देहदान हमारी सनातन परम्परा है: राज्यपाल

देहदान हमारी सनातन परम्परा है: राज्यपाल

लखनऊः उत्तर प्रदेश के राज्यपाल, श्री राम नाईक ने आज एनाॅटामिकल सोसायटी आफ इण्डिया द्वारा आयोजित 63वें राष्ट्रीय एनाॅटामी अधिवेशन का साइंटिफिक कन्वेंशन सेन्टर में आयोजन किया। इस अवसर पर कुलपति किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रो0 रविकान्त, विभागाध्यक्ष एनाॅटामी विभाग प्रो0 ए0के0 श्रीवास्तव, प्रो0 पी0के0 शर्मा सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक एवं विशेषज्ञ उपस्थित थे। कार्यक्रम में राज्यपाल ने प्रो0 कृष्णमूर्ति, प्रो0 पुष्पा, प्रो0 सुशीला, प्रो0 तूलिका गुप्ता सहित अन्य चिकित्सकों को सम्मानित भी किया।

राज्यपाल ने अपने सम्बोधन में कहा कि चिकित्सकों को आधुनिक शोध एवं अनुसंधान का अधिक से अधिक उपयोग कर मरीजों को सस्ता इलाज उपलब्ध कराने पर जोर देना चाहिए। रोगी एवं परिजनों को चिकित्सक पूर्ण विश्वास में लेकर उपचार करें तो निश्चित ही अधिक लाभ होगा। उन्होंने कहा कि 21 वर्ष पूर्व जब वे कैंसर रोग से पीडि़त थे तो चिकित्सकों ने उनकी इच्छाशक्ति बढ़ाकर स्वस्थ होने में सहयोग किया।

श्री नाईक ने कहा कि देहदान हमारी सनातन परम्परा है। महर्षि दधीचि ने अपना देह दान देकर त्याग की अनुपम परम्परा का निर्वहन किया। शरीर का उपयोग समाज के लिए होना चाहिए तथा समाज में देहदान की चर्चा होनी चाहिए। जिस प्रकार रक्त दान से शरीर में कोई कमी नहीं होती इसका प्रचार हुआ है उसी प्रकार देहदान के विषय में भी व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए। उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व वे भी देहदान हेतु वसीयत कर चुके हैं। 

राज्यपाल ने कहा कि जीवित रहकर तो समाज की सेवा करना महत्वपूर्ण है, परन्तु देहदान कर मृत्यु के बाद किसी का कल्याण करना अनुकरणीय कदम है। पूर्व में वे देहदान से संबंधित कई कार्यक्रमों में भाग ले चुके है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के लिए कोई प्रस्ताव हो तो उन्हें विस्तृत रूप से तैयार कर भेजें, आवश्यकतानुसार वे पूर्ण सहयोग करेंगे।

कुलपति प्रो0 रविकान्त सहित अन्य चिकित्सों ने भी अधिवेशन को सम्बोधित किया। इस अवसर पर राज्यपाल को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया गया। प्रो0 पी0के0 शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

Lucknow, Uttar Pradesh, India