संवेदनाओं का जाल (सर्किट) दिमाग में हमारी दुनिया को अंकित करता है : प्रो0 शुभा टोले

संवेदनाओं का जाल (सर्किट) दिमाग में हमारी दुनिया को अंकित करता है : प्रो0 शुभा टोले

लखनऊ: सीएसआईआर-सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट, लखनऊ ने 27 सितंबर 2019 को 78 वां सीएसआईआर स्थापना दिवस समारोह मनाया। निदेशक, प्रोफेसर तपस कुमार कुंडू ने इस शुभ अवसर पर मेहमानों का स्वागत किया और कहा कि हमें सीएसआईआर का हिस्सा बनने पर गर्व महसूस हो रहा है, 1942 में स्थापित इस संगठन ने भारतीय विज्ञान और उद्योग के विकास और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इस अवसर पर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च मुंबई में प्रोफेसर शुभा टोले जो एक विख्यात भारतीय न्यूरोसाइंटिस्ट एवं प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर हैं, ने इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढाई। प्रोफेसर शुभा ने "एक मस्तिष्क का निर्माण कैसे करें" पर एक बहुत ही दिलचस्प व्याख्यान दिया। अपने सम्बोधन में उन्होंने बताया कि कैसे कंप्यूटर में सर्किट की तरह ही हमारे मस्तिष्क में बिछे संवेदनाओं के सर्किट हमें अपने आसपास की चीजों को जानने में मदद करते हैं हम संवेदनाओं के आधार पर ही अपने मस्तिष्क का निर्माण कर पाते हैं, जैसे हम कैसे देख सकते हैं? हम कैसे सुन सकते हैं? कंप्यूटर सर्किट की तरह ही हमारा मस्तिष्क भी जब सही रास्ते को सही रास्ते से जोड़ता है तो संवेदना हमारे सामने स्पष्ट तस्वीर लाती है।

बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लाजिया (बीपीएच) के प्रबंधन के लिए एक नये न्यूट्रास्युटिकल उत्पाद की टेक्नोलोजी का हस्तांतरण

तकनीकी हस्तांतरण के अवसर पर निदेशक, प्रोफेसर तपस कुमार कुंडू ने कहा कि सीएसआईआर-सीडीआरआई, लखनऊ ने लुमेन मार्केटिंग कंपनी, चेन्नई के साथ तकनीक का हस्तांतरण किया है एवं यह सीएसआईआर-सीडीआरआई टीम द्वारा बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लाजिया (बीपीएच) के प्रबंधन के लिए विकसित इस न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद का विपणन करेगी। यह 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों की मुख्य 10 बीमारियों में से एक है। बीपीएच वृद्ध पुरुषों की सबसे आम समस्या है क्योंकि इसकी व्यापकता उम्र के साथ-साथ बढ़ती जाती है और पैथोलॉजिकल रूप से बीपीएच एक ऐसी स्थिति है, जिसमें प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ जाती है एवं प्रोस्टेट का यह गैर-कैंसरयुक्त विकास, पेशाब को असहज बनाता है एवं मरीज को बार-बार पेशाब करना पड़ता हैं एवं उसका मूत्र त्याग पर नियंत्रण भी नहीं रहता है । हिस्टोपैथोलॉजिक बीपीएच की व्यापकता उम्र पर निर्भर है, आमतौर पर 40 साल की उम्र के बाद इसके प्रारंभिक लक्षण विकसित हो सकते हैं। 60 वर्ष की आयु के आधे से अधिक पुरुषों एवं 70 और 80 वर्ष की आयु के 90% पुरुषों में बीपीएच के कुछ लक्षण दिखाई देते हैं।

सीडीआरआई अवार्ड्स-2019 ड्रग रिसर्च में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कार व्याख्यान के बाद विजेताओं का सम्मान

