आय और व्यय के बीच तालमेल रखना ज़रूरी: प्रोफेसर विपुल

आय और व्यय के बीच तालमेल रखना ज़रूरी: प्रोफेसर विपुल

निवेशक जागरुकता एवोक इंडिया फाउंडेशन ने किया कार्यशाला का आयोजन

लखनऊ: एवोक इंडिया फाउंडेशन द्वारा विश्व बचत दिवस के अवसर पर पीएचडी चेम्बर्स ऑफ कामर्स में “वर्तमान वित्तीय परिवेश में निवेशकों की स्थिति” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन आरबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक आर. लक्ष्मी कांत राव तथा एजीएम सेबी सुप्रिया काबरा, आईआईएम लखनऊ के प्रोफेसर विपुल एवं एवोक इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रवीण कुमार द्विवेदी ने किया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता प्रोफेसर विपुल ने कहा कि “किसी भी कामकाजी व्यक्ति को अपने परिवार के जीवन चक्र पर आय और व्यय के बीच बेमेल को बचाने के लिए बचत करने की आवश्यकता होती है। कम उम्र के लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि खर्च उम्र के साथ बढ़ता है, जबकि कमाई इनसे मेल नहीं खाती। आदर्श रूप से, किसी व्यक्ति की जीवन भर की कमाई उसके या उसके परिवार के जीवन भर के खर्च का ध्यान रखने में सक्षम होनी चाहिए। पूछा जाने वाला प्रश्न यह नहीं है कि "बचत करना है या नहीं" लेकिन "कितना और कब सहेजना है", यह है। इस सवाल का जवाब एक विस्तृत भविष्य की योजना से आता है जो अपेक्षित व्यय और आय, और एक अनुशासित निवेश दृष्टिकोण पर आधारित है”। श्री प्रवीण कुमार ने कहा कि वित्तीय विषय पर हर वर्ग एवं उम्र के लोगों को ज्ञान होना चाहिए। उन्होनें इसकी आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि देश की आर्थिक सम्पन्नता में आर्थिक जागरुकता का विशेष महत्व होता है। कार्यशाला को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने निवेश संबंधी अन्य विकल्प तथा उनसे संबंधित आवश्यक तथ्यों जैसे- बचत, बजट, निवेश, टैक्स प्लानिंग , सरकारी योजनाओँ तथा उनसे संबंधित सतर्कता , जोखिम , लालच व भय आदि से सभी को अवगत कराया। निवेश सही तरीके से तथा विचार करके किया जाना चाहिए। एवोक इंडिया फाउंडेशन जो कि उत्तर प्रदेश की सेबी द्वारा मान्यता प्राप्त एकमात्र “इंवेस्टर एसोसिएशन” है। जिसने विगत सात वर्षों में 300 से अधिक जागरुकता कार्यक्रम देश के लगभग 80 शहरों में किये, लगभग 10000 से अधिक लोगों तक वित्तीय जागरुकता का संदेश पहुँचाया , जिसमें समाज के विभिन्न वर्ग जैसे विद्यार्थी, चिकित्सक , प्रोफेसर्स, महिलाएं , युवा, सेवानिवृत लोग, पुलिस और लघु एवं मध्यम इकाईयाँ भी शामिल हैं।