देश के मौजूदा हालात पर लोकतांत्रिक जनता दल ने जताई चिंता

देश के मौजूदा हालात पर लोकतांत्रिक जनता दल ने जताई चिंता

लखनऊ: लोकतांत्रिक जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष जुबेर अहमद कुरेशी राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में शामिल होने के बाद लखनऊ आने पर जानकारी देते हुए बैठक में पास हुए प्रस्तावों के बारे में यह जानकारी दी| उन्होंने बताया की बैठक में राजनीतिक,आर्थिक और विदेश नीति पर प्रस्ताव पास हुए|

राजनितिक प्रस्ताव में लोकतांत्रिक जनता दल ने कहा कि पार्टी देश के मौजूदा हालात पर अपनी गहरी चिंता जताती है, वैसे तो भारतीय जनता पार्टी 2014 में जब से सत्ता में आई है तब से उसकी सरकार ने देश के संविधान पर और देश की धर्मनिरपेक्ष परंपराओं पर हमले का सिलसिला चला रखा है लेकिन 2019 के आम चुनाव के बाद अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी सरकार ने यह सिलसिला तेज कर दिया है यह सरकार अपनी नफरत भरी और विभाजन कारी विचारधारा से प्रेरित होकर संविधान पर जिस तरह से क्रूर हमले कर रही है उससे आम आदमी के जीवन की दुश्वारियां तो बड़ी रही है भारतीय संविधान और हमारे स्वाधीनता आंदोलन के तमाम मूल भी बुरी तरह लहूलुहान हो रहे हैं नागरिकता कानून में संशोधन और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर(एनआरसी) तैयार करने के सरकार के इरादे ने तो देश मैं गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए हैंI दुनिया के दूसरे देश में भी सरकार के इन कदमों की तीखी आलोचना हो रही है लेकिन इस सब से बेपरवाह होकर सरकार देश में और खासकर भाजपा शासित राज्यों में आंदोलनरत छात्र समुदाय, नागरिक समाज और विपक्षी दलों का निर्ममता से दमन कर रही हैI अफसोस की बात यह है कि प्रधानमंत्री पुलिस द्वारा की गई हिंसा पर उसे संयम बरतने की नसीहत देने के बजाय सार्वजनिक रूप से उसकी पीठ ठोकते हैं और मौजूदा भीड़ से भी उसकी जय-जय कराते हैं जाहिर है कि प्रधानमंत्री पुलिस को उकसा रहे हैं कि वह और ज्यादा निर्मम तरीके से सरकार के फैसले का अहिंसक तरीके से विरोध कर रहे लोगों का दमन करेंI

लोकतांत्रिक जनता दल की कार्यकारिणी महसूस करती है कि इस सरकार ने अपने नफरत से भरे राजनीतिक एजेंडे को अमल में लाने और असहमति की आवाज को दबाने के लिए तमाम संवैधानिक संस्थाओं स्वायत्ता का अपहरण कर उन्हें मर्जी के मुताबिक चलने पर मजबूर कर दिया है I

लोकतांत्रिक जनता दल का मानना है कि अपवाद स्वरूप कुछ लोगों को छोड़ दे तो देश की न्यायपालिका खासकर सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा ही संविधान के संरक्षण की अपनी जिम्मेदारी निभाई है लेकिन इस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भी अपनी मर्जी के मुताबिक काम करने के लिए विवश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी इस सरकार ने असहमति की आवाज को दबाने के लिए विपक्षी नेताओं तथा लेखकों और बुद्धिजीवियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग और सीबीआई जैसी संस्थाओं का भी अभूतपूर्व भेजा इस्तेमाल किया हैI

