सैफई महोत्सव अराजकता सरकार के इकबाल को चुनौती: विजय बहादुर पाठक

सैफई महोत्सव अराजकता सरकार के इकबाल को चुनौती: विजय बहादुर पाठक

लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी ने सैफई महोत्सव में हुई उपद्रव अराजकता को सरकार के इकबाल को चुनौती बताते हुए कहा कि पूरी सरकार की मौजूदगी में पुलिस, मीडियाकर्मी पिटे। प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सरकार के आलाधिकारी की मौजूदगी में सैफई में भीड़ अराजक होती है, अराजक होती भीड़ का निशाना पुलिस और मीडियाकर्मी होते है यानि जो भीड़ अराजक हो रही थी उसे किसी का खौफ नहीं था। उन्होंने कहा सत्ता प्रतिष्ठान की सरपरस्ती के कारण बेखौफ हो रहे लोग कहीं भी कुछ भी कर सकते है सैफई में जो कुछ भी हुआ वो उसका नमुना है।

मंगलवार को पार्टी मुख्यालय पर सैफई महोत्सव में हुये हंगामे दर्जनों पुलिसकर्मियों के घायल होने मीडियाकर्मियों के वाहनों के क्षतिग्रस्त होने के समाचारों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि अखिलेश और उनका पूरा मंत्रीमण्डल मौज-मस्ती में जुटा है पर इस मौज-मस्ती में वो इतने भी मशगूल न हो कि राज्य के पूरे प्रशासनिक तंत्र को लेकर सवाल खड़े हो जाये। सैफई महोत्सव में आराजक हो रही भीड़ ये जान रही थी कि आगे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बैठे है स्वाभाविक है मुख्यमंत्री होंगे तो उनके साथ आलाधिकारी भी होंगे। इसके बावजूद पीछे से जिस तरह से फब्तियां कसी गयी, हो-हल्ला मचाया गया, कुर्सीबाजी हुई, वो प्रकट करता है कि या तो स्थानीय अभिसूचना ईकाई को पुर्वनुमान नहीं था, या फिर प्रशासन द्वारा सब कुछ जानने समझने के बावजूद अंदेखी की जाती रही।

उन्होंने कहा कि भीड़ अराजक और उपद्रवी तो हुई लेकिन बड़ा सवाल एक बार फिर मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर उठा। क्योंकि मुख्यमंत्री के उपस्थिति में ये सब कुछ होता रहा उनकी पुलिस पिटती रही, घायल पुलिसकर्मी सैफई के पीजीआई में भर्ती है सरकार अपने कारणों से मौन है और सरकार का यही मौन संदेह देता है कि उपद्रवी यदि उसके है तो उनका कुछ नहीं होना है भले वे उस पुलिस को असुरक्षित कर दे, जिसके भरोसे राज्य के लोगो की सुरक्षा हैं। 

श्री पाठक ने कहा हालात ये है कि सत्ता के समर्थक चाहे जो करे, नेता जिसे जब चाहे मुर्गा बना दे किन्तु शिकायकर्ता की शिकायत सुनी ही नहीं जायेगी। रामपुर में सत्तारूढ़ दल के एक माननीय ने एक संविदाकर्मी को बुलाया अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया, मुर्गा बनाया किन्तु जब वह व्यक्ति शिकायत करने गया तो उसकी शिकायत ली ही नहीं गयी। 

भाजपा प्रवक्ता ने कहा सैफई परिवार सैफई महोत्सव मनाऐ परिवार के लोग पूरी सिद्दत से भाग ले किन्तु सरकार का इकबाल भी बना रहे इस बात की सरकार चिंता करे क्यों कि लोकतंत्र में बहुमत इसी सरकार को मिला है इसलिए सरकार का इकबाल बना रहे ये चिंता करने का काम भी अखिलेश सरकार का है।

Lucknow, Uttar Pradesh, India