2020 से 2024 के बीच पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की इकलौती किताब ही ऐसी है, जिसे अब तक रक्षा मंत्रालय से क्लीयरेंस नहीं मिली है। 17 सितंबर 2024 को इंडियन एक्सप्रेस ने राइट टू इनफॉर्मेशन (RTI) के तहत इस मामले से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां जुटाई थीं। इसके मुताबिक, 2020 से 2024 के बीच रक्षा मंत्रालय के पास कुल 35 किताबें मंजूरी के लिए आई थीं। इनमें से तीन किताबों को अब तक क्लीयरेंस नहीं दी गई थी, जिनमें एक किताब जनरल नरवणे की भी थी।

इंडियन एक्सप्रेस ने इससे पहले 5 जनवरी 2024 को भी यह मुद्दा उठाया था, लेकिन उस समय न तो रक्षा मंत्रालय और न ही पेंगुइन रैंडम हाउस की ओर से कोई जवाब दिया गया था। RTI के जवाब में बताया गया था कि ब्रिगेडियर जीवन राजपुरोहित की किताब Leadership Beyond Barracks “प्रक्रिया में” थी, जबकि दो अन्य किताबों के ड्राफ्ट- जनरल नरवणे की Four Stars of Destiny और कारगिल युद्ध के दौरान थलसेना प्रमुख एवं डीजीएमओ रहे जनरल एन. सी. विज की किताब Alone in the Ring को रक्षा मंत्रालय को भेजा गया था।

अब जनरल एन. सी. विज की किताब Alone in the Ring मई 2025 में जारी हो चुकी है, वहीं ब्रिगेडियर राजपुरोहित की किताब को भी मंजूरी मिल चुकी है और वह प्रकाशन की प्रतीक्षा में है। ऐसे में सिर्फ जनरल नरवणे की किताब ही अब तक अधर में लटकी हुई है। इस पूरे मामले पर इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि भारत सरकार के मन में पूर्व थलसेना प्रमुख के लिए पूरा सम्मान है और विपक्ष अपनी राजनीति के लिए उनका अपमान कर रहा है।

RTI से यह भी पता चला कि सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों की कई पांडुलिपियां क्लीयरेंस के लिए सरकार के पास आई हैं। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 में एक ड्राफ्ट भेजा गया था। 2021 में कोई पांडुलिपि नहीं आई। 2022 में चार किताबें मंजूरी के लिए भेजी गईं, जबकि 2023 में यह संख्या और बढ़ गई और कुल 16 ड्राफ्ट सरकार के पास पहुंचे।

जानकारी के लिए बता दें कि जिन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की किताबों को हाल ही में सरकार द्वारा मंजूरी दी गई है, उनमें लेफ्टिनेंट जनरल एस. ए. हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल एस. के. गडॉक, लेफ्टिनेंट जनरल एस. आर. आर. अयंगर, मेजर जनरल अशोक कुमार, मेजर जनरल शशिकांत पित्रे, मेजर जनरल आर. के. शर्मा, मेजर जनरल जी. डी. बक्शी और लेफ्टिनेंट जनरल योगेश कुमार जोशी शामिल हैं।