सूफ़ीवाद में ग़ौसे आज़म के योगदान पर परिचर्चा

सूफ़ीवाद में ग़ौसे आज़म के योगदान पर परिचर्चा

जयपुर। सुन्नी दावते इस्लामी और मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में जयपुर में आज सूफ़ीवाद पर परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में हज़रत ग़ौसे आज़म के सूफ़ीवाद में योगदान को याद करते हुए वक्ताओं ने कहाकि इन पर सबसे विश्ववस्नीय शोध मिस्र के अलअज़हर विश्वविद्यालय ने किया है।

अहमदाबाद से आए मुख्य वक्ता मौलाना ग़ुलाम सैयद अशरफ़ी ने कहाकि ग़ौसे आज़म ने अपने पूरे जीवन काल में पैग़म्बर मुहम्मद साहब के आदर्शों को जिया और वह वलियों के सरदार कहलाए जाते हैं। हज़रत ग़ौस ने जीवन में हमेशा मानवता के पक्ष को जीवित रखा और उन्हें सूफ़ीवाद के बड़े प्रयोगधर्मी के रूप में जाना जाता है। मौलाना अशरफ़ी ने कहाकि भारत के मुसलमान यदि आज भी ग़ौसे आज़म के बारे में जानना चाहते हैं उन्हें मिस्र के अलअज़हर विश्वविद्यालय के शोध का अध्ययन करना चाहिए।

 मुस्लिम स्टूडेंट्स आर्गेनाईजेशन के प्लानिंग बोर्ड के चेयरमैन सैयद मुहम्मद क़ादरी ने कहाकि ग़ौसे आज़म जब बच्चे थे तभी उन्होंने अपने चरित्र के आधार पर डाकुओं को इस्लाम के तोहफ़े से नवाज़ दिया था। एक बार जब डाकुओं ने डाका डाला तो कपड़े में सिली अपनी अशरफ़ियाँ डाकुओं को सौंप दी और कहाकि मेरी माता ने असत्य बोलने से मना किया है। डाकू ग़ौसे आज़म के क़दमों में गिर पड़ा और कहाकि जो धर्म इतनी सत्यता को प्रश्रय देता है, मैं भी उसे अपनाता हूँ।

कार्यक्रम की सरपरस्ती मुफ़्ती अब्दुल सत्तार रिज़वी, जयपुर शहर मुफ़्ती ने की। कार्यक्रम में जयपुर के कई गणमान्य लोग यथा हाजी रफ़अत, मौलाना अंसार, मुफ़्ती ख़ालिद अयूब मिस्बाही शरीक हुए।

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