मोदी सरकार गरीबों को दे रही है झांसा: विजय राघवन

मोदी सरकार गरीबों को दे रही है झांसा: विजय राघवन

लखनऊ। अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के महासचिव व पूर्व सांसद विजय राघवन ने लखनऊ में उ0प्र0 खेत मजदूर यूनियन राज्य कौंसिल बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार गरीबों को झांसा दे रही है। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियां जनता पर बोझ बढ़ाने वाली हैं तथा बड़े पूंजीपतियों की पक्ष धर हैं। सरकार ने डीजल, पेट्रोल, रसायनिक खादों व रसोईगैस की कीमतों से नियंत्रण हटाकर जनता पर बोझ डाला है। मनरेगा के बजट आवंटन को घटाया है और मनरेगा में ठेकेदारी व मशीन से कार्य की इजाजत देकर मेहनतकश जनता पर हमला बोला है। खाद्य सुरक्षा कानून अधर में लटका कर गरीब जनता की भूख और जिन्दगी से खिलवाड किया जा रहा है।  सरकार पूंजपीतियों के पक्ष में भूमि अधिग्रहण काूनन पास करने पर उतावली है। यह कानून किसानों व खेत मजदूरों का विरोधी है। आवश्यक वस्तुओं पर बढ़ती महंगाई रोकने में सरकार विफल है। कृषि संकट लगातार गहाता जा रहा है। किसानों मजदूरों को पेट पालना मुश्किल हो रहा है। अनुसूचित जाति, जनजाति सबप्लान में पिछले वर्ष के मुकाबले सरकार ने करीब 32000 करोड़ की कटौती की है जिससे दलितों के विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। 

बैठक को सम्बोधित करते हुए यूनियन के राष्ट्रीय सहसचिव सुनीत चोपड़ा ने कहा कि मोदी सरकार के ईमानदारी व स्वच्छ शासन के दावों की हवा निकल गयी है। भ्रष्टाचार, भाई भतीजावाद, भाजपाई राज्य सरकारों का खुलकर सामने आ रहा है। केन्द्र सरकार में मंत्री सुषमा स्वराज और उनके पति व पुत्री आईपीएल के अपराधी ललित मोदी के लिए काम करते रहे हैं। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ललित मोदी को इंग्लैण्ड में बनेरहने की सिफारिश की थी। ललित मोदी ने बसुंधरा के पुत्र दुष्यंत की कम्पनी में कई गुने ऊंचे प्रीमियम पर शेयर खरीदे थे। मध्यप्रदेश में भाजपाई सरकार के मुख्यमंत्री सहित कई मंत्री व भाजपा के कई नेता और अफसर व्यापम घोटाले में फंसे हैं। इस मामले में जांच के दौरान करीब 45 लोगों की असमय मौत हुई है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पंकजा मुंडे व विनोद तावड़े भी भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं। भ्रष्टाचार में बड़े कारोबाीर व नेता और नौकरशाहों की तिकड़ी काम कर रही है। 

यूनियन की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने कहा कि देश व प्रदेश में हिन्दुत्ववादी साम्प्रदायिक ताकतें आरएसएस, विहिप और भाजपा की तिकड़ी सक्रिय है और अमन चैन खराब करने पर तुली है। ये साम्प्रदायिक ताकतें राम मंदिर, गोहत्या, घर वापसी, लव जेहाद जैसे मुद्दे उठाकर दंगे भड़काने व तनाव बढ़ाने और माहौल बिगाड़ने की कोशिशों में लगी हैं। हमें गरीबों को संगठित कर उनकी रोजी, रोटी, रोजगार व अन्य सामाजिक समस्याओं पर आंदोलन करने होंगे और यूनियन के सदस्य बनाकर संगठन का विस्तार करना होगा। उन्होंने इलाहाबाद में चलाये जा रहे आंदोलनों का भी उदाहरण दिया। 

