संकटमोचक मंदिर में ग़ुलाम अली ने बिखेरा अपनी मखमली आवाज़ का जादू

संकटमोचक मंदिर में ग़ुलाम अली ने बिखेरा अपनी मखमली आवाज़ का जादू

वाराणसी। "फासले इतने बढ़ जाएंगे सोचा न था", गजलों के शहंशाह उस्ताद गुलाम अली ने अपने गजल के इन्हीं चंद मुखड़ों से शायद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को बयां करने की कोशिश की और कहा, "मुहब्बत का पैगाम लेकर आया हूं।" अली उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में छह दिवसीय संकट मोचन संगीत समारोह के उद्घाटन समारोह में गजल पेश कर रहे थे। वह पहले पाकिस्तानी कलाकार हैं, जिन्होंने ऎतिहासिक श्री संकट मोचन मंदिर में अपनी कला की प्रस्तुति की। 

मखमली आवाज के मालिक इस गजल गायक के चाहने वाले लोग बुधवार शाम से ही मंदिर परिसर में जुटने लगे थे। आधी रात को जब वह मंच पर दाखिल हुए तो वहां मौजूद हजारों संगीत रसिकों ने हर-हर महादेव के जयकारे लगाकर उनका स्वागत किया। मंदिर प्रबंधन समिति के प्रमुख प्रो. विशंभर नाथ मिश्र ने शॉल भेंट कर उनका स्वागत किया। 

पाकिस्तानी मेहमान गायक के साथ कोलकत्ता के पंडित अनिंदो चटर्जी ने तबले पर जुगलबंदी की। गजल सम्राट ने "गोरी तेरे नैन कजर बिन काले" ठुमरी से अपनी प्रस्तुति शुरू की और "रोज कहता हूं भूल जाउं उसे, रोज ये बात भूल जाता हूं", "दिल में एक लहर सी उठी है अभी" जैसी दिल को छू जाने वाली गजलें पेश कर हजारों संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया।

गजल सम्राट ने अपने चाहने वालों की कई फरमाइशें पूरी कीं और इस तरह लगभग पौने दो घंटे तक दिल की बात जुंबा पर लाते रहे। भोर में पौने तीन बजे उन्होंने मंच से विदा लिया। समारोह स्थल से विदा लेते वक्त उन्होंने संवाददाताओं से कहा, जितना सोचा था, उतना प्यार और सम्मान यहां मिला। इससे पहले उन्होंने कहा था कि भारत-पाक के रिश्तों में मिठास लाने के लिए दोनों मुल्कों के फनकारों का एक समूह बनाना चाहिए। 

संगीत समारोह का उद्घाटन पंडित बिरजू महाराज के पुत्र पंडित दीपक महाराज के कथक नृत्य से हुआ। पंडित बिरजू महाराज के कथक नृत्य पर वहां मौजूद हजारों कलाप्रेमी झूम उठे। प ंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने बांसुरी ने राग दुर्गा से अपनी प्रस्तुति शुरू की। उनके साथ बांसुरी पर विवेक सोनकर, तबला पर शुभंकर और पखावज पर भवानी षंकर ने जुगलबंदी की। 

पंडित विश्वनाथ ने तबले पर पंडित समर साहा और हारमोनियम पर दिनकर शर्मा की जुगलबंदी से शास्त्रीय संगीत पेश किया। उस्ताद अमजद अली खान, उनके बेटे अमान और अयान अली खान ने सरोद वादन से हजारों दर्शकों का दिल जीता। 

प्रो मिश्र ने कहा कि मुंबई के पंडित अजय पोहनकर गायन और अनुव्रत चटर्जी ने अपने तबला वादन से खूब तालियां बटोरीं। अमजद अली खान ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि दुनिया सभी संगीत सा, रे, ग, म, प, ध, नी, सा, पर ही आधारित है। उन्होंने कहा कि फूल, खून, आग, हवा की कोई जाति होती है न धर्म। उसी तरह से सुर भी हंै। इसे देश और मजहब में नहीं बांटा जा सकता है। 

उस्ताद गुलाम अली का यहां आना बहुत अच्छी बात है। उल्लेखनीय कि संकट मोचन मंदिर वाराणसी का मशहूर मंदिर है। इस मंदिर के बरामदे में मंच बनाया जाता है, जिसमें भारत के लगभग सभी विधाओं के ज्यादातर ख्याति प्राप्त कलाकर अपनी कला की प्रस्तुति करते हैं। अधिकांश दर्शक जमीन पर बैठकर संगीत सुनते हैं।