गुटखा, सिगरेट पर 40 फीसद वैट बढ़ा

गुटखा, सिगरेट पर 40 फीसद वैट बढ़ा

कैबिनेट की बैठक में लिए गए कई अहम फैसले 

लखनऊ । मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की अहम बैठक हुई, जिसमें कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। जिसमें प्रमुख रुप से कैबिनेट में सीजनल संग्रह अमीनों को स्थायी नौकरी,परिवहन बसों में जीपीएस, सीसीटीवी लगाने को मंजूरी के अलावा 500 नई एंबुलेंस बढ़ाने के साथ ही तहसीलो के जर्जर भवनो का निर्माण कार्यों की संस्तुति दी गई। इसके अलावा गुटखा और सिगरेट पर 40 फीसदी वैट बढ़ाया गया है। दरअसल, वित्तीय संकट से जूझ रही राज्य सरकार खजाने को भरने के लिए उन वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाना चाहती है जिससे उसकी कमाई में तो इजाफा हो लेकिन महंगाई की मार झेल रहा आम आदमी सीधे तौर पर प्रभावित न हो। सरकार का मानना है कि इन पर और टैक्स बढ़ाने से न केवल उसके राजस्व आय में इजाफा होगा बल्कि दाम बढऩे से लोग इसका कम उपयोग करेंगे। ऐसे में इनके इस्तेमाल से होने वाले गंभीर रोगों में भी कमी आएगी। गुटखा (तंबाकूयुक्त पान मसाला) से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के बढऩे के मद्देनजर राज्य सरकार ने इसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगा रखा है। सपा सरकार बनने के बाद पहली सितंबर 2012 से पान मसाला आदि पर टैक्स को 13.50 फीसद से बढ़ाकर 30 फीसद लागू किया गया था। राज्य सरकार खाद्य तेल को दूसरे राज्यों से लाये जाने पर फार्म-21 की व्यवस्था भी लागू करने जा रही है। इसके तहत नौ टन से ज्यादा खाद्य तेल प्रदेश में लाने पर वाणिज्य कर विभाग से फार्म 21 (परिवहन मेमो) प्राप्त करना होगा। सरकार ने कोयले से बनने वाले कोक पर भी प्रवेश कर लगा सकती है। अभी तक कोयले पर दो फीसद प्रवेश कर लगता है। सरकार का इरादा दो फीसद प्रवेश कर कोक पर भी लगाने का है। इससे सालाना 25 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है।प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 191 मॉडल स्कूलों को सार्वजनिक व निजी भागीदारी (पीपीपी) के आधार पर संचालित करेगी। राजकीय आश्रम पद्धति के विद्यालयों को नवोदय विद्यालय की तर्ज पर विकसित करते हुए इन्हें सीबीएसई बोर्ड से सम्बद्ध करेगी। इस संबंध में भी प्रस्ताव मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में बुधवार को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में किया जा सकता है। इसके अलावा डा. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुर्नवास विश्वविद्यालय के परिसर में कृत्रिम अंग व एवं पुनर्वास केंद्र की स्थापना संबंधी प्रस्ताव भी कैबिनेट बैठक में आने की उम्मीद है। लखनऊ में पुलिस भवन सिगनेचर बिल्डिंग का निर्माण व दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति के तहत सहायता देने संबंधी प्रस्तावों को भी मंजूरी दी जा सकती है। नक्सल प्रभावित जिलों में नक्सलियों के आत्मसमर्पण व पुनर्वास के संबंध में प्रस्ताव भी अपेक्षित है।

नक्सलियों हेतु आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति को मंजूरी

उत्तर प्रदेश के नक्सल प्रभावित जनपदों, क्षेत्रों में नक्सलियों हेतु आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति को मंजूरी दे दी गई है। 

इस नीति का उद्देश्य नक्सलियों की हिंसात्मक गतिविधियों एवं कट्टर नक्सलियों के जाल में फंसे हुए ऐसे पथभ्रष्ट युवाओं को पुनः समाज की मुख्य धारा से जोड़ना है, जो बहकावे में आकर नक्सलवादी आन्दोलन में शामिल हो गए थे तथा अब वहां अपने को जाल में फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं। यह नीति युवाओं को अत्मसमर्पण हेतु प्रेरित करते हुए लाप्रद रोजगार एवं उद्यमशीलता के अवसर उपलब्ध कराकर उनको पुनः हिंसा का मार्ग अपनाने से रोकने का उद्देश्य रखती है। 

यह नीति ऐसे आत्मसमर्पणों को हतोत्साहित करती है, जो मात्र सरकार द्वारा प्रदान किए जा रहे लाभों को प्राप्त कर अपना हित साधने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं। यह नीति यह भी सुनिश्चित करती है कि जो नक्सली आत्मसमर्पण करेगा वह कभी आकर्षित होकर नक्सली गतिविधियों में पुनः शामिल न हो सके।

नीति के तहत प्रत्येक आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली की स्क्रीनिंग जनपद स्तर पर एक जनपद स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा की जाएगी, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट, जनपदीय वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस महा निदेशक, अभिसूचना द्वारा नामित अभिसूचना विभाग के प्रतिनिधि व सम्बन्धित केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (जहां तैनात हैं) के प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे।

नीति के तहत जनपदीय स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा प्रेषित की गई आख्या के सम्बन्ध में इन नक्सलियों के मामलों का परीक्षण मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित की जाने वाली राज्यस्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा किया जाएगा, राज्यस्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा आत्मसमर्पण की स्वीकार्यता या अन्यथा के सम्बन्ध में 7 दिन के अन्दर निर्णय लिया जाएगा। यदि आत्मसमर्पण स्वीकार किया जाता है तो आत्मसमर्पित नक्सली को पुनर्वास शिविर में स्थानान्तरित कर दिया जाएगा।

इसी प्रकार प्रत्येक जनपद में जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में एक जनपद स्तरीय पुनर्वास समिति होगी। पुनर्वास कैम्प में किसी आत्मसमर्पित व्यक्ति के रहने की अधिकतम अवधि 3 वर्ष होगी। इस अवधि में आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्ति के पुनर्वास के सभी सम्भव प्रयास किए जाएंगे। यदि कोई समर्पण करने वाला व्यक्ति 3 वर्ष से पहले ही कहीं व्यवस्थित हो जाता है तो उसका मानदेय उसके व्यवस्थित होने की तिथि से ही बन्द कर दिया जाएगा। पुनर्वास शिविर में समर्पणकर्ता के रहने और खाने पर आने वाला खर्च उसको दिए जाने वाले 4,000 रुपये प्रतिमाह से काट लिया जाएगा।

परियोजना हेतु धनराशि का प्राविधान भी किया गया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास पर होने वाला व्यय की शतप्रतिशत प्रतिपूर्ति एस0आर0ई0 योजना के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा दी जाएगी। व्यय में होने वाले अनुमानित धनराशि की व्यवस्था वार्षिक आय-व्ययक में की जाएगी तथा व्यय की गई धनराशि की प्रतिपूर्ति भारत सरकार से कराई जाएगी। इस योजना पर वर्तमान में 10 लाख रुपये व्यय होने का अनुमान है।

Lucknow, Uttar Pradesh, India