रेलवे के निजीकरण की सिफारिश

रेलवे के निजीकरण की सिफारिश

नई दिल्ली। रेलवे के पुनर्गठन को लेकर नए उपाय बताने के लिए एंव उसमें बदलाव लाने के लिए अर्थशास्त्री विवेक देबरॉय की अध्यक्षता वाली समिति ने सरकार को कई सुझाव दिए हैं। समिति ने मंगलवार को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। समिति ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि रेलवे की हालत सुधारने के लिए सरकार को प्राइवेट कंपनियों को यात्री एवं माल गाड़ी चलाने, कोच और इंजन के निर्माण की इजाजत दे देनी चाहिए। इसके अलावा समिति ने निजि क्षेत्र को वैगन, कोच और लोकोमोटिव निर्माण की भी इजाजत देने की जरूरत बताई।

समिति ने सरकारी एसपीवी (स्पेशल पर्पज व्हीकल, इसके तहत सरकार तय समय के लिए प्राइवेट कंपनी को किसी प्रोजेक्ट के विकास, निर्माण और संचालन का ठेका देती है) बनाकर रेलवे के बुनियादी ढांचे का काम उसे सौंपने और रेलवे को उससे पूरी तरह से अलग करने की भी बात कही है। इसके अलावा रिपोर्ट में यह बात भी कही गई है कि स्कूल और अस्पताल चलाने और आरपीएफ के प्रबंधन जैसे कामों से भी रेलवे को खुद को दूर कर लेना चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे रेगुलेटर अथॉरिटी ऑफ इंडिया का गठन करे जो रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड से अलग हो और यह अथॉरिटी किराया और सर्विस चार्ज तय करने और तकनीकी स्टैंडर्ड को बनाए रखने का कार्य करे। इसके अलावा रेलवे बोर्ड के कॉरपोरेट बोर्ड की तरह काम करने की भी सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा रेलवे बोर्ड में जरूरत से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी हैं। बोर्ड में 1107 अफसर हैं। समिति के मुताबिक रेलवे बोर्ड सेक्रेटेरियट सर्विसेज (आरबीएसएस) या रेलवे बोर्ड क्लेरिकल सर्विसेज (आरबीसीएस) की अलग से जरूरत नहीं है और इन्हें सेंट्रल सेक्रेटेरियल सर्विसेज से जोड़ देना चाहिए।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में रेल मंत्रालय के रेलवे के रोजमर्रा कामों से अलग हो जाने की बात कही है और सिर्फ नीतिया बनाने के लिए कहा है और जोनल रेलवे को ज्यादा अधिकार देने एवं उन्हें स्वायत्त बनाने की भी सिफारिश की है।

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