कभी मोदी ने इसे यूपीए सरकार की नाकामी और संसद का अपमान बताया था 

नई दिल्ली: शुक्रवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में 3.13 रूपये और डीज़ल के दामों में 2.71 रूपये बढ़ोतरी की घोषणा की। तेल के दामों में ये इस महीनेे यह दूसरी बढ़ोतरी है और मोदी के शासन काल की आठवीं ।  इससे पहले एक मई को पेट्रोल के दाम में 3.96 रुपए प्रति लीटर का इज़ाफ़ा किया गया था। यानी बीते दो सप्ताह में पेट्रोल के दाम 7.09 रुपए प्रति लीटर बढ़ चुके हैं।  इससे पहले तेल के दामों में इतना बड़ा इज़ाफ़ा यूपीए सरकार ने मई 2012 में किया था। 

तब विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि आम आदमी को लूटा जा रहा है। गुजरात के तत्कालनी मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सिंह सरकार की आलोचना करते हुए ट्वीट किया था, “पेट्रोल के दामों में भारी इज़ाफ़ा कांग्रेस के नेतृत्व की यूपीए सरकार की नाकामी का उदाहरण है।  इससे गुजरात पर सैंकड़ों करोड़ का भार पड़ेगा। “मोदी ने अपने ट्वीट में पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी को संसद का अपमान भी बताया था। 

 

पहले बीते साल अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दामों में आई कमी से जब पेट्रोल के दाम गिरे थे तब मोदी ने इसे अपना ‘नसीब’ बताया था। मोदी ने बीते साल अक्तूबर में ट्वीट किया, “जबसे हमने सरकार बनाई है पेट्रोल और डीज़ल के दाम कम हो गए हैं।  हम देश के सामने आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। “

लेकिन अब जब तेल के दाम बढ़ रहे हैं तो सरकार चला रहे मोदी ख़ामोश हैं और विपक्ष में बैठी कांग्रेस सवाल उठा रही है। कांग्रेस ने फ़ेसबुक पर पोस्ट किया, “ठीक एक साल पहले कच्चे तेल के दाम 106 डॉलर प्रति बैरल थे और पेट्रोल 71.41 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था।  अब कच्चे तेल के दाम 65 डॉलर पर हैं लेकिन पेट्रोल 66.29 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है।  देश का मध्यम वर्ग सोच रहा है कि यदि कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर से ऊपर हो गए तो क्या होगा? क्या यही अच्छे दिन हैं जिनका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया था। “वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय माकन ने तेल के दामों में हुए इज़ाफ़े को सरकार की सालगिरह का तोहफ़ा बताया है।