हास्य कवि अनिल अनाडी के काव्य संग्रह का विमोचन

हास्य कवि अनिल अनाडी के काव्य संग्रह का विमोचन

लखनऊ: सुप्रसिद्ध साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था लक्ष्य  एवं सामाजिक संस्था पति  परिवार कल्याण समिति के संयुक्त तत्वावधान में जाने.माने हास्य व्यंग्य के कवि अनिल अनाडी के काव्य संग्रह का विमोचन स्थानीय सरस्वती कन्या इन्टर कालेज, नरही में हुआ, जिसकी अध्यक्षता सुप्रसिद्ध समाज सेवी भइया जी एवं कार्यक्रम का संचालन जाने.माने कवि आदित्य चतुर्वेदी ने किया। पूर्व नगर विकास मंत्री ,सांसद ,लाल जी टंडन मुख्य अतिथि एवं पूर्व भाषा अध्यक्ष सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी व दर्पण संस्था के निदेशक तथा सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार डा० उर्मिल कुमार थपलियाल इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। ,

हास्य कवि एवं लक्ष्य संस्था के सचिव गोबर गणेश ने आये हुए अतिथियों का स्वागत कर कार्यक्रम को गति प्रदान की। तत्पसचात तमाम उपस्थित गणमान्य लोगों कवियों साहित्यकारों पत्रकारों वकीलों एवं संस्थाओं के पदाधिकारियों की उपस्थिति में कवि अनिल अनाड़ी के काव्य संग्रह जिन्दगी होइगै झंडूबाम का विमोचन हुआ।

स्वागत आयोजन के पश्चात वक्ता के रूप में मौजूद रहीं डा० पार्वती टंडन ने कवि अनिल अनाडी के काव्य संग्रह जिन्दगी होइगै झंडूबाम की अपनी शुभकामनायें प्रेषित करते हुए कहा कि श्री अनाडी जी ने देश की तात्कालिकए पारिवारिकए सामाजिकए आर्थिकए राजनीतिक एवं शैक्षणिक स्थिति का सफलतापूर्वक सुमधुर एवं सरल भाषा में चित्रण किया है।

इसके बाद पहर  संस्था के अध्यक्ष एवं कवि व्यंग्यकार मनमोहन बाराकोटी तमाचा लखनवी ने कहा कि कवि ने अपनी हर रचना में आज के जीवन के  उद्‌गार व्यक्त किये हैं जैसे रू ष्तुम दूर रहो या पास रहोए अहसास दिलाती है कविता।  लिखने बैठूँ पर लिख न पाऊँए मुझको भरमाती है कविता।।

मुख्य वक्ता पति परिवार कल्याण समिति की अध्यक्ष डा० इन्दु  सुभाष ने कहा कि कुव्यवस्था पर चुभते हुए कटाक्ष करने वाली आक्रोश से भरी परन्तु हास्य से परिपूर्ण उनकी कविताओं को जब पढ़ते हैं तो हृदयांगन ही नहीं करता है बल्कि उसके कटाक्ष उसके उद्देश्य को भी समझता है। यही कारण है कि उनकी कविताओं को बार.बार पढ़ने सुनने की ललक होती है।  ये कवितायें इतनी प्रभावशाली हैं कि लोगों के मानस पटल पर तुरंत ही अंकित हो जाती हैं। उन्होनें कहा कि हमें पूर्ण विश्वाश है कि महिला कानूनों के दुरुपयोग को रोकने और महिला सशक्तिकरण के नाम पर बने परिवार.विरोधी कानूनों को खत्म करने और पति.परिवारों को बर्बाद होने से रोकने के प्रयास में अनाड़ी जी की यह पुस्तक इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी।

पूर्व भाषाध्यक्ष एवं व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि अनाड़ी जी में हास्य व्यंग्य के माध्यम से देश व समाज की उन्नति हेतु जन.जन को जगाने की प्रखर विद्वता है।  इन्होनें एक सच्चे कलम के सिपाही का फर्ज निभाया है।

आ०भा० अगीत परिषद के संस्थापकध्अध्यक्ष डा० रंगनाथ मिश्र ने कहा कि यह काव्य संग्रह प्रसाद गुण से युक्त है। कहीं.कहीं आवश्यकतानुसार अंग्रेजी और देशजए अवधि शब्दों का प्रयोग मिलता है।  सभी कवितायें सामाजिक सरोकारों एवं देश प्रेम से ओत.प्रोत हैं। 

यश भारती से सम्मानित सुप्रसिद्ध वरिष्ठ रंगकर्मी डा० उर्मिल कुमार थपलियाल ने अपनी शुभकामनायें कुछ इस प्रकार से पेश कीं कि अनिल कुमार वर्मा समकालीन समय के समर्थ हास्य.व्यंग्य कवि हैं।  उनके काव्य में समसामयिक सार्थकता के संकेत हैं। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा० लालजी टंडन ने कहा कि जिंदगी होइगै झंडूबाम में आज की पीड़ा देखने को मिलती है और रचनाकार ने उसमें उस दर्द के समाधानों का भी बखूबी समाधान किया हैए जिसके लिए वे बधाई पात्र हैं।

अन्त में कार्यक्रम के अध्यक्षता कर रहे  सुप्रसिद्ध समाज सेवी भइया जी ने स्वास्थ्य ठीक न रहने के बाद भी अपने प्रिय कवि अनिल अनाड़ी को अपनी शुभकामनायें और आशीर्वाद देते हुए सभी श्रोताओं कवियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि सब लोग देश एवं समाज के उन्नति हेतु अनाड़ी जी की इस पुस्तक को अवश्य पढ़ेंए जिससे सबमें चेतनाओं का नव निर्माण हो सके।

Lucknow, Uttar Pradesh, India