आर्थिक प्रस्ताव

भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने अपने अनेकों भाषणों और मन की बात जैसे कार्यक्रम द्वारा नामदार या कामदार सबका साथ सबका विकास न्यूनतम सरकार अधिकतम शासन इस तरह के न जाने कितने जुमलों और शब्दों का मायाजाल बुनकर अपनी छवि एक ईमानदार शक्तिशाली कुशल प्रशासक के रूप में बनाने का अथक प्रयास किया है एक ऐसे प्रशासक जो समस्याओं का समाधान कर सकता है और आम लोगों के लिए दिन रात काम करता है एक ऐसी छवि जिससे भाजपा के लिए वोटों की लहराती फसल तैयार हो सके लेकिन आम जनता मोदी जी के उबाऊ भाषणों से अब उकता सी गई है कल घरेलू उत्पाद 5% से कम हो चुका है एनपीए अपने चरम पर है जीएसटी से देश की वृद्धि दर में अंकुश लगा है स्वस्थ संस्थानों को मजबूर किया है कि वह बीमार संस्थानों के साथ विलय करेंI

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लगातार पांच बार दरों में कटौती करके भिजवा दीजिए उधार दर को कम करने और निवेश को बढ़ावा देने में विफल रही है उपभोक्ता मांग अपने सर्वकालिक निम्न स्तर पर बनी हुई है कर संघीय सरकार और राज्यों का संयुक्त राजकोषीय घाटा लगभग जीडीपी के 9% तक पहुंच गया है करो कि वसूली उम्मीदों से कहीं ज्यादा कम है ऐसे में अर्थव्यवस्था में कोई गति आएगी इसकी कोई आता नजर नहीं आती हैI

वित्तीय संकट और घटती मांग को देखते हुए सरकार को युद्ध स्तर पर तत्काल एक आर्थिक टीम गठित करने की आवश्यकता है इस टीम का गठन योग्यता और अनुभव के आधार पर होना चाहिए ना कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक से जुड़ाव के आधार पर प्रधानमंत्री द्वारा नागरिकता संशोधन कानून 2019 को लाने से जनता भी समझ गई है कि अब आर्थिक सुधार बनने की बजाय गिरती हुई अर्थव्यवस्था से जूझने की बजाय उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा को गले लगा लिया है और संघ की विचारधारा को बढ़ाने के काम में पूरी तरह से लग गए हैं भारत की आर्थिक समस्याओं पर अपना ध्यान केंद्रित करने की बजाय मोदी का संप्रदायिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना समाज में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर के सांप्रदायिक विभाजन करना अति निंदनीय है भारतीय अर्थव्यवस्था 4.5% की विकास दर पर है जो पिछले 6 वर्ष में सबसे धीमी है लेकिन जुमला 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था का छोड़ा जा रहा है पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 2 सितंबर तक में 88% की गिरावट का संकेत देती हैI

मोदी सरकार की विनाशकारी आर्थिक नीतियों से उत्पन्न हुई बेतहाशा बेरोजगारी और आम आदमी की घंटी आमदनी वर्तमान मंडी के पीछे का वास्तविक कारण है। इसमें जनादेश का दुरुपयोग करते हुए न केवल बड़े उद्योगपति किला भी और विदेशी पूंजी का पक्षपात किया है बल्कि इसमें देश के गले में जोर जबरदस्ती से विनाशकारी नीतियों को धकेला है जैसे 2016 में नोटबंदी 2017 में जीएसटी को लागू करना राष्ट्रीय संशोधन साधनों जैसे सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्ति को निजी कंपनियों को धड़ाधड़ अंधाधुन बेचनाI

विदेश नीति

भारत की विदेश नीति हमेशा गुटनिरपेक्षता और राष्ट्रों के बीच शांतिपूर्ण सह अस्तित्व पर आधारित एकता की रही हैI यह राष्ट्रों के बीच शांति और समझ को बढ़ावा देती हैI अमरीकी राष्ट्रपति के आदेश अनुसार बगदाद हवाई अड्डे पर एक हवाई हमले द्वारा इरानी क्रांतिकारी गार्ड के मेजर जनरल कासिम सुलेमानी और इराकी सैन्य कमांडर अबू मेहंदी की आकारण बेसबब हत्या एक गैर जिम्मेदाराना हरकत हैI लोकतांत्रिक जनता दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी अमेरिका द्वारा क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाली इस आक्रामकता की कड़ी निंदा करती है और सरकार से भी इस जगह कृत्य की निंदा करने की अपील करती है।

Lucknow, Uttar Pradesh, India