श्रीनिवासन ने आईसीसी को शर्मसार किया: मुस्तफा कमाल

श्रीनिवासन ने आईसीसी को शर्मसार किया: मुस्तफा कमाल

नई दिल्ली। आईसीसी के पूर्व अध्यक्ष मुस्तफा कमाल ने आईसीसी के चेयरमैन एन श्रीनिवासन पर लगाए पुराने गंभीर आरोपों को दोहराया है। क्रिकेटनेक्स्ट से बातचीत में मुस्तफा ने आरोप लगाया कि श्रीनिवासन ने क्रिकेट वर्ल्ड कप 2014 के क्वार्टर फाइनल में भारत की जीत की स्क्रिप्ट लिखी थी। पेश है मुस्तफा से बातचीत  के अंश।

सवाल- वनडे सीरीज में भारत पर ऐतिहासिक जीत पर आप क्या कहना चाहेंगे?

मुस्तफा कमाल- हां, ये शानदार जीत है। हर बांग्लादेशी गर्व महसूस कर रहा है। बांग्लादेश हालांकि अभी भी सीखने की प्रक्रिया से गुजर रहा है लेकिन उसमें किसी भी टीम को हारने का माद्दा है। आपने देखा होगा कि हम इंग्लैंड को तीन बार हरा चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया में हुए वर्ल्ड कप में भी हमने उसे हराया। हमारे पास कई युवा खिलाड़ी हैं जो लगातार टीम में आ रहे हैं। हमारे पास भविष्य के लिए अच्छे खिलाड़ी तैयार हैं।

सवाल- बांग्लादेश में क्रिकेट के विकास में आईसीसी की भूमिका कैसी रही?

मुस्तफा कमाल- आईसीसी सीधे तौर पर किसी देश की मदद नहीं करता बल्कि अपरोक्ष रूप से करता है। आईसीसी हर सदस्य देश की मदद करता है ताकि वो एक दूसरे के साथ खेल सकें और सीख सकें। दूसरा, आईसीसी के एफटीपी से बहुत मदद मिलती है। इससे सभी सदस्य देशों को आगे बढ़ने में मदद मिलती है। लेकिन भारत और बांग्लादेश एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब शुरुआत में हमने खेलना शुरू किया तो भारत ने बहुत मदद की। दूसरे देश हमें टेस्ट का दर्जा देने के ज्यादा इच्छुक नहीं थे। तब भारत ने हमारी मदद की। क्रिकेट से दोनों देशों के संबंध भी मजबूत होते हैं।

सवाल- पूरी दुनिया वर्ल्ड कप क्वार्टर फाइनल के विवाद से वाकिफ है, आपका क्या रुख था। आपको आईसीसी और इसके चेयरमैन श्रीनिवासन से कुछ दिक्कतें थीं। आपको इस पर क्या कहना है?

मुस्तफा कमाल-देखिए, वर्ल्ड कप फाइनल में कोई विवाद नहीं हुआ। प्रेजेंटेशन सेरेमनी में मि. श्रीनिवासन मौजूद थे। उन्हें लगा हर कोई इसे हाथोंहाथ लेगा, पर ऐसा नहीं हुआ। इसलिए मैंने उन्हें चेताया क्योंकि क्रिकेट को जानने वाला हर शख्स जानता है कि ट्रॉफी देने का अधिकार आईसीसी अध्यक्ष का होता है ना कि चेयरमैन का। ये उनकी बदकिस्मती है और उन्होंने खुद को, क्रिकेट को और इस संस्था को बदनाम किया है। मैं बहुत कुछ कर सकता था, ग्राउंड में जा सकता था। मैं खुद ट्रॉफी दे सकता था, मैं ऐतराज कर सकता था। लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया और वहां नहीं गया। मैंने कहा, ओके, फाइन।

सवाल- श्रीनिवासन पर भ्रष्टाचार सहित कई केस चल रहे हैं। क्या आपको नहीं लगता कि आईसीसी को सोचना चाहिए कि खेल की छवि खराब हो रही है?

