IPL स्‍पॉट फिक्सिंग: मयप्‍पन और राज कुंद्रा सट्टेबाजी में दोषी

IPL स्‍पॉट फिक्सिंग: मयप्‍पन और राज कुंद्रा सट्टेबाजी में दोषी

श्रीनिवासन के बीसीसीआई का चुनाव लड़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाईं  रोक

नई दिल्‍ली : सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से जुड़े सट्टेबाजी और स्‍पॉट फिक्सिंग मामले में विभिन्न मुद्दों पर गुरुवार को अपना अहम फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने फैसले में एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्‍पन और राजस्थान रॉयल्‍स के मालिक राज कुंद्रा को सट्टेबाजी में शामिल बताया और उन्‍हें दोषी करार दिया। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट से एन श्रीनिवासन को आज बड़ा झटका मिला है। श्रीनिवासन के बीसीसीआई का चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई है। यानी अब श्रीनिवासन बीसीसीआई का चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।

कोर्ट ने अपनी टिप्‍पणी में कहा कि मयप्‍पन और राज कुंद्रा टीम ऑफिशियल हैं और वे आईपीएल टीमों के अधिकारी रहे हैं। इन दोनों के खिलाफ लगे सभी आरोप सही हैं और वे सट्टेबाजी में शामिल हैं। वहीं, शीर्ष कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बीसीसीआई का कामकाज निजी नहीं है। बीसीसीआई का कामकाज न्‍यायिक समीक्षा के दायरे में हैं और इसके कामकाज की समीक्षा की जा सकती है। कोर्ट ने यह भ कहा कि सरकारें अभी तक बीसीसीआई के एकाधिकार को रोकने में नाकाम रही हैं। शीर्ष कोर्ट ने यह भी कहा कि जस्टिस मुदगल कमेटी ने इस केस से जुड़े हर पहलू की जांच की है। सुप्रीम कोर्ट ने आज स्‍पॉट फिक्सिंग केस में 130 पन्‍नों में अपना फैसला दिया है।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट से एन श्रीनिवासन को आज बड़ा झटका मिला है। श्रीनिवासन के बीसीसीआई का चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई है। कोर्ट ने कहा है कि श्रीनिवासन बीसीसीआई अध्‍यक्ष और चेन्‍नई सुपरकिंग्‍स (सीएसके) के मालिक एक साथ नहीं रह सकते हैं। उन्‍हें बीसीसीआई या सीएसके में से किसी एक को चुनना होगा। हालांकि, इससे पहले कोर्ट ने कहा कि श्रीनिवासन पर मामले को दबाने के आरोप साबित नहीं हुए हैं। मयप्‍पन को बचाने के आरोपों पर श्रीनिवासन को एक तरह से क्‍लीनचिट मिल गई है। कोर्ट ने कहा कि ज्‍यादा से ज्‍यादा श्रीनिवासन पर मामले को दबाने का शक है। वहीं, मुदगल कमेटी ने राज कुंद्रा को सुनवाई का पूरा मौका दिया। कोर्ट ने अपनी टिप्‍पणी में कहा कि श्रीनिवासन का टीम मालिक होना सारे विवादों की जड़ है। किसी भी बीसीसीआई अधिकारी का व्‍यावसायिक हित नहीं होना चाहिए। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के नियमों में बदलाव को खारिज कर दिया। कोर्ट ने बीसीसीआई के नियमों में संशोधन को 'विलेन' बताया।  वहीं, शीर्ष कोर्ट ने चेन्‍नई सुपरकिंग्‍स और राजस्‍थान रॉयल्‍स पर कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन जजों की एक कमेटी बनाई है। यह कमेटी बहुत जल्‍द कार्रवाई तय करेगी।

मालूम  हो कि सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले में बीसीसीआई के निर्वासित अध्यक्ष एन श्रीनिवासन से जुड़े हितों के टकराव का मामला भी शामिल है। न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और एफएमआई कलीफुल्ला की खंडपीठ ने पिछले साल 17 दिसंबर को इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रखा था। इस मामले में अगस्त 2013 से कई अंतरिम आदेश पारित किए जा चुके हैं जिसमें पंजाब एवं हरियाणा के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मुकुल मुदगल के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति का गठन भी शामिल है। श्रीनिवासन, उनके दामाद गुरुनाथ मयप्पन, राजस्थान रॉयल्‍स के मालिक राज कुंद्रा, क्रिकेट प्रशासक सुंदर रमन की न्यायमूर्ति मुदगल समिति ने जांच की थी। समिति को निश्चित व्यक्तियों द्वारा गलत काम का पता चला था और उसने इन्हें आईपीएल छह प्रकरण का दोषी ठहराया था। श्रीनिवासन से जुड़े हितों के टकराव का मामला भी समीक्षा के दायरे में आया था क्योंकि वह सिर्फ बीसीसीआई के अध्यक्ष ही नहीं थे बल्कि इंडिया सीमेंट्स के प्रबंध निदेशक भी थे जो कंपनी आईपीएल टीम चेन्नई सुपरकिंग्स की मालिक है। मुदगल समिति के मुताबिक इस टीम में श्रीनिवासन का दामाद अधिकारी था और कथित तौर पर सट्टेबाजी में शामिल रहा।