शताब्दी वर्ष में यूपी पोस्टल प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक लाएगा आर्कषक योजनाएं

शताब्दी वर्ष में यूपी पोस्टल प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक लाएगा आर्कषक योजनाएं

लखनऊ: सहकारी क्षेत्र के अग्रणी बैंक यूपी पोस्टल प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक अपनी स्थापना के 100 साल पूरा होने पर ग्राहकों को जमाराशि पर आर्कषक ब्याज देगा। बैंक अपने शताब्दी वर्ष में ग्राहकों जमाराशि पर 10 फीसदी ब्याज देने की नयी योजना ला रहा है। किसी भी सहकारी बैंक की ओर से जमाराशि पर दी जाने वाली यह सबसे ज्यादा ब्याज दर है। इसके साथ ही यूपी पोस्टल प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक दोपहिया वाहन खरीदने वालों के लिए कर्ज की अधिकतम सीमा को भी बढ़ाएगा।

यूपी पोस्टल प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक की  बुधवार को संपन्न हुयी सालाना आम सभा (एजीएम) की बैठक में सदस्यों को रिटायर होने पर सम्मानित करने का भी फेसला लिया गया। यूपी पोस्टल प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंकके उपाध्याक्ष वीरेंद्र तिवारी ने एजीएम में हुए फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि शताब्दी वर्ष समारोह के मौके पर बैंक अपने ग्राहकों के लिए कई आकर्षक जमा योजनाएं पेश करने जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं में अधिकतम 10 फीसदी ब्याज दर तक की पेशकश की जाएगी। इसके साथ ही बैंक ने दोपहिया वाहन पर दिए जाने वाले कर्ज की अधिकतम सीमा को 30000 रुपये से बढ़ाकर 50000 रुपये कर दिया है। लंबे समय तक बैंक से जुड़े रहे सदस्यों के रिटायर होने पर बैंक उन्हें विशेष रुप से सम्मानित भी करेगा।

गौरतलब है कि इस बैंक की स्थापना 1915 में यूपी पोस्टल को-ऑपरेटिव सोसाइटी के नाम से हुयी थी जिसका उद्देश्य डाक व तार विभाग के लोगों को जरुरत पडऩे पर कम से कम ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराना है। बाद में इस सोसाइटी ने रिजर्व बैंक से 1986 में लाइसेंस लेकर बैंकिंग व्यवसाय का काम शुरु किया जिसके तहत बचत खाता, आवर्ती जमा व विशेष जमा का काम किया जा रहा है। बैंक ने फरवरी 1991 से मासिक आय योजना की भी शुरुआत की है। रिजर्व बैंक के प्रोत्साहन से यूपी पोस्टल प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक ने राजधानी में पुरनियां शाखा, राजाजीपुरम विस्तार पटल के साथ कई अन्य जिलों में भी अपनी शाखाएं खोली हैं।

यूपी पोस्टल प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक  की एजीएम की समापन संध्या पर एक काव्य पाठ का भी आयोजन किया गया। बैंक के पदाधिकारी रामकिशोर तिवारी के संचालन में हुए इस काव्य पाठ में राजधानी के महत्वपूर्ण कवियों ने अपनी रचनाएं सुनायीं।