भारतीय महिलाओं में हेल्थ इंश्योरेंस के प्रति बढ़ रही है जागरूकता: आईसीआईसीआई लोम्बार्ड

भारतीय महिलाओं में हेल्थ इंश्योरेंस के प्रति बढ़ रही है जागरूकता: आईसीआईसीआई लोम्बार्ड

लखनऊ: भारतीय महिलाएं अपनी स्वयं की पहचान कायम करने का प्रयास करते हुए अपने परिवार के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं, यह बात आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के सर्वे में सामने आयी है , इस बात को सर्वे में शामिल 86 प्रतिशत लोगों ने सही मान है। 

हाल की विनाशकारी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए, महिलाएं दिन-ब-दिन अधिक सजग होती जा रही हैं और अपने घर एवं परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही हैं। यह बात उन प्रतिक्रियाओं से साबित होती है, जिनमें उन्होंने स्वस्थ बने रहने (71 प्रतिशत), पर्याप्त बचत सुनिश्चित करने (63 प्रतिशत), सावधानीपूर्वक यात्रा करने/गाड़ी चलाने (53 प्रतिशत) को महत्व दिया। 

भले ही वे सावधानी बरतती हैं, लेकिन अधिकांश महिलाओं ने उपयुक्त बीमा कवर के जरिए स्वयं का बीमा कराया है। यह विशेष तौर पर स्वास्थ्य बीमा के मामले में स्पष्ट है, जिसमें 84 प्रतिशत महिलाओं ने अपना स्वास्थ्य बीमा कराया। इसी तरह, 70 प्रतिशत महिलाओं के पास मोटर इंश्योरेंस कवर था, जबकि 36 प्रतिशत के पास होम इंश्योरेंस पाॅलिसी थी। यह पूछे जाने पर कि ‘जोखिम’, ‘यात्रा पर बच्चों को अकेले भेजने’ की बात सुनने पर उनके मन में क्या विचार आता है, सर्वोच्च 42 प्रतिशत प्रतिक्रियादाताओं ने अपने परिवार को प्राथमिकता दी, उसके बाद 27 प्रतिशत महिलाएं ‘सड़क दुर्घटना’ को लेकर चिंतित दिखीं और 21 प्रतिशत प्रतिक्रियादाता महिलाओं में ‘निवेश के पैसे में घाटे’ की चिंता दिखी।

आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जीआईसी लिमिटेड के चीफ-अंडराइटिंग एवं क्लेम्स, संजय दत्ता ने कहा, ‘‘आज की महिलाएं अनेक भूमिकाएं निभाती हुईं अपने परिवार के स्वास्थ्य एवं कल्याण पर अधिक ध्यान देती हैं। वे बचत करने में विश्वास रखती हैं और किसी भी आपात स्थिति के लिए स्वयं को तैयार रखना चाहती हैं। यह सचमुच उत्साहजनक है कि हमारे सर्वेक्षण की अधिकांश प्रतिक्रियादाताओं ने उपयुक्त बीमा सुरक्षा के जरिए स्वयं को/अपने परिवार को सुरक्षित कर लिया था।’’ 

जटिलता की दृष्टि से जोखिम का मूल्यांकन करने पर, सबसे अधिक 69 प्रतिशत प्रतिक्रियादाता महिलाओं ने ‘मृत्यु’ को सबसे गंभीर माना, उसके बाद 43 प्रतिशत महिलाओं ने ‘आपात स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराये जाने’ और 40 प्रतिशत महिलाओं ने ‘गाड़ी चलाते समय दुर्घटना’ होने को गंभीर बताया।