लागू करती तो बुन्देलखण्ड की जनता आज त्रस्त नहीं होती।