गैस सिलेंडरों की कीमतों में वृद्धि : इस 7 लाख करोड़ रूपये का हिसाब कौन देगा?
नागरिक परिक्रमा
(संजय पराते की राजनैतिक टिप्पणियां)
मोदी सरकार ने घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की कीमतों में भारी वृद्धि की है। अब 924 रूपये वाला गैर सब्सिडी घरेलू सिलेंडर 924 रूपये की जगह 984 रूपये में, व्यावसायिक सिलेंडर 1923.50 रूपये की जगह 2085.50 रूपये तथा उज्ज्वला है गैस सिलेंडर 553 रूपये की जगह 613 रूपये में मिलेंगे। इससे पहले अप्रैल 2025 को घरेलू गैस सिलेंडर की दर में 50 रूपये तथा इसी माह 1 मार्च को व्यावसायिक गैस सिलेंडर की दर में 28 रूपये की वृद्धि की गई थी। इस प्रकार, मोदी राज में गैस की कीमत दुगुने से भी ज्यादा हो गई है।
सत्ता में आने से पहले मोदी सरकार ने ‘बहुत हुई महंगाई की मार’ का नारा लगाते हुए सड़कों पर प्रदर्शन किया था। सुषमा स्वराज का सिलेंडर सिर पर लिए हुए सड़क पर नाचने वाला फोटो तो आज भी वायरल हो रहा है। वर्ष 2014 में दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत लगभग 410 रूपये थी, जो आज लगभग 1103 रूपये हो गई है। यह वृद्धि 169 प्रतिशत बैठती है। देश में हर साल 180 करोड़ गैस सिलेंडरों की खपत होती है। इसका अर्थ है कि मोदी राज ने पिछले 12 सालों में आम जनता से केवल गैस सिलेंडरों से ही लगभग 7 लाख करोड़ रूपये अतिरिक्त निचोड़ लिए हैं। इस प्रकार, अंधाधुंध तरीके से गैस की कीमत बढ़ाने वाली वादाखिलाफ सरकार को माफ नहीं किया जा सकता।
गैस की कीमतों में जो बढ़ोतरी की गई है, उसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा। ये दोनों वृद्धि मध्यम वर्ग और कामकाजी लोगों पर पहले से ही बढ़ती महंगाई और घटती वास्तविक आय के बीच और अधिक बोझ डालेंगे। गैस की कीमतों में इस वृद्धि से वास्तव में बचा जा सकता था, यदि मोदी सरकार सिलेंडरों पर करों से प्राप्त होने वाले राजस्व का एक छोटा सा हिस्सा छोड़ने के लिए तैयार हो जाती। ऐसा न करना, इस सरकार की जनविरोधी प्रवृत्ति को ही उजागर करता है।
मोदी सरकार ने इस वृद्धि के लिए पश्चिम एशियाई संघर्ष का हवाला दिया है। यह तर्क पूरी तरह से बचकाना है और खुद सरकार की कमजोरियों को छिपाने का प्रयास करता है। कल तक यह सरकार स्वयं अपनी पीठ थपथपा रही थी कि ईरान पर अमेरिकी-इजरायल हमले का भारत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि मोदी सरकार हमले के प्रभावों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। यहां तक कि, रूस से तेल खरीदने के मामले में भी उसने अमेरिकी सरकार को झुका दिया है और यह उसकी कूटनीतिक जीत है। जबकि रूस ने घोषणा कर दी है कि अब वह भारत को तेल की कीमतों में कोई रियायत नहीं देगा और बढ़ी-चढ़ी कीमतें वसूलेगा।
पश्चिम एशिया के संघर्ष में प्रत्यक्ष रूप से अमेरिका का समर्थन करना अब हमें सीधे नुकसान पहुंचा रहा है। वास्तव में, यह सरकार की ट्रम्प प्रशासन की युद्ध-उन्माद नीतियों के आगे आत्मसमर्पण और हमारे देश और उसके लोगों के हितों की अनदेखी करते हुए अमेरिकी वैश्विक हितों की सेवा करने की उसकी तैयार को दर्शाता है। मोदी सरकार का यह रुख यह हमारी घरेलू अर्थव्यवस्था को तबाह कर देगा। वास्तव में, यह युद्ध भारतीय जनता के लिए जो तबाही और महंगाई ला रहा है, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। हमने अपनी संप्रभुता खो दी है, जिसके बिना राजनैतिक आजादी का कोई मतलब नहीं रह जाता। मोदी सरकार ने पूरे देश की जनता को अमेरिका का गुलाम बना दिया है। गुलामी की ये जंजीरें इतनी मोटी है कि अपने देश के लिए तेल खरीदने के लिए अब हमें अमेरिका से अनुमति लेने की जरूरत है।