बैठक में रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए यूनियन राज्य महासचिव बी.एल. भारती ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार व प्रशासन की मानसिकता भी मेहनतकश जनता के विरोध में साफ दिखायी देती है। राज्य सरकार भी उदारीकरण निजीकरण की नीतियों को तेजी से लागू कर जनता पर संकट डाल रही है। बार बार घरेलू बिजली की दरें बढ़ाकर जनता पर वजन डाला जा रहा है। मनरेगा लागू करने में शासन प्रशासन उदासीन रहा है। खाद्य सुरक्षा लागू करने को सरकार बार बार टाल रही है। राज्य की जनसंख्या में आधे से अधिक खेत मजदूर व गरीब किसान हैं। गहराते कृषि संकट ने अधिकतर ग्रामीण आबादी को अपनी जकड़ में ले लिया है। कृषि क्षेत्र में औसत रोजगार 40 दिनों से भी नीचे चला गया है। पिछले वित्तीय वर्ष में करीब डेढ़़ करोड़ मनरेगा मजदूरों में से मात्र 60 लाख मजदूरों को ही थोड़ा बहुत रोजगार मिल सका है। मनरेगा में भी रोजगार का औसत प्रति वर्ष गिर रहा है। रंगराजन कमेटी द्वारा खीची गयी गरीबी रेखा ग्रामीण क्षेत्र में 971 रूपये व शहरी क्षेत्र में 1407 रूपये प्रतिमाह तक आय वाला ही गरीब है, के अनुसार  आठ करोड़ नौ लाख दस हजार गरीब हैं जो कि देश के कुल गरीबों का 22 प्रतिशत हैं। भोजन की समस्या प्रमुख बनी हुई है। लक्षित वितरण प्रणाली के चलते आधे से अधिक खेत मजदूर परिवार बीपीएल, अन्त्योदय राशनकार्ड से वंचित हैं। केन्द्र की तरह राज्य सरकार ने भी भूमि सुधार कानूनों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। प्रदेश में अब भी लाखों एकड़ भूमि मौजूद है जिसे गरीबों में बांटा जा सकता है लेकिन ऐसी जमीनों पर नेता और सामंत व साधू अवैध कब्जा करते जा रहे हैं। सरकार इस ओर ध्यान देने की बजाय बेरहमी से हाइवे रोड व हाइटेक सिटी के लिए भूमि अधिग्रहण में लगी है। महामाया, वृद्धावस्था, विधवा, विकलांग पेंशन के लाभार्थी पेंशन न मिलने से निराश बने हुए हैं। समाजवादी पेंशन भी ‘‘अंधा बांटे रेवड़ी फिर फिर अपनिन को देय’’ कहावत सिद्ध करते हुए जन असंतोष बढ़ा रही है। कक्षा आठ तक के छात्रों की छात्रवृत्ति बंद करके सरकार ने गरीब जनता के साथ अन्याय ही किया है उच्च शिक्षा में भी छात्रवृत्ति में कई पेंच लगा दिये गये हैं। दलित कन्याओं की शादी हेतु अनुदान सहित तमाम सामाजिक सुरक्षा स्कीमों में कटौती की गयी है। प्रदेश की कानून व्यवस्था खराब ही बनी हुई है। चोरी, डकैती, अपहरण, रोड डकैती, हत्या, बलात्कार जैसे गंभीर अपराध रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं। दलितों पर अपराधों में भी वृद्धि हुई है। एससी/एसटी एक्ट के अंतर्गत गत वर्ष करीब सात हजार मामले पंजीकृत हुए हैं। लेकिन ये मामले पूरी सच्चाई को उजागर नहीं करते क्येांकि बहुत सारी घटनाओं को थाने में दर्ज ही नहीं किया जाता। रिपोर्ट दर्ज करने की बजाय पुलिस मामले को रफादफा कर देती है और थाने से भगा देती है। दलित महिलाओं पर बलात्कार की घटनायें आये दिन होती रहती हैं। प्रदेश की कुल आबादी में करीब 21 फीसदी दलित हैं जिनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति दयनीय है और विकास की दृष्टि से हासिये पर हैं। वे जातिगत भेदभाव छुआछूत और शोषण का शिकार हैं।

Lucknow, Uttar Pradesh, India