मायावती को बाबा साहब व दलितों से कोई सरोकार नहीं: शिवपाल यादव

मायावती को बाबा साहब व दलितों से कोई सरोकार नहीं: शिवपाल यादव

शिवपाल से मिले दलित नेता व नेपाल के कैबिनेट मंत्री श्री विश्वेन्द्र

लखनऊ: नेपाल के दलित नेता व कैबिनेट मंत्री श्री विश्वेन्द्र पासवान ने वरिष्ठ समाजवादी नेता श्री शिवपाल सिंह यादव से उनके सरकारी आवास 7 कालीदास पर मुलाकात की और दलित विमर्श, भारत नेपाल जनसंवाद व वैश्विक समाजवाद समेत कई संवेदनशील मुद्दों पर संवाद किया। शिवपाल सिंह यादव ने श्री पासवान को भारत के महान समाजवादी चिंतक मधुलिमये की डा० भीमराव अंबेडकर पर लिखी पुस्तक भेंट करते हुए कहा कि डा० अंबेडकर व डा० लोहिया न केवल भारतीय उपमहाद्वीप अपितु पूरी दुनिया के महान नव परिवर्तनकारी चिंतकों में अग्रगण्य हैं। दोनों का सपना और लक्ष्य दलितों-पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और गरीबों को राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक रूप से मजबूत कर एक स्वस्थ तथा शोषण विहीन समाज की स्थापना करना था। श्री यादव ने नेपाली मंत्री के साथ आये प्रसिद्ध दलित लेखक हरिलाल दुसाध, अम्बेडकर महासभा के अध्यक्ष लालजी निर्मल का भी अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मान किया।

पूर्व मुख्यमंत्री व बसपा नेता सुश्री मायावती पर कटाक्ष करते हुए शिवपाल ने कहा कि मायावती ने भीमराव अम्बेडकर और अन्य दलित महापुरुषों का अपमान किया। बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की कड़ी में अपना नाम बोलकर उन्होंने बाबा साहब की महानता का अवमूल्यन किया है। वे उत्तर प्रदेश में पर्यटक की तरह आती हैं। उन्हें धरातल की जानकारी नहीं है। लोहिया के कई कार्यक्रमों को नेताजी के मार्गदर्शन में समाजवादी पार्टी ने आगे बढ़ाया है। सपा सरकार ने लाहिया की कई अवधारणाओं को मूर्तरूप दिया है जिसमें निःशुल्क सिंचाई, चिकित्सा व्यवस्था, समाजवादी पेंशन योजना समेत हजारों योजनाएं उल्लेखनीय हैं। वे दुनिया की पहली ऐसी लेखिका हैं जो अपनी पुस्तक का विमोचन स्वयं करती हैं। वे खुदपरस्ती की सबसे बड़ी उदाहरण हैं। आमतौर पर अपनी पुस्तक का विमोचन अपने से बड़े विद्वान से कराया जाता है। मायावती अपने अलावा सभी को तुच्छ समझती हैं। यह लोकतंत्र के मूल्यों पर कुठाराघात है। मायावती को अपने जन्मदिन के अलावा किसी महापुरूष की जयंती और पुण्यतिथि नहीं याद है। उनके भाषणों में गरीबों, बेरोजगारों, अल्पसंख्यकों, दलितों, पिछड़ों की समस्याओं के बजाए केवल इस बात की सफाई होती है कि उनके पास इतना अकूत संपत्ति कहाँ से आई है।

Lucknow, Uttar Pradesh, India