फर्जी दस्तावेज़ों से डीयू में हुए सौ से ज्यादा एडमिशन

फर्जी दस्तावेज़ों से डीयू में हुए सौ से ज्यादा एडमिशन

गैंग का पर्दाफाश, चार गिरफ्तार, मुहर, प्रिंटर और फर्जी मार्कशीट बरामद 

नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी में फर्जी कास्ट सर्टिफिकेट और दूसरे दस्तावेजों के जरिये दाखिला कराने वाले गैंग का पर्दाफाश कर पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोग दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में एडमिशन कराने के लिए छात्रों से सात से आठ लाख रुपये तक लेते थे। पुलिस के मुताबिक ये गैंग पिछले तीन साल में सौ से अधिक दाखिले करा चुका है। दिल्ली पुलिस को हिंदू कॉलेज और किरोड़ीमल कॉलेज सहित करीब आधा दर्जन कॉलेजों में गैंग द्वारा दाखिला कराए जाने का पता चला है।

दिल्ली के बड़े प्राइवेट स्कूलों में ईडब्ल्यूएस कोटे से फर्जी सर्टिफिकेट के जरिये दाखिला कराने के रैकेट के पर्दाफाश के बाद अब दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में एससी-एसटी के फर्जी सर्टिफिकेट पर दाखिला कराने के मामले का खुलासा हुआ है। निजी स्कूलों के रैकेट के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में पिछले तीन साल से चलाए जा रहे इस रैकेट का पर्दाफाश कर चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों के पास से फर्जी सर्टिफिकेट के साथ-साथ, मुहर, प्रिंटर और फर्जी मार्कशीट बरामद हुई हैं।

पुलिस के मुताबिक अब तक की जांच में पता चला है कि ये गैंग पिछले तीन वर्षों में दिल्ली विश्वविद्यालय के अलग-अलग कॉलेजों में सौ से अधिक दाखिले करा चुका है। पुलिस के मुताबिक गैंग ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिर्फ इस साल 25 से अधिक दाखिले कराए। पुलिस के मुताबिक जिन कॉलेजों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिला हुआ है उनमें जाने-माने हिंदू कॉलेज, किरोड़ीमल कॉलेज, राम लाल आनंद कॉलेज, पीजीडीएवी, कमला नेहरू, दयाल सिंह मॉर्निंग, दयाल सिंह ईवनिंग और भगत सिंह कॉलेज शामिल हैं। ज्यादातर कॉलेजों में अनुसूचित जाति और जनजाति के फर्जी प्रमाण पत्र और फर्जी मार्कशीट के आधार पर दाखिला कराया जाता था।

पुलिस ने इस मामले में सुनील पवार, मोहम्मद जुबैर, प्रवीण कुमार झा और रंचित खुराना को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक सुनील और जुबैर दाखिले के लिए छात्रों को फांसते थे और रंचित से संपर्क करते थे जबकि प्रवीण झा फर्जी दस्तावेज और सर्टिफिकेट बनाता था। पुलिस के मुताबिक दाखिले के साथ-साथ ये गैंग प्राइवेट नौकरियों के लिए लोगों को फर्जी सर्टिफिकेट और डिग्रियां भी बनाकर देता था।

पुलिस के मुताबिक इस एडमिशन रैकेट में दलालों के साथ-साथ कॉलेजों के स्टाफ की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि बिना स्टाफ की मिलीभगत के गैंग दाखिला नहीं करा सकता। मामले की जांच में जुटी पुलिस के मुताबिक गैंग द्वारा अब तक सौ दाखिले की पुष्टि हो चुकी है लेकिन ये आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।

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