एसटीएफ के हत्थे चढ़ा 15 साल से फरार बावरिया डकैत काला प्रधान

एसटीएफ के हत्थे चढ़ा 15 साल से फरार बावरिया डकैत काला प्रधान

लखनऊ। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने 15 साल से फरार दस हजार रुपये के इनामी कुख्यात बावरिया डकैत राज किशोर बहेलिया उर्फ काला प्रधान को उसके शातिर बेटे धर्मेन्द्र के साथ पहली बार गिरफ्तार कर बड़ी कामयाबी हासिल की। हत्या, लूट और अन्य गंभीर घटनाओं में वांछित यह दुर्दांत पांच सौ से ज्यादा वारदात कर चुका है। इसी ने 2000 में सहारनपुर में भाजपा विधायक निर्भयपाल शर्मा की हत्या कर उनके घर में डकैती डाली थी। पुलिस महानिरीक्षक एसटीएफ सुजीत पाण्डेय ने रविवार को इस दुर्दांत डकैत की गिरफ्तारी का ब्यौरा देते हुए बताया कि फर्रुखाबाद के मोहम्मदाबाद क्षेत्र के जयसिंहपुर निवासी काला प्रधान और उसके बेटे धर्मेन्द्र बावरिया को एसटीएफ की टीम ने गौतमबुद्धनगर के सूरजपुर इलाके से गिरफ्तार किया है। इनसे 315 बोर के दो तमंचे, दिल्ली के नंबर की आरटिंगा गाड़ी बरामद की गयी है। पश्चिमी उप्र के कुख्यात अपराधियों की गिरफ्तारी के लिये चलाये जा रहे अभियान के तहत एसएसपी एसटीएफ अमित पाठक द्वारा गठित टीम ने इन्हें दबोचा। उन्होंने बताया कि काला प्रधान अपने साथियों के ग्रेटर नोएडा में किसी घटना को अंजाम देने के उद्देश्य से रेकी करने आने की सूचना पर शनिवार को घेराबंदी कर पौने एक बजे साकीपुर चौराहे के पास एएसपी अजय सहदेव, सीओ राजकुमार मिश्रा की टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। काला प्रधान निर्भय पाल शर्मा की हत्या के बाद से पुलिस को चकमा देने के साथ ही वारदातें करता रहा। महज 17 साल की उम्र में अपराध की दुनियां में कदम रखने वाले काला ने अपने गांव के ही अपराधियों के साथ वारदात शुरू की। पहले ये लोग बड़े व्यावसायिक वाहन और सामग्री लदे ट्रकों को लूटते थे। इसके बाद अलग-अलग प्रांतों में और जिलों में फैक्ट्री और आवासों में भी वारदात करने लगे। काला प्रधान किसी भी घर में डकैती डालने से पहले उसकी रेकी करता और लूटपाट से पहले घरों में घुसकर बेहरहमी से लोगों की हत्या कर देता था। फिर साथ लाये ट्रक में सामान लादकर पहले से चिन्हित स्थानों पर चला जाता था। हर वारदात में दर्जन भर बदमाश शामिल होते और अंधेरी रात में तीन से चार तक घटनाएं करते। यह गिरोह सिर्फ कृष्ण पक्ष (अंधेरा पक्ष) में ही वारदात करता और शुक्ल पक्ष (उजला पक्ष) में बच्चों की मिठाई और खिलौने बेचने का काम करता था। इसी दौरान गिरोह के लोग रेकी करते थे। डकैती के लिये मकान चिन्हित करने के बाद कुल्हाड़ी से ये लोग दरवाजे को काटकर अंदर घुसते हैं। लूट और डकैती के दौरान हत्या के बाद यह लोग शराब पीकर जश्न मनाने लगते हैं। काला प्रधान ने बताया कि उसने गिरोह के साथ 1999 में एटा में चार लोगों को चोट पहुंचाकर एक किलोग्राम सोना लूटा। बाद में एक घायल की मौत हो गयी थी। 2000 में सहारनपुर में डकैती के दौरान भाजपा विधायक की हत्या कर उनके कई परिजनों को घायल किया था। सीतापुर में 2000 में सिधौली के चेयरमैन के घर में डकैती के दौरान परिवार के लोगों को घायल कर 500 ग्राम सोना और नकदी लूटी थी। उसी दौरान खीरी में डकैती के दौरान दो व्यक्तियों की हत्या कर एक किलो चांदी और 20 हजार लूटे। गोंडा में एक व्यक्ति की हत्या कर एक किलो सोना लूटा। करीब दस वर्ष पहले पुलिस का दबाव बढ़ा तो बादशाह गुर्जर के साथ मिलकर मध्यप्रदेश के मुरैना, भिंड आदि इलाकों में डकैती कीं। मध्यप्रदेश में कुछ साथियों के पकड़े जाने के बाद फिर इधर का रुख किया। 2000 में जौनपुर जिले के बक्सर थाना क्षेत्र में डकैती डालने जाते वक्त एसटीएफ से मुठभेड़ में इसके नौ साथी मारे गये थे। गिरोह के सदस्य पुलिस के दबाव के चलते नाम पता बदलकर दूसरे क्षेत्रों में रहने लगे। काला प्रधान भी दिल्ली के नजफगढ़ में फर्जी नाम से रह रहा था। राज किशोर उर्फ काले प्रधान फर्रुखाबाद के मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव गैङ्क्षसगपुर का है। वह 20 वर्ष पूर्व गांव छोड़कर चला गया था। वर्षों से बावरिया गिरोह का नेतृत्व कर रहा काले प्रधान शातिर दिमाग अपराधी माना जाता है। नाम बदलकर अपराधों को अंजाम देता है। पुलिस रिकार्ड में दर्ज काला बहेलिया उर्फ राजकिशोर उर्फ काले प्रधान पुत्र हीरा उर्फ हरी सिंह के खिलाफ 99 व 94 में बलवा व जानलेवा हमले के मामले दर्ज किये थे। करीब 10 वर्ष उसकी लोकेशन फर्रुखाबाद में पाए जाने पर राजस्थान व सीतापुर पुलिस ने कई बार दबिशें दीं, लेकिन वह हाथ नहीं लगा। गिरोह में अचूक निशानेबाज भी हैं। गिरोह ने कई वर्ष पूर्व सीतापुर के गन हाउस से असलहे भी चुराये थे। उसके कुछ रिश्तेदार कन्नौज के छिबरामऊ व औरैया में रह रहे हैं। काला बहेलिया महंगी कारों का शौकीन भी है। प्रधान के पकड़े जाने के बाद फिर उरई के कालपी में सर्राफ के यहां पड़ी डकैती की चर्चा आम हो गई। 27 मई, 2011 की रात डकैतों से मोर्चा लेने में सर्राफ राम किशुन गुप्ता की जान चली गई थी, जबकि बेटा नरेश गुप्ता व पौत्र विशाल गुप्ता गंभीर घायल हो गए था। विशाल ने 10 लाख की डकैती की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने कुछ डकैतों को दबोचा तो बावरिया गिरोह के दुर्दांत राज किशोर का नाम सामने आया था।

Lucknow, Uttar Pradesh, India