इमामबाड़े पब्लिक प्लेस नहीं हो सकते: मौलाना कल्बे जवाद

इमामबाड़े पब्लिक प्लेस नहीं हो सकते: मौलाना कल्बे जवाद

इमामबाड़ों की गरिमा और सुरक्षा के लिए कौम हर बलिदान के लिये तैयार

लखनऊ: नमाजे जुमा के खुत्बे में हजारों नमाजियों को संबोधित करते हुए इमामे जुमा मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी ने इमामबाड़ों को पब्लिक प्लेस कहे जाने पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ऊपर से नीचे तक एक ही नीति है कि किसी तरह इमाम बाड़ों की धार्मिक स्थिति को समाप्त कर दिया जाए इसी योजना के साथ अपने आदमी से पीआईएल कराई गई जिसमें उन्होंने कहा कि यह इमाम बाड़े नहीं बल्कि पब्लिक प्लेस हैं और पर्यटन स्थल है ।डी 0एम0 ने भी यही बयान दिया है इसलिए अदालत ने ताले खुलवाने का आदेश दिया । मोलाना ने कहा कि सरकार समझ ले कि यह धार्मिक स्थलों और इमाम बाड़े हैं। हम किसी भी हाल में उन्हें पब्लिक प्लेस नहीं मान सकते चाहे इसके लिए हमें जेल ही क्यों न जाना पड़े और इमाम बाड़ों के लिए कौम किसी भी बलिदान से पीछे नहीं हटेगी।

मौलाना ने आगे कहा कि इमाम बाड़ों के लिए एक समिति बनाई जाए जिसमें उलेमा हूँ, वकील हूँ और शाही परिवार के लोग हों, लेकिन यह सब ऐसे लोग हैं जो सरकारी ना हों, ईमानदार और कौम के प्रति वफादार हूँ। यह समिति ट्रस्ट में हुई बे इमानीयों का शोध करे और जो भी इमाम बाड़े में आऐ वह धार्मिक कानून के पालन के साथ आए।

मौलाना ने कहा कि मोहम्मद अली शाह की डीड में लिखा है कि इमाम बाड़े के सामने वाली पूरी सड़क वक्फ है इसलिए इस पर डीएम या किसी के द्वारा धार्मिक होरडिनग पर कैसे रोक लगाई जा सकती है । मोलाना ने कहा कि सरकार हमारा केवल एक मांग मान ले के ट्रस्ट और वक्फ बोर्ड की सीबीआई जांच कराए अगर वह अध्यक्ष की सीबीआई जांच से भयभीत है तो उनके साथ मेरी भी सीबीआई जांच कराए ताकि कौम के सामने उनकी असलियत आसके।

मौलाना ने कहा कि अब कौम की प्रतिष्ठा का मामला है इसलिए कौम पीछे नहीं हटेगी क्योंकि अगर ऐसा होता है तो इमामबाड़े हाथ से चले जाएंगे। कुछ भी हो हम इमाम्बाड़ों को पब्लिक प्लेस नहीं मान सकते। चाहे इसके लिए कौम के बच्चे बच्चे को जेल जाना पड़े हम इमाम बाड़ों की गरिमा और सुरक्षा के लिए हर बलिदान के लिए तैयार हैं।

मौलाना ने ट्रस्ट प्रशासन के इफ्तार न भेजने के बहाना प्रसार पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा के नमाजे जुमा मे हजारों की भीड़ देखकर क्या अब भी वह झूठ बोलेंगे आखरि यह भीड़ कैसे आयी अगर दरवाजे बंद हैं । इमाम बाड़ों के  दरवाजे नमाजियों और जयिारत करने वाले के लिए कभी बंद नहीं हुए जैसे यह हजारों की भीड़ अंदर आयी क्या इसी तरह इफ्तार अंदर नहीं आ सकते । सच ये है के जिस तरह ट्रस्ट की संपत्ति में बे इमानियाँ हो रही हैं उसी तरह इफ्तार की राशि भी खा जाना चाहते हैं ।मीडया आकर खुद देख नमाजियों के लिए दरवाजे बंद नही हैं और क्यों ट्रस्ट प्रशासन बहाने बाजी कर रहा है।

इमामबाड़े पर नोटिस चस्पा 

उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ को आश्वासन दिया है कि अदालत के आदेश के अनुपालन में 29 जून तक इमामबाड़ों के ताले खुलवा दिए जाएंगे। इसी सिलसिले में आज बड़े इमामबाड़े पर लखनऊ जिला प्रशासन ने नोटिस चस्पा कर दिया है। उल्लेखनीय है कि मामले की अगली सुनवाई 29 जून को होनी है। न्यायमूर्ति अरुण टंडन व न्यायमूर्ति अनिल कुमार की खंडपीठ के समक्ष याची मसर्रत हुसैन ने अर्जी प्रस्तुत कर कहा कि अदालत के आदेश के बावजूद भी अभी इमामबाड़ों का ताला नहीं खुला है। इस पर राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आगामी 29 जून तक आदेश का पालन कर दोनों इमामबाड़ों के ताले खुलवा दिए जाएंगे।

Lucknow, Uttar Pradesh, India