निहार शांति आमला ने चलाया 'फोन उठाओ इंडिया को पढ़ाओ' अभियान

निहार शांति आमला ने चलाया 'फोन उठाओ इंडिया को पढ़ाओ' अभियान

मैरिको के निहार शांति आमला ब्रांड ने 'फोन उठाओ इंडिया को पढ़ाओ' यह राष्ट्रीय पहल शुरू की है। शहर में स्थित केंद्रों के स्वयंसेवकों को एक आसान से फोन कॉल के जरिए वंचित समुदायों के बच्चों के साथ जोड़कर और फोन संवाद के माध्यम से बच्चों को अंग्रेजी बोलना सिखाना इस पहल का उद्देश्य है। इस पहल में शामिल होने के लिए उत्सुक स्वयंसेवक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। बच्चों से अंग्रेजी बोलने की प्रैक्टिस करवाने के लिए स्वयंसेवकों को फोन कॉल के लिए हफ्ते में सिर्फ 10 मिनटों का समय देना है।

निहार शांति आमला ब्रांड द्वारा पिछले पांच सालों से चलाए जा रहे 'निहार शांति पाठशाला फनवाला' प्रोग्राम के जरिए बच्चों को आईवीआर पर आधारित ट्रेनिंग मॉड्यूल्स से मुफ्त में अंग्रेजी सिखाया जा रहा है। इस प्रोग्राम ने भारी सफलता हासिल की है, गावों के तीन लाख से भी ज्यादा बच्चों पर इसके सकारात्मक असर दिख रहे हैं। परंतु इस प्रोग्राम में यह भी दिखाई दिया कि कोई भी भाषा की शिक्षा उसके अभ्यास, प्रैक्टिस के बिना पूरी नहीं हो सकती। साथ ही शहरों में कई ऐसे पढ़ेलिखे लोग हैं जो मदद करना चाहते हैं लेकिन कामकाज में व्यस्त होने की वजह से उन्हें समय या अवसर नहीं मिल पाते। शहरों के इन लोगों को गावों के बच्चों के साथ जोड़ने के लिए 'फोन उठाओ इंडिया को पढ़ाओ' अभियान शुरू किया गया है। इसमें प्रौद्योगिकी के माध्यम से बच्चों से अंग्रेजी में बात करने की प्रैक्टिस करवाई जाएगी और उनकी शिक्षा के परिमाणों में सुधार लाने में भी मदद होगी।

मैरिको के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर कोशी जॉर्ज ने बताया, "शिक्षा के जरिए बच्चों के जीवन में सुधार लाने के लिए निहार शांति आमला ब्रांड हमेशा से प्रयास करता आ रहा है। हमारे निहार शांति पाठशाला फनवाला प्रोग्राम ने बच्चों के लिए कही से भी किसी भी समय अंग्रेजी भाषा की पढाई उपलब्ध कराई। फोन उठाओ इंडिया को पढ़ाओ यह इस प्रयास का अगला कदम है जिसमें हम बच्चों से उनकी पढाई की प्रैक्टिस करवाना चाहते हैं और इसके लिए उन्हें आसान और सुविधाजनक तरीके से सिर्फ फोन पर बातचीत करनी है। हम शहरी युवाओं को इस अभियान में शामिल होने का अवसर दे रहे हैं ताकि वे इन बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सके और आत्मविश्वासपूर्ण, शिक्षित युवा भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सके।"