दबाव की परिस्थितियां मुझे प्रोत्साहित करती हैं: राधिका आप्टे

दबाव की परिस्थितियां मुझे प्रोत्साहित करती हैं: राधिका आप्टे

नई दिल्ली: अभिनेत्री राधिका आप्टे बड़े पर्दे पर पहली बार 14 साल पहले दिखी थीं फिल्म ‘वाह! लाइफ हो तो ऐसी’ में। साल था 2005। अब आते हैं साल 2019 पर। अपनी दमदार एक्टिंग की बदौलत वह सबका दिल जीत चुकी हैं। उन्होंने फिल्मों, टीवी और वेब- तीनों ही मंचों पर अपनी मौजूदगी बेहद मजबूती के साथ दर्ज करवाई है। वह कहती हैं, ‘अब मुझे बेहद जिम्मेदारी के साथ काम करना पड़ रहा है। यह अच्छी बात है। पर मैं किसी तरह के दबाव को खुद पर हावी नहीं होने देती। दबाव की परिस्थितियां मुझे और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।’

वह अपने लिए भूमिकाएं भी इसी स्पष्ट नजरिये के साथ चुनती हैं। जो ज्वलंत भूमिकाएं उन्होंने पर्दे पर साकार की हैं, उन्हें देखकर उनकी विविधता का पता चलता है। ‘मांझी- दि माउंटेन मैन’, ‘फोबिया’, ‘अहिल्या’ और ‘लस्ट स्टोरीज’ की उनकी भूमिकाएं कुछ ऐसी ही हैं। क्या आप हमेशा से ही ऐसे रास्ते पर चलना चाहती थीं, जिन पर लोग चलने से झिझकते हैं? वह कहती हैं, ‘ऐसा नहीं है। मैं वही करती हूं, जो मुझे पसंद आता है। मैं योजनाएं नहीं बनाती। मैं कोशिश करती हूं कि दूसरे लोग क्या कर रहे हैं या मुझे क्या करना चाहिए, इस बात को लेकर बेवजह दबाव में न आऊं। मैं सिर्फ इस बात पर गौर करती हूं कि क्या यह किरदार निभाने से मुझे खुशी मिलेगी?’

ज्यादा फिल्मों में काम करने से कहीं ज्यादा वह अच्छी फिल्मों में काम करने को तरजीह देती हैं। ‘मुझे सिर्फ इस बात से फर्क पड़ता है कि मेरा किरदार दिलचस्प है या नहीं। अगर मेरा किरदार दिलचस्प है, तो मैं उसे स्वीकार कर लेती हूं, फिर भले ही उसकी लंबाई महज कुछ दृश्यों की ही क्यों न हो। कभी-कभी मैं कुछ ऐसे प्रस्तावों के लिए भी मना कर देती हूं, जिनमें मेरी मुख्य भूमिका होती है, क्योंकि वे मुझे नीरस और चलताऊ लगते हैं।’ इसमें कोई शक नहीं कि फिल्में चुनने के इस तरीके से राधिका को अच्छे नतीजे मिले हैं। उनकी साल 2018 की दो फिल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। जहां आर. बाल्की निर्देशित फिल्म ‘पैडमैन’ को सामाजिक विषय पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, वहीं श्रीराम राघवन निर्देशित ‘अंधाधुन’ने हिंदी की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म सहित तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीते। वह कहती हैं, ‘मुझे लगता है कि ये दोनों ही फिल्में राष्ट्रीय पुरस्कार की सच्ची हकदार थीं। ‘अंधाधुन’ सचमुच पिछले साल की सर्वश्रेष्ठ फिल्म थी और ‘पैडमैन’ इतने बड़े मुद्दे को लेकर दर्शकों से रूबरू हुई। अब तक मैंने जिन भी फिल्मों में काम किया है, उनमें से ये दोनों ही फिल्में मेरी पसंदीदा हैं।’