पठानकोट घटना से भारत-पाक वार्ता को पहुंचा नुक्सान: नवाज़

पठानकोट घटना से भारत-पाक वार्ता को पहुंचा नुक्सान: नवाज़

नई दिल्ली। पठानकोट आतंकी हमले का परिणाम क्या हुआ है? पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा है कि इस हमले ने भारत-पाक बातचीत को नुकसान पहुंचाया है। नवाज ने शनिवार को कहा कि भारत के साथ बातचीत में सुधार हो रहा था लेकिन पठानकोट हमले ने बाचतीत की प्रक्रिया को क्षति पहुंचाई है।

भारत ने पठानकोट हमले में जैश ए मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर की भूमिका को लेकर पाक को कई सबूत दिए हैं लेकिन हमले के 3 हफ्ते बीत जाने के बाद भी मसूद पर कोई कार्रवाई नही हुई है। भारत ने पठानकोट हमले के साजिशकर्ताओं के खिलाफ सख्त और जल्द कार्रवाई की मांग की है और ऐसा होने तक किसी भी तरह की बातचीत पर आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया है।

भारत सरकार के सूत्रों ने बताया कि भारत-पाक बातचीत की प्रक्रिया उसी सूरत में आगे बढ़ सकती है जब पठानकोट हमले की जांच में पड़ोसी देश की तरफ से किसी तरह की प्रगति सामने आए। सूत्रों के मुताबिक, भारत की तरफ से पाक को पर्याप्त सबूत दिए जा चुके हैं और अब यह पाक पर है कि वह आतंक के खिलाफ भारत का सहयोगी बने रहने के लिए क्या कार्रवाई करता है।

इससे पहले, पाकिस्तान उच्चायुक्त ने आश्वासन दिया था और यह कहा था कि भारत की तरफ से दिए गए सबूत पर्याप्त हैं, पाकिस्तान जल्द ही जैश के खिलाफ कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तानी जांच दल को पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो मैं विश्वास दिलाता हूं कि मसूद अजहर का भविष्य लखवी की तरह नहीं हो सकेगा। जकी उर रहमान लखवी 26/11 हमले का आरोपी है। भारत की तरफ से कई बार सबूत दिए जाने के बावजूद वह खुला घूम रहा है।

उच्चायुक्त ने आगे जोड़ा, ‘विदेश सचिव स्तर की वार्ता की तारीख अभी भले ही तय नहीं हो सकी हो लेकिन हमें खुशी इस बात से है कि अभी तक इस बातचीत को रद्द नहीं किया गया है।’ उन्होंने कहा, ‘26/11 के बाद दोनों देशों की तरफ से कई गलतियां हो गई थी जिन्हें पठानकोट के बाद नहीं दोहराने की कोशिश की जा रही है। दोनों देशों की तरफ से बातचीत रद्द नहीं करने का फैसला भी एक सकारात्मक कदम है।’

हालांकि, बातचीत की नई तारीख पर फैसले को लेकर वह प्रतिबद्ध नहीं दिखाई दिए। उन्होंने कहा, ‘यह कहना गलत नहीं होगा कि विदेश सचिव स्तर की वार्ता फरवरी के पहले पखवाड़े में हो सकती है। मुझे ऐसी कोई वजह नजर नहीं आती जिस आधार पर पठानकोट हमले के बाद बातचीत को बाधित किया जाए।’