आयुर्वेद की उपयोगिता के बारे में जनमानस को जागरूक करें: जय शंकर मिश्रा

आयुर्वेद की उपयोगिता के बारे में जनमानस को जागरूक करें: जय शंकर मिश्रा

आयुर्वेद, यूनानी चिकित्सा शिविर में 672 रोगी उपचारित

लखनऊ: आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा के विकास हेतु जनपद लखनऊ के राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालयों में आयुर्वेदीय निदान एवं विशिष्ट चिकित्सा शिविरों का आयोजन के क्रम में आज राजाजीपुरम् स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, लखनऊ डा0 शिव शंकर त्रिपाठी के संयोजकत्व में शिविर आयोजित किया गया। शिविर का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में पधारे संयुक्त निदेशक आयुर्वेद जय शंकर मिश्रा, वरिष्ठ पी0सी0एस0 अधिकारी ने भगवान श्री धन्वन्तरि का पूजन कर एवं शिविर में चिकित्सकों द्वारा उपचारित कुछ रोगियों को आयुर्वेदिक औषधियाँ अपने हाथ से वितरित कर किया गया। प्रभारी चिकित्साधिकारी राजाजीपुरम् चिकित्सालय एवं शिविर प्रभारी डाॅ0 सुमन मिश्रा के साथ डाॅ0 पुष्पा श्रीवास्तव, डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद एवं डाॅ0 नीरज अग्रवाल, डाॅ0 कुसुम कुमारी आदि चिकित्साधिकारियों द्वारा  672 रोगियों को चिकित्सा परामर्श एवं निःशुल्क आयुर्वेदिक औषधियाँ वितरित कर उपचारित किया गया।

संयुक्त निदेशक आयुर्वेद जय शंकर मिश्रा ने अपने सम्बोधन में कहा कि जनपद लखनऊ के आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में किये जा रहे चिकित्सा शिविर की तर्ज पर प्रदेश के समस्त आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में भी ऐसे शिविरों का आयोजन किया जायेगा। इन शिविरों के आयोजन से ऐसे रोगियों को लाभ पहुंचेगा जो महंगे और दूरस्थ चिकित्सालयों में उपचार नहीं करा सकते। आयुर्वेद की औषधियाँ निरापद और उतनी ही कारगर अब भी हैं यदि उनका उपयोग सही ढंग से चिकित्सकों द्वारा रोगी का उचित निदान कर दिया  जाये। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सकों को चाहिए कि अनियमित जीवनशैली के कारण वर्तमान में उत्पन्न हो रही अनेक असाध्य बीमारियों के निदान के लिए नवीनतम अनुसंधान पर भी जोर दें और आयुर्वेद के नियमों एवं उपयोगिता के बारे में जनमानस को जागरूक भी करें।

इस अवसर पर क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डा0 शिव शंकर  त्रिपाठी ने बताया कि हम यदि ऋतुओं के अनुसार अपने आहार-विहार पर ध्यान दें तो अनेक रोगों से बचे रह सकते हैं। वर्तमान में शरद ऋतुचर्या के बारे में उन्होंने बताया कि मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण कफ एवं वात से संबंधित अनेकों रोग उत्पन्न होते हैं। इसलिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए चाहिए कि हल्दी, काली मिर्च, तुलसी, अदरक एवं मुलेठी का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन सेवन करें। इस अवसर पर डाबर, वर्गो, आर्गेनिक इण्डिया, चरक, जमुना, शिवा आदि आयुर्वेदिक औषधि निर्माताओं द्वारा औषधियाँ शिविर में निःशुल्क वितरित करने हेतु उपलब्ध करायी गयी। शिविर में आये रोगियों को आर्गेनिक इण्डिया द्वारा तुलसी पेय (चाय) का भी निःशुल्क वितरण किया गया।

Lucknow, Uttar Pradesh, India