सीएसआईआर-सीडीआरआई, ड्रग डिस्कवरी एंड डेवलपमेंट के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान करने वाले भारत के युवा वैज्ञानिकों को हर साल पुरस्कार प्रदान करता है। इस वर्ष का प्रथम सीडीआरआई अवार्ड -2019 (जीव विज्ञान), आईआईएससी, बेंगलुरु के डॉ अमित सिंह को प्रदान किया गया। डॉ अमित ने अपने पुरस्कार व्याख्यान में माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस में दवा की सहिष्णुता के प्रति विरोध को कम करने के लिए रेडॉक्स विषमता को लक्षित करने से संबंधित अपने नवीन अनुसंधान पर चर्चा की।

द्वितीय सीडीआरआई अवार्ड-2019 (जीव विज्ञान), सीएसआईआर-आईआईसीबी, कोलकाता से डॉ दीप्यमान गांगुली को प्रदान किया गया। डॉ गांगुली ने अपने पुरस्कार व्याख्यान में ऑटोइम्यूनिटी और मेटाबोलिक डीजीज के लिए साझा चिकित्सीय लक्ष्यों की खोज करने के दौरान हुए उनके अनुभवों को साझा किया।

प्रथम सीडीआरआई अवार्ड-2019 (रासायनिक विज्ञान) को आईआईएसईआर, पुणे के डॉ एस. जी. श्रीवत्सन को प्रदान किया गया। डॉ श्रीवत्सन ने अपने पुरस्कार व्याख्यान में बहुपक्षीय न्यूक्लियोसाइड जांच के डिजाइन और संश्लेषण के बारे में चर्चा की, और चिकित्सीय रूप से प्रासंगिक न्यूक्लिक एसिड आकृति के संरचना और त्रिआयामी एवं स्थानिक कोशिकीय वातावरण में उनकी उपयोगिता के बारे में बताया।

द्वितीय सीडीआरआई अवार्ड-2019 (रासायनिक विज्ञान), जेएनसीएएसआर, बेंगलुरु के डॉ टी गोविंदराजू को प्रदान किया गया। डॉ गोविंदराजू ने अपने पुरस्कार व्याख्यान में अल्जाइमर रोग में विषाक्तता को रोकने के लिए बहुपक्षीय एवं बहुक्रियाशील अवरोधकों के विकास के बारे में चर्चा की।

ऑनलाइन मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ

संस्थान के वैज्ञानिक सामाजिक उत्तरदायित्व (एसएसआर) के तत्वावधान में लोगों में तनाव / मानसिक स्वास्थ्य का मूल्यांकन करने और उनके बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए एक ऑनलाइन मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सर्वेक्षण इस विशेष दिवस पर आज शुरू किया गया। कुमारी पारुल, डॉ संजीव यादव और डॉ शुभा शुक्ला की एक टीम प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ एस. एस. लाल श्रीवास्तव के साथ मिलकर इस ऑनलाइन सर्वेक्षण का संचालन कर रही है। अपनी मानसिक स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए इच्छुक कोई भी व्यक्ति इस ऑनलाइन फॉर्म को भर सकता है जो संस्थान की वेबसाइट पर उपलब्ध है और इससे लाभान्वित हो सकता है।

संस्थागत प्रकाशनों का विमोचन

सीएसआईआर-सीडीआरआई की वार्षिक रिपोर्ट (हिंदी संस्करण) और न्यूज़लैटर का मंचासीन अतिथियों एवं संपादकों द्वारा विमोचन किया गया।

मेधावी छात्रों और सेवानिवृत्त सहयोगियों का सम्मान

सीडीआरआई के कर्मचारियों के मेधावी बच्चों को उनकी अकादमिक उत्कृष्टता हेतु पुरस्कार दिए गए। जिनमें सुश्री गरिमा सिंह, श्री कृष्णा गुप्ता, सुश्री श्रेया शुक्ला और श्री आयुष शर्मा ने विज्ञान विषयों में इंटरमीडिएट परीक्षाओं में 90% से अधिक अंक हासिल कर सम्मान पत्र एवं नकद पुरस्कार प्राप्त किया। संस्थान से विगत वर्ष एवं इसी महीने सेवानिवृत्त हुए सहयोगियों को शाल सम्मानित किया गया। जिन सहयोगियों ने संस्थान में सेवा के 25 वर्ष पूरे कर लिए उन्हें भी सम्मानित किया गया। स्थापना दिवस समारोह के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों जैसे चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।

Uttar Pradesh, India