फिल्म समीक्षा: जीरो ही लग रही है शाहरुख की 'जीरो'

फिल्म समीक्षा: जीरो ही लग रही है शाहरुख की 'जीरो'

जीरो एक भटकी हुई बॉलीवुड की खांटी कर्मशियल फिल्म है। निर्देशक आनंद एल राय‌ की जीरो, स्वामी विवेकानंद के उसी दर्शन पर है, जिसमें उन्होंने जीरो के मायने बताए थे। निर्देशक आखिर तक जीरो को स्वदेश सरीखी एक यादगार फिल्म बनाने की कोशिश करते हैं। लेकिन लचर कहानी और अभिनय को धंधा मानने वाले कलाकार इसे फ्लॉप शो बनाने में लगे रहते हैं।

शाहरुख खान ने फिल्म में अपने सरे दांव अपना लिए हैं। मसलन यूंही सलमान खान को खींच लाना। बॉलीवुडी पार्टी के बहाने श्रीदेवी, काजोल, रानी मुखर्जी, जूही चावला, करिश्मा कपूर, आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण को खींच लाना। लगता है जैसे वे भूल गए हैं कि फिल्में बड़ी शक्लों की स्पेशल अपी‌एरेंस से नहीं, मुख्य कलाकारों के अपीएरेंस से बड़ी होती हैं।

आनंद एल राय भी अपने पुराने नुस्‍खों से उबरते नहीं हैं। उनकी सुई एक बार फिर से शादी पर अटक जाती है। उनकी पिछली फिल्मों में शादी उनका प्रमुख विषय रहा है। उसके इर्द-गिर्द आनंद कहानी को पर्दे पर अच्छे से उतार ले जाते हैं। साथ में उनका आर माधवन और मोहम्मद जीशान अयुब प्यार भी कम नहीं हुआ है।

आर माधवन के अलावा एक और स्पेशल एलिमेंट हैं फिल्म में, अभय देओल। इन दोनों को छिपाकर रखा गया है। फिल्म के प्रमोशन या ट्रेलर में इनकी झलक नहीं दिखाई गई। इन दोनों के अलावा फिल्म में एक और तगड़ा और छिपा हुआ एलिमेंट है- मार्श-मिशन।

ट्रेलर में रहस्यमयी ढंग से इस ओर इशारा किया गया था, लेकिन फिल्म में क्लाइमेक्स में इसे करीब 25 मिनट दिखाया जाता है। लेकिन यह एक बोझिल और बॉलीवुड फिल्मों में नासा को दिखाने की नाकाम कोशिश है।

कहानी

जीरो कहानी उत्तर प्रदेश के मेरठ के चार फुट और दो इंच के बउआ सिंह (शाहरुख खान) की है। बउआ सिंह की उम्र 39 साल हो गई है। लेकिन उनके बौने होने चलते वह अपनी जिंदगी में एक मसखरा बनकर रह गए हैं। तभी उन्हें एक लड़की की तस्वीर अच्छी लग जाती है। संयोग से वह लड़की आफिया (अनुष्का शर्मा) भी अपने मां-बाप की स्पेशल चाइल्ड है।

लेकिन शारीरिक तौर पर विकलांग आफिया का दिमाग बड़ा ही दुरुस्त है। वह मार्श मिशन पर रॉकेट भेजने की तैयारी कर रही होती है। लेकिन उसे बौने और दसवीं फेल बउआ सिंह की गंवारपन अच्छा लगता है। दिल्ली के आलिशान होटल इंपीरियल में दोनों का शारीरिक संबंध बन जाता है। लेकिन बउआ सिंह यही से मेरठ भाग आता है।

बाद अपने पिता अशोक (तिग्मांशु धूलिया) के दबाव में वह शादी के लिए तैयार होता है, लेकिन बॉलीवुड अभिनेत्री बबिता कुमारी (कैटरीना कैफ) से मिलने चक्कर में वह शादी से भाग जाता है। एक नाटकीय और अविश्वनीय तरीके से वह बबिता कुमारी के बेड तक जगह पा जाता है। लेकिन प्यार का इजहार करने पर बबिता उसे जलील कर के अपने यहां से भगा देती है।

तब बउआ ‌सिंह को दोबारा आफिया की याद आती है। वह अपने दोस्त गुड्डू (मोहम्मद जीशान अयूब) के आफिया से मिलने अमेरिका चला जाता है। आफिया वहां उसे देखते ही गोली चला देती है, लेकिन आफिया के हिलते हाथ से निशाना चूक जाता है।

बउआ सिंह तब वहां खुद को बचाने के लिए एक दुधमुंही बच्ची का सहारा लेता है, लेकिन जब उसे यह पता चलता है जिसे अपने गोंद में उठा रखा है वह उसकी अपनी बच्ची है तो दिमाग फिर जाता है। यहां से जीरो, बउआ ‌सिंह एक दिन भारत का सबसे ज्यादा चर्चा पाने वाला शख्स बनता है।

फिल्म के क्लाइमेक्स में करीब आधे का मिशन-मार्स है। निर्देशक चाहते हैं इस हिस्से की कहानी दर्शकों को ना बताई जाए। इसलिए आपको इसके कहानी सिनेमाघर में देखनी होगी। क्या बउआ सिंह, दोबारा आफिया के प्यार को जीत पाएगा? आनंद एल राय ऐसी जगहों पर शादी को ले आते और मंडप तक बात जाती है। इस बार उन्होंने फेरे शुरू कराने के बाद शादी तुड़वाई है। किसकी? यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

अभिनय की बात करें तो शाहरुख एक स्टार हैं। उनके चाहने वाले उन्हें उसी रूप में देखना चाहते हैं। लेकिन बीते कुछ सालों में वे प्रयोगधर्मी हो गए हैं। पर पचास पार कर चुके शाहरुख अपनी ही ली गई चुनौतियों को पार नहीं कर पाते।

अनुष्का शर्मा अपने किरदार में उतरने की भरसक कोशिश करती हैं। लेकिन कई बार डायलॉग बोलते वक्त वह भूल जाती हैं कि वह सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित का किरदार निभा रही हैं | बबिता कुमारी का किरदार फिल्‍म बहुत छोटा है लेकिन उसमें उन्होंने छाप छोड़ी है ।

बउवा के दोस्त का किरदार अयुब शानदार ढंग से निभाते हैं। लेकिन इस बार उनके किरदार बेहद कमजोर कर दिया गया है। उनके पास खुलकर अभिनय करने का मौका ही नहीं है। तिग्मांशु अपने किरदार में फिट बैठे हैं। वह बउआ सिंह के पिता का किरदार पर्दे पर उतार ले गए हैं। उनका गुस्सा, उनका अंदाजे बयां मेरठ‌ियों सा लगता है। अपनी छोटी सी भूमिका में अभय देओल फिट बैठते हैं। वह दिलफेंक स्टार के तौर खुद को स्‍थापित करते हैं। मार्स मिशन में लगे और आफिया से प्यार करने वाले साइंटिस्ट के किरदार में आर माधवन सटीक बैठे हैं।