एकतरफा मैचों का रेकार्ड तोड़ता क्रिकेट का यह महाकुम्भ

एकतरफा मैचों का रेकार्ड तोड़ता क्रिकेट का यह महाकुम्भ

तौक़ीर सिद्दीक़ी 

लखनऊ: आस्ट्रेलिया-न्यूज़ीलैंड में इन दिनों चल रहा क्रिकेट का महाकुम्भ एक तमाशा बना हुआ है। नीरस और एकतरफा मैचों का एक न ख़त्म होने वाला सिलसिला चल रहा है । लीग मैचों की बात छोड़िये अब तक हुए तीन क्वार्टर फाइनल मैच भी एक तरफा खेले गए । यह विश्व कप अबतक बल्लेबाज़ों के लिए स्वर्ग और गेंदबाजों के लिए नरक साबित हुआ है। ऐसा लग रहा है मानों यह क्रिकेट का महाकुम्भ न होकर कोई टेनिस बाल क्रिकेट टूर्नामेंट खेल जा रहा है। चौकों-छक्कों की बरसात में बेचारा गेंदबाज बेबस नज़र आ रहा है, लूट रहा है, मार खा रहा है। 

टूर्नामेंट में अबतक 45  मैच केले गए, एक मैच वर्ष के कारण नहीं खेला गय। इन 44  मैचों में सही अर्थों में केवल चार मैच रोमांचक रहे। इनमें भी केवल दो मैच ऐसे रहे जहां रोमांच अपने चरम पर रह। एक मैच इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के मध्य खेल गया जहाँ 152  का लक्ष्य पाने के लिए न्यूज़ीलैंड को अपने 9  विकेट गंवाने  पड़े थे , दूसरा मैच न्यूज़ीलैंड और बांग्लादेश के बीच खेला गया जिसमें बांग्लादेश को हार मिली । इस्के अतिरिक्त वेस्टइंडीज - आयरलैंड  और अफ़ग़ानिस्तान-स्कॉटलैंड के बीच भी नज़दीकी मुकाबले हुए । शेष 40  मैच एकतरफा रहे। 

टूर्नामेंट में बल्लेबाज़ों का कितना दबदबा है इसका अनुमान आप इन आंकड़ों से अच्छी तरह लगा सकते हैं कि 44  मैचों में 27  बार किसी टीम ने 300  से अधिक रन बनाये हैं बल्कि तीन बार तो 400  रनों से अधिक का स्कोर खड़ा हुआ है । दो बल्लेबाज़ तो दोहरा शतक लगा चुके हैं, संगकारा ने तो शतकों की झड़ी लगा दी । बल्लेबाज़ी के सारे पुराने कीर्तिमान ध्वस्त हो गए । हर मैच में औसतन 500  से अधिक रन बन रहे हैं । 

सोचने वाली बात यह है कि क्रिकेट का खेल क्या केवल बल्लेबाज़ों का खेल है । क्या दर्शक केवल चौके छक्के ही पसंद करते हैं । क्या गेंदबाजों के द्वारा विकेट चटकना उन्हें पसंद नहीं? क्या तब वह बोर होने लगते हैं जब एक बोलिंग सपोर्टिव पिच पर बल्लेबाज़ एक एक रन के लिए संघर्ष करते नज़र आते हैं ? पता नहीं क्रिकेट को चलाने वाली संस्था आईसीसी ने क्या सोच रखा है जो सारे नियम बल्लेबाज़ों के पक्ष में बनाता जा रहा है। आस्ट्रेलिया जो जीवंत पिचों का देश जाना जाता है वहां ऐसी नीरस पिचों पर खेल होगा किसी खेल प्रेमी ने सोचा भी नहीं होगा । आईसीसी की नज़र में अगर चौके छक्के ही क्रिकेट है तो बॉलर की जगह मैदान में एक बोलिंग मशीन लगा दिया करे  जिसमें बल्लेबाज़ अपनी मर्ज़ी से सेटिंग कर बल्लेबाज़ी करे और खूब चौके छक्के उड़ाए ।