सीबीआई अधिकारियों ने नहीं होने दिया डॉन डी का सरेंडर

सीबीआई अधिकारियों ने नहीं होने दिया डॉन डी का सरेंडर

तत्कालीन डीआईजी और दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर नीरज कुमार का खुलासा 

नई दिल्ली : 1993 के मुंबई सीरियल धमाकों में वांछित देश के मोस्ट वांटेड और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ने आत्मसमर्पण करने का फैसला कर लिया था। लेकिन सीबीआई के शीर्ष अधिकारियों ने ऐसा नहीं होने दिया। यह खुलासा सीबीआई के तत्कालीन डीआईजी और दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर नीरज कुमार ने इस साल के अंत में अपनी आने वाली किताब के चैप्टर 'डायलॉग विद द डॉन' में किया है। इस किताब का नाम अभी तय नहीं हुआ है।

अपने 37 साल के करियर में 10 बड़ी इनवेस्टिगेशन को एक किताब की शक्ल देने वाले नीरज कुमार का कहना है कि दाऊद इब्राहिम 1993 में मुंबई बम धमाके के 15 महीने बाद सरेंडर करना चाहता था। वह सरेंडर करने के लिए उस वक्त के सीबीआई डीआईजी नीरज कुमार से बात भी कर चुका था, लेकिन कुछ वजहों से एजेंसी ने यह स्वीकार नहीं किया और वह आज भी भारत की पकड़ से दूर है। डी-कंपनी के नाम से काले कारनामे करने वाले दाऊद से सीबीआई अधिकारी नीरज कुमार ने तीन बार बात की थी। दाऊद मुंबई बम धमाकों के मामले में मुख्य आरोपी है।

नीरज कुमार के मुताबिक, 'दाऊद का विश्वासपात्र और डी-कंपनी के कानूनी मामले देखने वाला मनीष लाला फोन पर बातचीत कराता था। लाला के पास लॉ में कोई डिग्री नहीं थी, लेकिन वह दाऊद के लिए कानूनी मामले देखता था। मैं मुंबई की ऑर्थर रोड जेल में लाला से मिला था।' सीबीआई ने एक अन्य मामले में उसे गिरफ्तार किया था और वह मुंबई की जेल में बंद था। बैठने के लिए कुर्सी ऑफर करने के बाद से लाला सीबीआई अफसर नीरज कुमार पर विश्वास करने लगा था। नीरज कुमार 1993 से लेकर 2002 तक सीबीआई में थे।

अपनी किताब का हवाला देते हुए नीरज कुमार ने एक अंग्रेजी अखबार से कहा, 'मैंने जून 1994 में तीन बार दाऊद इब्राहिम से बात की थी। वह सरेंडर करने पर विचार कर रहा था, लेकिन उसे एक चिंता थी। उसे डर था कि जब वह भारत आएगा तो उसके प्रतिद्वंद्वी गैंग उसे खत्म कर देंगे। मैंने उसे सुरक्षा के बारे में आश्वस्त भी किया था और कहा था कि उसकी सुरक्षा सीबीआई की जिम्मेदारी होगी।' लेकिन इसके बाद उनके सीनियर अफसरों ने फोन पर बातचीत करने का सिलसिला खत्म करा दिया।

नीरज कुमार ने कहा, दाऊद इसके बाद भी बातचीत करना चाहता था, लेकिन मुझे इसकी अनुमति नहीं थी। इसलिए मैंने उससे आगे बात नहीं की। जुलाई 2013 में दिल्ली पुलिस कमिशनर के पद से रिटायर होने वाले नीरज कुमार मुंबई में 12 मार्च 1993 को हुए 13 धमाकों के मामले की सीबीआई जांच का नेतृत्व कर रहे थे। मुंबई में एक के बाद एक सिलसिलेवार धमाकों में 257 लोगों की जान गई थी और 700 लोग घायल हुए थे।

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