ड्राइवरों के अपराध के लिए कैब कम्पनियाँ ज़िम्मेदार नहीं: हाईकोर्ट

ड्राइवरों के अपराध के लिए कैब कम्पनियाँ ज़िम्मेदार नहीं: हाईकोर्ट

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को स्थानीय सरकार को ऐप आधारित कैब सेवाओं से प्रतिबंध हटाने का सुझाव देते हुए कहा कि इन कंपनियों को कैब ड्राइवरों की गैर कानूनी हरकतों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

हाईकोर्ट ने ऐप आधारित टैक्सी सेवा प्रदाता ओला कैब्स से भी कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में सिर्फ सीएनजी से चलने वाली कैब को ही अनुमति दी जाएगी। न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा, ‘अगर अखिल भारतीय परमिट गलत व्यक्ति को दिया जाता है तो उसे (ओला) को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाए। यदि किसी अपराधी को परमिट दिया गया है तो आप उस (ओला) पर बोझ नहीं डाल सकते। इसकी जिम्मेदारी सरकार और पुलिस को लेनी होगी। परंतु सीएनजी संबंधी जरूरतों को पूरा करना होगा।’

उन्होंने कहा, ‘अगर दिल्ली में एक स्थान से दूसरे स्थान के लिए है तो कैब को सीएनजी से चलाना होगा। आपके प्रतिस्पर्धी सीएनजी से चलते हैं तो फिर आप कैसे डीजल से चला सकते हैं? सीएनजी से चलाएं या फिर बिल्कुल मत चलाएं।’ अदालत ने दिल्ली सरकार को सुझाव दिया कि ऐसी सेवा प्रदाताओं से प्रतिबंध हटाया जाए क्योंकि उनकी तकनीक पूरी दुनिया में काम कर रही है, पूरी तरह पहचान रखती है और ‘उपभोक्ताओं के लिए वरदान है।’ उसने सरकार से यह भी कहा कि इन लोगों को चलने की इजाजत देने के लिए उनके आवेदन को नए सिरे से सुना जाए।

ऐप आधारित कैब सेवाओं के फायदों का जिक्र करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस तकनीक के तहत चल रहे वाहनों को सीएनजी से चलना होगा। न्यायाधीश ने कहा, ‘प्रथम दृष्टया मैं इस तरीके से दिल्ली में चलने वाले डीजल वाहनों की इजाजत नहीं देने जा रहा हूं। आप देख रहे हैं कि शहर में प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है।’

अदालत ओला ब्रांड से सेवा प्रदान करने वाली एएनआई टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कंपनी ने कहा कि वह दिल्ली सरकार की ओर से हाल ही में संशोधित की गई रेडियो टैक्सी योजना के प्रति उत्तरदायी नहीं है क्योंकि कैब को पहले से अखिल भारतीय परमिट मिला हुआ है।

कंपनी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक कैब को सिर्फ यूरो-2 नियमों का पालन करना होगा और सीएनजी की अनिवार्यता जरूरी नहीं है।

दिल्ली सरकार के वकील नौशाद अहमद ने कंपनी की दलील का विरोध किया और अदालत को बताया कि ऐसी कंपनियां योजना के प्रति उत्तरदायी हैं और ऐसे में इनको सीएनजी से कैब चलाना होगा तथा ड्राइवरों को अपनी पृष्ठभूमि के बारे में सत्यापन भी करवाना होगा।

अदालत ने कहा कि सरकार की नीति तकनीक में बदलाव के मुताबिक नहीं है और उसने कहा कि सरकार दिखाए कि ऐसी कंपनियां योजना के तहत आती हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि राजधानी में चलने वाले सभी सार्वजनिक वाहनों को सीएनजी से चलना होगा। हाईकोर्ट ने आठ जुलाई को ऐसे ही एक आवेदन पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार का वह आदेश रद्द कर दिया था जिसमें कैब सेवा प्रदाता कंपनी उबर लाइसेंस खारिज किया गया था।

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