नागा संगठनों के साथ शान्ति समझौता

नागा संगठनों के साथ शान्ति समझौता

नई दिल्ली : सोमवार का दिन भारत सरकार के लिए ऐतिहासिक दिन रहा। भारत सरकार ने सोमवार को नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (एनएससीएन-आईएम) के साथ ऐतिहासिक समझौता किया। नार्थ-इस्ट में शांति के लिए इस समझौते को अहम माना जा रहा है। समझौते से पहले पीएम मोदी ने शाम को ट्वीट कर कहा कि आज शाम आप एक अहम घटना का गवाह बनेंगे।

7 आरसीआर में आयोजित बैठक में अमित शाह, राजनाथ सिंह, मनोहर पर्रिकर भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और एनएससीएन के नेता मौजूद थे। इस बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे।

भारत सरकार के साथ समझौते के बाद एनएससीएन के महासचिव टी. मुइवा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा, 'इस समझौते से नगा बहुत खुश हैं।' समझौते पर हस्ताक्षर के बाद मुइवा ने कहा, 'हम एक दूसरे को समझने, नये संबंध बनाने के लिए नजदीक आये हैं। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि नगा भरोसेमंद हो सकते हैं।'

करार पर दस्तखत के साथ पिछले 16 सालों में हुई करीब 80 दौर की बातचीत अंतिम स्तर पर पहुंच गयी।

नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (इसाक-मुइवा) नगालैंड का सबसे बड़ा उग्रवादी संगठन है जो संघर्षविराम का पालन कर रहा है, वहीं एस एस खापलांग की अगुवाई वाला संगठन का एक और धड़ा हिंसा में लिप्त है और माना जाता है कि जून महीने में मणिपुर में सेना पर हुए हमले के पीछे उसका हाथ था जिसमें 18 जवान मारे गये और 18 घायल हो गये।

यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि समझौते में एनएससीएन (आईएम) की यह प्रमुख मांग पूरी की गयी है या नहीं कि मणिपुर, अरणाचल प्रदेश और असम में उन सभी जगहों का एकीकरण किया जाए जहां नगा लोग रहते हैं।

आधिकारिक सूत्रों ने समझौते के बाद बताया कि इस समझौते के अंतर्गत विवरण और कार्ययोजना जल्द बताई जाएगी। समझौते में डोभाल की मुख्य भूमिका रही।

समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए मोदी ने कहा, ‘आज हम न केवल समस्या का अंत कर रहे हैं, बल्कि नये भविष्य की शुरुआत भी कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हम न केवल जख्मों को भरने और समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करेंगे बल्कि आपके गौरव और प्रतिष्ठा को बहाल करने में भी आपकी मदद करेंगे।’ मुइवा ने कहा कि सरकार और नगा एक नये रिश्ते की शुरुआत कर रहे हैं लेकिन आज से चुनौतियां भी बड़ी होंगी।

समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, बसपा की मायावती, राकांपा अध्यक्ष शरद पवार और माकपा नेता सीताराम येचुरी समेत अनेक दलों के नेताओं से बात की। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता के साथ नगालैंड के राज्यपाल पद्मनाभ आचार्य और राज्य के मुख्यमंत्री टी आर जेलियांग के साथ भी फोन पर बात की। प्रधानमंत्री ने द्रमुक नेता एम करणानिधि और जेडीएस नेता एचडी देवगौड़ा से भी फोन पर बात की।

प्रधानमंत्री ने समझौता होने के दौरान कहा, ‘आज का समझौता इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि हम समानता, सम्मान और विश्वास की भावना के साथ एक दूसरे के साथ काम करते हुए क्या हासिल कर सकते हैं, यह इस बात का उदाहरण है कि जब हम चिंताओं को समझने की कोशिश करते हैं और आकांक्षाओं पर ध्यान देने का प्रयास करते हैं, जब हम विवाद का मार्ग छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाते हैं। यह हमारी समस्याग्रस्त दुनिया में एक सबक और एक प्रेरणा की बात है।’ छह दशक पुरानी नगा समस्या को औपनिवेशिक शासन में योगदान बताते हुए मोदी ने कहा, ‘यह स्वतंत्र भारत की एक त्रासदी है कि हम इस तरह की विरासत के साथ रहे।’ उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी जैसे लोगों की तादाद ज्यादा नहीं हैं जो नगा लोगों को प्यार करते हैं और उनकी भावनाओं के प्रति संवेदनशील हैं। हम गलत धारणाओं और पुराने पूर्वाग्रहों के चश्मे से एक दूसरे को देखते रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने आजादी के बाद से होती रही हिंसा के संदर्भ में कहा, ‘नगा राजनीतिक मुद्दा छह दशक से चल रहा है, जिसकी हमारी पीढ़ियों ने भारी कीमत अदा की है।’ अब तक हुई हिंसा में 3000 से अधिक जानें जा चुकी है।

मोदी ने कहा, ‘दुर्भाग्य से नगा समस्या के समाधान में इतना समय इसलिए लग गया क्योंकि हमने एक दूसरे को नहीं समझा। आज जब आप गौरव, आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की भावना के साथ एक नया वैभवशाली अध्याय शुरू कर रहे हैं तो मैं पूरे देश के साथ आपको सलाम करता हूं और नगा जनता को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं।’ मुइवा ने मोदी की सोच और दूरदृष्टि की प्रशंसा करते हुए कहा कि नगा विश्वसनीय साबित हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने सबसे पहले शांति की पहल की थी, जब संगठन ने संघर्ष विराम का वादा किया था। उसके बाद संगठन के नेताओं ने 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से बात की।

मोदी ने कहा कि यह समस्या ब्रिटिश शासन की एक विरासत है और औपनिवेशिक शासकों ने सोच के साथ नगाओं को अलग-थलग रखा। मोदी ने कहा कि उन लोगों ने पूरे देश में नगाओं के बारे में भयावह मिथक प्रसारित किये और इस बात को जानबूझकर दबाया कि नगा अत्यंत विकसित समुदाय है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नगा जनता के बारे में शेष भारत में नकारात्मक विचार भी प्रचारित किये गये। उन्होंने कहा, ‘यह औपनिवेशिक शासकों की बांटो और राज करो की भलीभांति ज्ञात नीति का हिस्सा था।’ उन्होंने कहा कि वह शांति प्रयासों में अत्यधिक समर्थन के लिए नगा जनता के अत्यंत प्रशंसक हैं। उन्होंने करीब दो दशक तक संघर्ष विराम समझौते को बरकरार रखने के लिए एनएससीएन (आईएम) की प्रशंसा की।

मोदी ने कहा कि पिछले साल पद संभालने के बाद से उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में पूर्वोत्तर में शांति, सुरक्षा और आर्थिक बदलाव शामिल रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरी विदेश नीति, खासतौर पर ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के केंद्रबिंदु में भी यही बात है।’ उन्होंने कहा कि वह एनएससीएन :आईएम: के साथ बातचीत की प्रगति पर व्यक्तिगत रूप से नजर रखते रहे।

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