व्यापमं घोटाला:  शिवराज ने जानबूझकर की जांच में देरी

व्यापमं घोटाला: शिवराज ने जानबूझकर की जांच में देरी

भोपाल: सुप्रीम कोर्ट ने व्यापमं मामले में सीबीआई जांच के आदेश दे दिए हैं। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या शिवराज सिंह चौहान सरकार ने इस मामले में सीबीआई जांच काराने को लेकर जानबूझकर देरी की है।

मुख्यमंत्री ने हाल ही में एक इंटरव्यू में  कहा था, 'व्यापमं घोटाला मामले में मैं व्हिसल ब्लोअर था और जब मैंने देखा कि यहां कुछ गड़बड़ है तो खुद ही एसटीएफ जांच के आदेश दिए थे।' लेकिन शिवराज सिंह के दावे के उलट विधानसभा के रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

साल 2009 में एक निर्दलीय विधायक ने विधानसभा में सवाल उठाया था कि क्या राज्य में व्यापमं या स्टेट एग्जामिनेशन बोर्ड द्वारा आयोजित कराए जाने वाले प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) में किसी तरह की अनियमितता बरती जा रही है? इस पर सरकार ने जवाब दिया कि हम इस मामले में जानकारी जुटा रहे हैं।

मेडिकल शिक्षा की जिम्मेदारी उस समय स्वंय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह संभाल रहे थे और उन्होंने गड़बड़ी की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया था। इसके दो साल बाद एक अन्य विधायक ने ऐसे ही सवाल डेंटल और मेडिकल कॉलेजों के विषय में उठाए, उन्होंने पूछा कि क्या 2007 से 2010 के बीच मेडिकल कॉलेजों में दाखिले को लेकर किसी तरह की अनियमितता बरती गई है? इस पर मुख्यमंत्री ने जवाब दिया था कि इस गलत तरीके से दाखिला लिए किसी भी उम्मीदवार के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

विपक्ष ने 29 नवम्बर 2011 में एक बार फिर विधानसभा में व्यापमं घोटाले के विषय में सवाल उठाए, लेकिन इस बार सरकार ने अपना उत्तर बदल दिया। इस समय शिवराज सिंह ने जवाब दिया कि गलत तरीके से मेडिकल सीट हथियाने वाले 114 छात्रों की पहचान की गई है और इस मामले की जांच चल रही है।

समाजिक कार्यकर्ता सकलेचा के अनुसार समय-समय पर व्यापमं में गड़बड़ी के प्रश्न विधानसभा में उठते रहे, लेकिन मुख्यमंत्री ने या तो कमेटी गठित कर दी या जांच चल रही है कहकर पल्ला झाड़ लिया। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

जुलाई 2011 से जून 2013 के बीच मुख्यमंत्री को मेडिकल कॉलेजों में दाखिले को लेकर चल रहे फर्जीवाड़े के संबंध में 17 चिट्ठियां मिलीं। शिवराज ने जांच का भरोसा दिया और 30 दिन में रिपोर्ट देने की बात कही, लेकिन मेडिकल कॉलेजों ने जांच में 6 महीने लगा दिए और सिर्फ छात्रों को ही इसमें दोषी बताया गया। 2007-2011 के बीच व्यापमं मामले में जैसे-जैसे और जानकारी की मांग की गई वैसे-वैसे सरकार और भी कपटपूर्ण जवाब देने लगी।

उधर राज्य सरकार के प्रवक्ता डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा का कहना है, 'व्यापमं से जुड़े जितने भी प्रश्न किए गए राज्य सरकार ने हर प्रश्न का जवाब दिया। मुझे कोई भी ऐसा मौका याद नहीं है, जब सरकार ने किसी प्रश्न का जवाब ना दिया हो। फिर भी अगर आपको लगता है कि कुछ रह गया है तो आप सीबीआई के पास जा सकते हैं, अब वही एजेंसी व्यापमं घोटाले की जांच कर रही है।

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