फूट चूका है मोदी मैजिक का बुलबुला: मायावती

फूट चूका है मोदी मैजिक का बुलबुला: मायावती

एनडीए सरकार का एक वर्ष बहुत बुरे दिन दिखाने वाला रहा 

इंस्टेंटखबर ब्यूरो 

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को अपनी पूर्ववर्ती कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के ही नक्शेकदम पर चलने का आरोप लगाते हुए आज कहा कि मोदी सरकार का एक साल का कार्यकाल अति निराशाजनक और अति बुरे दिन दिखाने वाला रहा है। मायावती ने मोदी सरकार के एक साल के कार्यकाल पर बसपा की प्रतिक्रिया देने के लिये आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान मोदी सरकार की असंख्य गलत नीतियों और कार्यकलापों ने जनता को निराश किया है। इस सरकार से जनता को जो उम्मीदें बंधी थीं वे अब निराशा में बदलती नजर आ रही हैं। उन्होंने कहा ‘‘देशहित के साथ-साथ जनहित के अहम मामलों में मोदी सरकार कांग्रेस की पिछली सरकार की तरह ही ढाक के वही तीन पात वाली सरकार साबित हो रही है। इस सरकार ने जनता की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए यह सोचने पर मजबूर किया है कि कांग्रेस और भाजपा एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। दोनों ही उद्योगपतियों के इशारे पर चलने वाली पार्टियां हैं। इनकी कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अन्तर है।’’

मायावती ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के मंत्रियों को लोकसभा में बहुमत होने का इतना घमंड है कि वे तीखी आलोचना के बावजूद आत्मचिंतन करके सुधार लाने को कतई तैयार नजर नहीं आते। इसीलिये जनता और उनके समर्थक भी अब उबने लगे हैं। मीडिया द्वारा किया गया सर्वे भी इस बात को दर्शाता है कि ‘मोदी मैजिक’ का बुलबुला अब समाप्त हो गया है। बसपा अध्यक्ष ने कहा ‘‘संक्षेप में कहा जा सकता है कि मोदी सरकार का एक साल का कार्यकाल अति निराशाजनक और अति बुरे दिन दिखाने वाला रहा है। इन नाकामियों की तरफ से देश की जनता का ध्यान हटाने के लिये भाजपा और उसके सहयोगी अब मंदिर का मामला गरम कर रहे हैं, जबकि यह मामला अभी अदालत में है।’’

मोदी सरकार की बहुप्रचारित जनधन योजना, प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना, जीवन ज्योति योजना तथा अटल पेंशन योजना को छलावा बताते हुए मायावती ने कहा ‘‘देश के गरीबों को जनधन योजना के तहत खाता खोलने और विभिन्न बीमा योजनाओं में निवेश करने के लिये सरकारी स्तर पर ना केवल काफी जोर दिया जा रहा है, बल्कि इसके लिये मजबूर भी किया जा रहा है।’’ उन्होंने कहा ‘‘प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना और अटल पेंशन योजना को जनहित की योजना बताते हुए उनका ढिंढोरा पीटकर गरीबी और बेरोजगारी से जूझने वाले लोगों को हसीन सपना दिखाया जा रहा है। हास्यास्पद यह है कि इन योजनाओं में केन्द्र सरकार अपना एक भी रुपया खर्च नहीं कर रही है।’’

मोदी सरकार भले ही दूरगामी नीतियों पर त्वरित निर्णय लेने का दावा कर रही हो, बसपा मुखिया मायावती ने इसे ‘तदर्थवाद’ की शिकार बताया और कहा कि अनेक संवैधानिक एवं सरकारी पद खाली पड़े हुए हैं। मायावती ने आरोप लगाया कि पिछड़ों को मुख्यधारा में लाने के प्रयासों को भी मोदी सरकार ने आघात पहुंचाया है। यह चिंता का बड़ा कारण है, क्योंकि आगे चलकर उसकी भरपाई करना किसी सरकार के लिये आसान नहीं होगा। मोदी सरकार पर देश के धार्मिक अल्पसंख्यकों में दहशत का माहौल पैदा करने का आरोप लगाते हुए मायावती ने कहा ‘‘जहां तक देश में गुजरात जैसा दहशत का माहौल पैदा करने की आशंका की बात है तो यह भी सही साबित हुई है। मुसलमानों और ईसाइयों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। इससे विदेशों में भारत की गरिमा को आघात पहुंचा है।’’ उन्होंने सोमनाथ मंदिर में गैरहिन्दुओं के प्रवेश पर कथित रूप से रोक लगाये जाने का विरोध करते हुए इसे माहौल खराब करने वाला कदम करार दिया।

बसपा अध्यक्ष ने मोदी सरकार पर राज्य सरकारों से असहयोग का आरोप लगाते हुए कहा ‘‘मोदी सरकार द्वारा राज्यों से सहयोग का खूब प्रचार किया जा रहा है लेकिन सच्चाई इससे ठीक उलट है। आमतौर पर असहयोग का रवैया दिख रहा है। एक हाथ से देना और तुरन्त ही दूसरे हाथ से ले लेने की नीति अपनायी जा रही है।’’ उन्होंने कहा कि राज्यपालों की नियुक्ति में राज्यों को विश्वास में नहीं लेने, बांग्लादेश के साथ सीमा समझौते में पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों की राय शामिल ना करने समेत कई उदाहरण इस बात के हैं कि मोदी सरकार खौफ और शक्ति का प्रदर्शन करने में ज्यादा विश्वास करती है।