दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आज विशेष प्रेस कांफ्रेंस की और सरकार के सामने तीन मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि छात्र केवल तीन मांग कर रहे हैं जो बिल्कुल जायज हैं और सरकार को इन्हें मानना होगा। हम छात्रों की इन मांगों का पूरा समर्थन करते हैं। पहला, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो। दूसरा, छात्रों पर हमला करने वाले हर व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और तीसरा, प्रधानमंत्री को छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेंस की शुरुआत में जंतर मंतर प्रदर्शन का वीडियो दिखाया। जहां सोमवार को पुलिस ने बर्बर तरीके से छात्रों, युवाओं और महिलाओं की पिटाई की है। उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों? उन्होंने कहा कि युवा शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनके साथ ऐसा सलूक क्यों किया गया। उन्होंने ऐसा क्या किया कि सुरक्षा बल उन पर हथियार तान रहे हैं, उन्हें पीटा जा रहा है और उन पर ज़ुल्म किया जा रहा है?’ राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों ने कोई क्राइम नहीं किया था। छात्र सिर्फ शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे। छात्र सिस्टम में सुधार की मांग कर रहे थे।

पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था न केवल धांधली से भरी है, बल्कि यह आम लोगों की पहुंच से बाहर भी है। उन्होंने कहा कि हमारा एजुकेशन कभी दुनिया का सबसे बेहतरीन एजुकेशन सिस्टम माना जाता था। आज वह धांधली बन चुका है। देश में पिछले 10 साल में 152 पेपर लीक हो चुके हैं। हमारे छात्र पेपर लीक की वजह से परेशान हैं, तनाव को झेल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 7.5 करोड़ छात्र इससे प्रभावित हुए हैं। 1.4 लाख करोड़ भारत सरकार का एजुकेशन बजट है। 1.32 लाख करोड़ भारतीय परिवार नीट एग्जाम पर खर्च करते हैं। नीट का खर्च देश के शिक्षा बजट से ज्यादा है। ये गरीब परिवार के छात्र थे। लेकिन अब तक जवाबदेही तय नहीं हुई। शिक्षा को बर्बाद करने वालों को सजा नहीं हुई है।

राहुल गांधी ने कहा, ‘‘वे शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे हैं और अपना हक मांग रहे हैं जो यह देश उन्हें देने का जिम्मेदार है। वे बस इस देश के छात्रों के तौर पर यह कह रहे हैं कि- ‘हम एक ऐसी शिक्षा प्रणाली के हकदार हैं जो निष्पक्ष हो’।’ उन्होंने कहा कि बच्चों ने आत्महत्याएं की हैं, वे बहुत ज़्यादा तनाव से गुज़रते हैं और यह इस देश में एक जायज और बहुत गंभीर समस्या है। हर महीने लाखों छात्रों से कहा जाता है कि आपने जो तनाव झेला है, उसे आपको फिर से झेलना होगा और ‘हमें कोई फर्क नहीं पड़ता’।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘यह इन परिवारों के साथ सरासर लूट है, और उनसे लूटने के बाद आप उन्हें बताते हैं कि पेपर लीक हो गया है।’’ उन्होंने कहा कि छात्रों के विरोध का दूसरा कारण यह है कि शिक्षा हासिल करने के बाद, छात्रों से कहा जाता है कि जो दरवाजे उनके लिए खुले थे, वे अब बंद हो गए हैं।