लखनऊ
भाकपा (माले) ने योगी सरकार 2.0 के शुरुआती एक वर्ष को बुल्डोजरशाही का साल कहा है। पार्टी की नजर में, मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के बीते छह साल नफरत व भगवा तानाशाही के रहे, जिसमें सामाजिक सद्भाव, विविधता में एकता की भावना और संवैधानिक लोकतंत्र को सर्वाधिक क्षति पहुंची।

माले राज्य सचिव सुधाकर यादव ने योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष पूरे होने पर आज दी अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि प्रदेश में विकास कागजों पर ज्यादा हुआ है और निवेश दिखाने के लिए आंकड़ों की बाजीगरी की गई है। तमाम दावों के बावजूद सड़कें गड्ढा मुक्त नहीं हुईं। बेरोजगारों की संख्या बढ़ी है। मनरेगा के रोजगार भी खत्म-से हो गए हैं। सरकार की नीतियों के चलते ढेर सारी नौकरियां अदालती विवादों में उलझ कर रह गई हैं। नियमित नौकरियों की जगह ठेका-संविदा पर सेवाएं लेना और कम पारिश्रमिक देना सरकार की नियमित नीति बन गई है।

एक अन्य बयान में, भाकपा (माले) राज्य सचिव ने हाल में हड़ताल पर गए बिजलीकर्मियों की तनख्वाह व पेंशन पर रोक लगाने के न्यायिक आदेश को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अपने हितों की रक्षा व जायज मांगों को नियोक्ता से मनवाने के लिए हड़ताल करना श्रमिकों का ट्रेड यूनियन अधिकार है। श्रमिकों का हित लोकहित से अलग नहीं है। इसके बिना लोकतंत्र नहीं हो सकता। हड़ताल की अवधि के दौरान कर्मचारियों के खिलाफ हुई उत्पीड़न की कार्रवाइयों को वापस लेकर पूर्व में हुए समझौते को सरकार द्वारा लागू किया जाना चाहिए।