CJI ने कहा जज बढ़ाओ, मोदी ने कहा छुट्टियां घटाओ

CJI ने कहा जज बढ़ाओ, मोदी ने कहा छुट्टियां घटाओ

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को न्यायाधीशों की कमी की समस्या से निपटने पर अपना फॉर्मूला बताया। जजों की कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में छुट्टियां कम करके और काम के घंटे बढ़ाकर कुछ हद तक इस कमी को पूरा किया जा सकता है। हालांकि प्रधानमंत्री ने ये बात अपने एक पुराने बयान के आधार पर हल्के फुल्के अंदाज में कही। दरअसल, देश के मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने इस कार्यक्रम में कहा कि देश में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। उस अनुपात में जजों की संख्या नहीं बढ़ाई गई। इसी के बाद पीएम मोदी ने यह सुझाव दिया।

ठाकुर ने कहा कि लॉ कमीशन की 1987 की रिपोर्ट में कहा गया था कि देश में हर 10 लाख लोगों के लिए 10 जज है, जबकि यह संख्या 50 होनी चाहिए। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में छुट्टियां कम करने और कांम के घंटे बढ़ाने की बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि कानूनों का हमारे देश में बहुत ढेर है, जिसे कम करने की कोशिश की जा रही है। अगर किसी तरह की संवैधानिक दिक्कत नहीं हो, तो CJI की टीम और सरकार के लोग मिलकर बैठें और कोई रास्ता निकालें। मैं सिर्फ सुनकर नहीं चला जाऊंगा, कोशिश करेंगे कि कुछ रास्ता भी निकले।

मोदी ने कहा कि मैंने एक बार ऐसा कहा था तो मेरी आलोचना शुरू हो गई थी। मैं उस वक्त डर गया था। देश की जनता को भारत की न्यायपालिका पर आस्था है और इसें हमे बनाए रखना है। मोदी ने कहा कि इसमें सरकार की भी बड़ी जिम्मेदारी है और मुझे उम्मीद है कि सरकार इसमें कोई कोताही नहीं बरतेगी। पीएम ने कहा कि कानून बनाने में जो चौकसी सरकार की तरफ से बरती जानी चाहिए उसमें कमी है। ऐसा लगता है जिसकी वजह से कोर्ट में उसका असेसमेंट भी सही से नहीं हो पाता।

ठाकुर ने अपने भाषण में कहा कि देश सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थवव्यस्था हैं, सबसे ज्यादा विदेशी निवेश आ रहा है, मेक इन इंडिया की बात हो रही है लेकिन यह सब बेमानी है। जो भी हमारे देश में निवेश करेगा, वो यहां की न्यायिक व्यवस्था को भी देखेगा। आज एक जज 2600 के करीब केस निपटाता है। क्या ये मुमकिन है कि काम के इतने दबाव के बावजूद वो अच्छा काम करे? मुख्य न्यायाधीश ने भावुक होकर कहा कि जजों के काम करने की भी छमता होती है। जेलों में कैदियों की संख्या ओवरफ्लो हो रही है। सभी मुख्यमंत्रियों से भी अनुरोध है कि इस बारे में सोचें। जजो की संख्या कम से कम 10 लाख की आबादी पर 50 होनी चाहिए।

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