‘महिला-सम्मान प्रकोष्ठ' पर अखिलेश सरकार के दावे खोखले

‘महिला-सम्मान प्रकोष्ठ' पर अखिलेश सरकार के दावे खोखले

यूपी में जब-जब समाजवादी पार्टी की सरकार रही है, क़ानून व्यवस्था पर हमेशा उंगली उठती रही है. महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराध भी इनमे से एक हैं. इन सबके बीच सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के "लड़के हैं,लड़कों से ग़लती हो जाती है"  और "आबादी के हिसाब से यूपी में महिलाओं के विरुद्ध अपराध कम हैं" जैसे वक्तव्यों से समाज में जाती सपा सरकार की ग़लत छवि को सुधारने के लिए सूबे के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी सांसद पत्नी डिंपल यादव ने आगे आकर महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए कई लुभावनी योजनाओं की घोषणा बड़े जोरदार ढंग से की हैं। 

बताते चलें कि इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार ने बीते साल के अगस्त महीने में महिलाओं, नाबालिग बच्चियों व मासूमों के साथ होने वाले अपराधों पर लगाम कसने और उनके आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करवाने के लिए पुलिस महकमे में महिला सेल को और ताकतवर बनाते हुए महिला सम्मान प्रकोष्ठ का गठन किए जाने की घोषणा की थी.इस सेल को सुरक्षा के साथ महिलाओं से जुड़े अन्य मामलों जैसे भ्रूण हत्या, देहातों में शौचालयों की कमी जैसे सामाजिक मुद्दों पर कार्रवाई में भी मदद करनी थी. जिलों की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और वीमेन पावर लाइन 1090 की नोडल एजेंसी भी इसी प्रकोष्ठ को बनाया गया था. डीजीपी के नेतृत्व में एडीजी स्तर के अधिकारी को इसका  प्रमुख बनाया गया था. तब अखिलेश ने घोषणा की थी कि महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों व उत्पीड़न के मामलों की संवेदनशीलता और उनकी रोकथाम के लिए इस  प्रकोष्ठ के गठन का  फैसला लिया गया था. इस सेल के लिए जरूरी सभी संसाधन डीजीपी द्वारा उपलब्ध कराए जाने की बात थी.

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा  इस योजना  को गाहे बगाहे संचार के सभी माध्यमों से तो ज़ोर-शोर से प्रसारित-प्रचारित किया ही गया, साथ ही साथ अखिलेश ने स्वयं भी सार्वजनिक और राजनैतिक मंचों से  महिला सम्मान की इस योजना की जोरदार चर्चा करके इसे  अपनी सरकार की उपलब्धि बताकर अपनी सरकार की छवि को सुधारने का भरसक प्रयास किया है. बड़ा सबाल यह है कि क्या अखिलेश यादव और सपा सरकार के महिलाओं के हितैषी होने के दावे सच्चे हैं ?

क्या मंचों से की गयी अखिलेश की महिला सम्मान रक्षा की ये घोषणायें जमीनी स्तर पर क्रियान्वित हुई हैं या वह सपा सरकार की मात्र भाषणों और प्रचार-प्रसार के लिए की गयी राजनैतिक बाजीगरी  थी जो अब तक महज कागजों में ही दफ़न हैं? मेरी एक आरटीआई पर उत्तर प्रदेश के महिला सम्मान प्रकोष्ठ के जन सूचना अधिकारी के जबाब के बाद यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। 

दरअसल मेरी एक आरटीआई पर उत्तर प्रदेश के महिला सम्मान प्रकोष्ठ के जन सूचना  अधिकारी के जबाब से सरकार की इस योजना के लिए किए गये सभी सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। महिला सम्मान प्रकोष्ठ के संबंध में अखिलेश सरकार के दावे हकीकत से बिल्कुल विपरीत हैं। यह खुलासा सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत हुआ है। दरअसल मैने बीते साल 30 अगस्त को गृह विभाग के जन सूचना अधिकारी को एक अर्जी देकर  उत्तर प्रदेश के महिला सम्मान प्रकोष्ठ की गतिविधियों के संबंध में जानकारी माँगी थी.  महिला सम्मान प्रकोष्ठ के जन सूचना  अधिकारी  ने मुझे जो जवाब दिया है वह वाकई चौंकाने वाला है। मुझे बताया गया है कि 30 अगस्त 2014 तक महिला सम्मान प्रकोष्ठ का न तो कोई कार्यालय था और न ही कोई स्टाफ. महिला सम्मान प्रकोष्ठ के जन सूचना  अधिकारी  ने मुझे यह भी बताया है कि अब भी महिला सम्मान प्रकोष्ठ में कोई भी नियमित स्टाफ नहीं है और मात्र कुछ लोग यहाँ संबद्ध किए गये हैं. और तो और, आरटीआई एक्ट में 30 दिनों में सूचना देने की बाध्यता होने पर भी महिला सम्मान प्रकोष्ठ के जन सूचना  अधिकारी ने महिला सम्मान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी सूचना माँगे जाने के साढ़े आठ माह बाद और 02 माह के अतिरिक्त समय की माग की है.

महिलाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई और कार्रवाई पर रखेंगे नजर रखने,एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और वीमेन पावर लाइन की नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करने,पॉक्सो एक्ट, महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, प्रीवेंशन आफ इमौरल ट्रैफिकिंग एक्ट, कार्यस्थल पर यौन शोषण से जुड़े मामलों, रेप, घरेलू हिंसा और दहेज से जुड़े मामलों की सुनवाई और कार्रवाई को देखने,मानव तस्करी को रोकने के लिए योजना बनाने,एसिड अटैक के मामलों में प्रभावी कार्रवाई करने और पीड़िता को मुआवजा दिलाने,पुलिसकर्मियों को महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनाने और समय-समय पर उनकी महिला अपराधों की संवेदनशीलता को लेकर ट्रेनिंग कराने,गुमशुदा महिलाओं व बच्चों के साथ होने वाले अपराधों व उनके डीएनए का डाटाबेस बनाने और सूबे की पुलिस के साथ दूसरे राज्यों की पुलिस से समन्वय स्थापित करने,महिलाओं की सुरक्षा के लिए नई तकनीकों के बारे में पता करने और उन्हें सूबे में लागू करवाने,पुलिस , सरकारी विभागों और सिविल सोसायटी में महिला संबंधी नीतियों जैसे भ्रूण हत्या , देहातों में शौचालय के निर्माण, पर फीडबैक देने, पुलिस की वेबसाइट पर आने वाली महिलाओं की शिकायतों का प्रभावी तरीके से निस्तारण व कार्रवाई कराने,वैवाहिक विवादों में मीडिएशन के लिए बनी सेवाओं की देखरेख का कार्य करने और महिलाओं व बच्चों से जुड़े अपराधों में मुआवजा दिलाने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य  करने जैसी बड़ी बड़ी ज़िम्मेदारियों के लिए सूबे के डीजीपी के नेतृत्व में एडीजी स्तर के अधिकारी के अधीन कार्य करने को बनाए गये अखिलेश सरकार के इस चर्चित महिला सम्मान प्रकोष्ठ में संसाधनों की पूर्ण अनुपलब्धता अखिलेश यादव और सपा सरकार की कथनी और करनी के अंतर को स्वयं ही उजागर कर रही है.

हमें खेद के साथ कहना पड़  रहा है कि अपर पुलिस महानिदेशक- मानवाधिकार सुतापा सान्याल, जो महिला सम्मान प्रकोष्ठ की प्रभारी भी हैं, ने महिला होते हुए भी आधे साल से अधिक बीत जाने पर भी इस प्रकोष्ठ को ज़मीनी स्तर पर कार्यशील बनाने की  दिशा में कोई भी प्रयास  नही किया है और सरकार की महिला सम्मान की यह पहल आज भी कागजों में ही दफ़न है.

हमारा संगठन 'तहरीर' सूबे के राज्यपाल राम नाइक और सूबे के मुखिया अखिलेश यादव को माँग-पत्र  भेजकर उत्तर प्रदेश  महिला सम्मान प्रकोष्ठ को नियमित कार्यालय,स्टाफ,बजट और अन्य ज़रूरी संसाधन और सहायता तत्काल  उपलब्ध कराते हुए इस प्रकोष्ठ के कार्यों का अनुश्रवण  नियमित रूप से स्वयं करने का आग्रह भी कर रहा है.

इंजीनियर संजय शर्मा

संस्थापक अध्यक्ष - तहरीर

मोबाइल 8081898081