BKT के वृक्षारोपण अभियान में क्रिकेट खिलाडियों ने किया प्रतिभाग

BKT के वृक्षारोपण अभियान में क्रिकेट खिलाडियों ने किया प्रतिभाग

मुंबई: भारतीय ऑल-राउंडर रविचंद्रन अश्विन सहित पूर्व भारतीय खिलाड़ी हेमांग बदानी और भारतीय ऑल-राउंडर्स विजय शंकर और वाशिंगटन सुंदर एवं डिंडीगुल ड्रैगन्स के कप्तान नारायण जगदीशन ने बालकृष्ण इंडस्ट्रीज लिमिटेड (बीकेटी) टायर्स की ओर से शुरू किए गए वृक्षारोपण अभियान का नेतृत्व किया। न्यूजीलैंड के पूर्व ऑलराउंडर स्कॉट स्टायरिस और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान शेन वॉटसन ने भी उन्हें जॉइन किया। अभी चल रहे शंकर सीमेंट तमिलनाडु ट्वेंटी 20 प्रीमियर लीग (टीएनपीएल) के दौरान बालकृष्ण इंडस्ट्रीज लिमिटेड (बीकेटी) ने इस अनूठी गतिविधि की शुरुआत की थी, जिसने मदर नेचर के साथ क्रिकेट के कौशल का मेल करवाया गया था।मिड-विकेट और लॉन्ग-ऑन के बीच की सीमा से कुछ मीटर की दूरी पर स्थित विशालकाय बीकेटी टायर से गेंद को टकराने वाले बल्लेबाजों की ओर से, लीग के सहयोगी प्रायोजकों ने हजारों पौधे लगाने का फैसला किया था। यह उपक्रम सद्गुरु से जुड़े एक गैर सरकारी संगठन ईशा फाउंडेशन के साथ मिल कर शुरू किया गया। बीकेटी टायर्स के संयुक्त प्रबंध निदेशक राजीव पोद्दार को उम्मीद है कि टीएनपीएल पहल के जरिए 50,000 पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘हमने ईशा फाउंडेशन के साथ हाथ मिलाया है जो सद्गुरु से जुड़ा एक गैर सरकारी संगठन है और हमें तमिलनाडु में टीएनपीएल के माध्यम से लगभग 50,000 पौधे लगाने की उम्मीद है।’

प्लेऑफ में, यदि गेंद बीकेटी टायर से टकराती है, तो 10,000 पौधे लगाए जाएंगे और फाइनल में यह संख्या 20,000 पौधां की होगी। वॉटसन ने मंशा जताई कि बल्लेबाज मैच के दौरान बीकेटी टायर को अधिक से अधिक बार हिट करें ताकि अधिक पौधे लगाए जा सकें। उन्होंने मंगलवार को कहा, ‘तमिलनाडु में और अधिक हरियाली लाने वाली बीकेटी कीयह एक बड़ी पहल है। हमें पौधे लगाना जारी रखना होगा, क्योंकि भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में इतने पेड़ काटे जा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि कुछ छक्के सीमा पार कर टायर से टकराएंगे और सुनिश्चित करेंगे कि अधिक से अधिक पेड़ लगाए जा सकें।’ पोद्दार का मानन है कि टीएनपीएल के साथ इस अनोखी गतिविधि से यह जुड़ाव पर्यावरण के लिए कंपनी के सरोकार का ही एक और विस्तार है। उन्होंने कहा, ‘हम एक कंपनी के रूप में अपने पर्यावरण के बारे में बहुत सचेत हैं। अभी ही नहीं बल्कि पिछले दस सालों से। उत्तर भारत में हमारे दो संयंत्रों के लिए बिजली की जरूरतों का लगभग 50 फीसदी पवनचक्कियों द्वारा उत्पादित किया जाता है। यह 2004 से है। हमें भारत के राष्ट्रपति से ऊर्जा संरक्षण और स्थिरता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार की मान्यता हासिल कर चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों के लिए हमने यह किया है और हम आगे भी यह करना चाहते हैं। हमने पर्यावरण में बहुत अधिक निवेश किया है। हमने 1,00,000 से अधिक पेड़ लगाए हैं। हम अपने कार्बन फुटप्रिंट के बारे में बहुत सचेत है।’