वाणिज्य मंत्रालय ने औपचारिक रूप से लांच किया कॅपईंडिया

वाणिज्य मंत्रालय ने औपचारिक रूप से लांच किया कॅपईंडिया

केमिकल्स, प्लास्टिक्स एवं संबंद्ध उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की एक प्रमुख पहल के रूप में वाणिज्य मंत्रालय ने आज औपचारिक रूप से कॅपईंडिया 2016 को लाँच किया। मार्च में वाणिज्य मंत्रालय के तत्वाधान में मुंबई के नेस्को में आयोजित होने वाली यह 3 दिवसीय प्रदर्शनी प्लेक्स कोंसिल, केमेक्सिल, कैपेक्सिल एवं शफेक्सिल द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई हैं और यह भारत में अब तक की ऐसी एक सबसे बड़ी प्रदर्शनी होगी। वैश्विक बाजारों के लिए भारतीय प्रदर्शनी के रूप में पेश यह इवेंट संपूर्ण वैल्यू चेन को प्रदर्शित करेगा। इसमें हजारों भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय खरीददारों के निवेश एवं वैश्विक व्यापार सुअवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त करने की संभावना हैं। यह पहल प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया विजन का हिस्सा हैं। 

अनावरण इवेंट में बोलते हुए बी. एस. भल्ला, संयुक्त सचिव, वाणिज्य एवं ं उद्योग मंत्रालय ने कहा, ‘‘केमिकल्स, प्लास्टिक्स एवं संबद्ध उत्पाद सरकार के 2020 तक निर्यात बढ़ाकर 900 बिलियन डालर करने के विजन को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। इस समय चारो कोंसिल के तहत निर्यात का हिस्सा 35 बिलियन डालर हैं और इनके विकास की उल्लेखनीय गुंजाइश हैं। हम उद्योग के खिलाडि़यों के साथ मिलजुल कर कार्य कर रहे हैं और शीघ्र ही निवेश सुअवसर का पता लगाने एवं निर्यात बढ़ाने के लिए कई निर्यात व्यूहनीति लागू करेंगे। चीन के धीमा पड़ने और हमारे विदेश व्यापार नीति के काफी सरलीकृत बनने से हमें भारतीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर अतिस्पर्धात्मक बनाने का विश्वास हैं।’’

उन्होंने आगे कहा कि निर्यात को बढ़ावा देना सरकार के मेक इन इंडिया मिशन का महत्वपूर्ण पहलू हैं।  घरेलू उत्पादन बढ़ाना एवं भारतीय उत्पादों के लिए विदेश में बाजारों का पता लगाने में मदद करना इस मिशन के दो पहलू हैं हम हमारे चार निर्यात प्रमोशन कोंसिल के इस विशिष्ट संयुक्त प्रयासों की तहेदिल से सराहना करते भारत में निर्माण करने और विश्व के लिए उसे बनाने के आम विजन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत के लिए संपूर्ण वैल्यू चेन सल्यूशन आॅफर करने एवं वैश्विक फैक्टरी के रूप में चीन का स्थान लेने के लिए उचित समय हैं। हमारे पास वैश्विक उत्पादन हब के रूप में उभरने के लिए मानवबल, सुविज्ञता, उद्यम, कुदरती संसाधन एवं उचित नीतिगत वातावरण हैं।