मुस्तफा कमाल- अब मैं आईसीसी में नहीं हूं। मैंने अच्छा काम किया था। जब में आईसीसी में था तब गलत बातों का विरोध किया। मैं गलत चीजें स्वीकार नहीं कर सकता था इसलिए मेरे पास कोई चारा नहीं था। मेरे पास अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। इसलिए मैं अब इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता था। मैंने पूरा मामला क्रिकेटिंग बॉडी पर छोड़ दिया है। जिन लोगों ने अपने देश को शर्मसार किया, अपनी संस्था का असम्मान किया, ऐसे लोगों ने ऐसी संस्था को जमींदोज किया जिसमें पूरी क्रिकेट दुनिया समाहित है। मेरा मानना है कि किसी को भी साफ छवि का होना चाहिए। ये नैतिकता का मामला है। जिस आदमी के साथ कई नेगेटिव बातें हों, उसे आईसीसी से जुड़ा नहीं होना चाहिए।

सवाल- बीसीसीआई में बदलाव आया है। जगमोहन डालमिया ने फिर वापसी की है। आपको लगता है कि अब बीसीसीआई में बदलाव आएगा खासतौर पर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड से संबंधों को लेकर?

मुस्तफा कमाल- बीसीसीआई और बीसीबी के बीच मजबूत संबंध रहा है। हम मि. डालमिया से लगातार बात कर रहे हैं। मुझे लगता है कि उनके दिमाग में ये बात होगी कि बांग्लादेश क्रिकेट लगातार सुधार की ओर है। उन्होंने बांग्लादेश का समर्थन किया है। उन्होंने आईसीसी में अपने कार्यकाल के दौरार बांग्लादेश को टेस्ट दर्जा देने का समर्थन किया था। आज देखिए हम अच्छा कर रहे हैं। मेरे उनसे संबंध बहुत अच्छे हैं। बांग्लादेश क्रिकेट के भारतीय क्रिकेट के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं। मेरे भी उनसे अच्छे संबंध हैं। एक दिन पहले ही मुझे डालमिया की ओर से खत भी मिला है।

सवाल- बांग्लादेश ने पहले पाकिस्तान को 3-0 से हराया फिर भारत को। क्या आपको लगता है ये बांग्लादेश के लिए नई शुरुआत है?

मुस्तफा कमाल- बांग्लादेश के लिए कोई शुरुआत नहीं है। क्रिकेट धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। भारत में आईपीएल हो रहा है। बहुत पहले हमारे यहां बीपीएल हुआ। रमना लांबा ने भी बांग्लादेश में खेला। टेस्ट दर्जा मिलने से पहले भी हमारे यहां बड़े खिलाड़ियों ने आकर खेला। अफरीदी, अशोक डिसिल्वा, शोएब मलिक, वसीम अकरम और अजय जडेजा जैसे खिलाड़ी यहां आकर खेले। मेरे मुताबिक ये एक मक्का था। भारत करीब 100 सालों से क्रिकेट खेल रहा है और बांग्लादेश 15 साल से। हमें अभी बहुत दूर जाना है।

सवाल- वर्ल्ड कप के बाद बहुत विवाद हुआ, क्या ये जीत बदला है?

मुस्तफा कमाल- ऐसा कुछ नहीं है। ये अस्थायी था जो गलतफहमी से पैदा हुआ था। जब मैंने कहा कि मैं आईसीसी से इस्तीफा दे रहा हूं तो बांग्लादेश में हर कोई मुझसे नाखुश था। उन्हें लगा मैं भारत के खिलाफ कदम उठा रहा हूं। मैंने तो बस इतना कहा कि खेल ईमानदारी से नहीं हुआ। ये आईसीसी का फैसला था, आईसीसी कौन चला रहा है, प्रेसीडेंट या चेयरमैन। गलती चेयरमैन ने की, मैं उनके खिलाफ था। वहां स्पाइडर कैमरा क्यों नहीं था, उस दिन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ। मैच में भारत जीता, बांग्लादेश हारा। अगले दिन भारत का मैच था, तब स्क्रीन पर क्यों नहीं लिखा हुआ था, जीतेगा जीतेगा इंडिया जीतेगा, ऑस्ट्रेलिया हारेगा। क्या कोई ऐसा कर सकता है? तो फिर बांग्लादेश के खिलाफ ऐसा क्यों? और मैं बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर रहा था। मैं बांग्लादेश क्रिकेट के हितों की रक्षा के लिए वहां था और अगर ये जिम्बाव्वे के साथ होता तब भी मैं अपनी आवाज उठाता। क्या मेलबर्न में बिना कैमरे के कोई मैच हुआ है? क्या किसी मैच में ऐसा हुआ? क्यों? क्यों इस तरह से निशाना बनाया गया? किसने निशाना बनाया? क्योंकि जो शख्स भारत में तमाम चीजें कर रहा था वो मेलबर्न में भी कर सकता था।