Tag Archives: sanjai parate

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व्यवस्था जातिगत भेदभाव का बचाव कैसे करती है?

(आलेख : सवेरा, अनुवाद : संजय पराते) एक पुरानी बुराई, जो भारतीय समाज को परेशान कर रही है, उच्च शिक्षा में इसके कुछ प्रभावों को कम करने के लिए एक दशक लंबा
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दिल्ली जाइए, स्वर्ग का रास्ता दिल्ली होकर जाता है!

(व्यंग्य : संजय पराते) आजकल हमारे देश में सब काम भगवान भरोसे चल रहा है। भगवान भरोसे इसलिए कि दुनिया के इस कोने में जितने भगवान हैं और अंधभक्त बनकर उसको मानने
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केरल के निकायों में भाजपा की जीत का नैरेटिव और जमीनी हकीकत

(आलेख : संजय पराते) केरल के स्थानीय निकायों के चुनाव में भाजपा द्वारा बड़ी छलांग लगाने और तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन में कब्जा करने का गोदी मीडिया द्वारा बड़े पैमाने पर प्रचार किया जा
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महात्मा गांधी — जै राम जी!

(आलेख : संजय पराते) संघी गिरोह को महात्मा गांधी के काम से ही नहीं, उनके नाम से भी कितनी नफरत है, यह मनरेगा को खत्म करने और उसकी जगह वीबी-जी राम जी
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महात्मा अब बापू बने, जिनके रूप अनेक!

(आलेख : संजय पराते) इस देश में महात्मा केवल एक है — महात्मा गांधी, रघुपति राघव राजाराम वाले महात्मा गांधी। वहीं महात्मा गांधी, जो इस देश की बहुलतावादी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते
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सिर्फ प्रतीक नहीं, एक जीवंत दर्शन हैं बिरसा मुंडा

(बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर विशेष आलेख : कुमार राणा, अनुवाद : संजय पराते) केवल पच्चीस वर्षों का जीवन, फिर भी उसका फलक काफी व्यापक है। जिस मुंडा समुदाय में उनका
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पलटूराम की अवसरवादी राजनीति का अंत होना तय

(आलेख : संजय पराते) कांग्रेस की अहंकारी राजनीति से जो झटका महागठबंधन को लगने के आसार बन गए थे, महागठबंधन की जीत के बाद तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने की सहमति की घोषणा
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नफरत की राजनीति में पत्रकारिता की छौंक!

संजय पराते अमित शाह ने दिल्ली में दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक नरेंद्र मोहन की स्मृति में व्याख्यान दिया। व्याख्यान का विषय था : घुसपैठ, जन सांख्यिकी परिवर्तन और लोकतंत्र। नरेंद्र
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कॉर्पोरेट बस्तर के सेप्टिक टैंक में दफ्न ‘लोकतंत्र’

(आलेख : संजय पराते) यदि पत्रकारिता लोकतंत्र की जननी है या पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं, तो यकीन मानिए, 3 जनवरी की रात वह बस्तर के बीजापुर में एक राज्य-पोषित ठेकेदार
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गारंटी : न खरीद की, न समर्थन मूल्य की, न वितरण की

(आलेख : संजय पराते) इस बार फिर हरियाणा और पंजाब के किसान परेशान और हलाकान है। रबी फसलों के लिए केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा कर दी गई है,