ज़हरीली शराब से हुई मौतों के लिये क्या योगी सरकार ज़िम्मेदार?

ज़हरीली शराब से हुई मौतों के लिये क्या योगी सरकार ज़िम्मेदार?

लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी राज्य मुख्यालय लखनऊ।उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जहरीली शराब के सेवन से मौत का आंकड़ा 98 पहुंच गया है,जबकि कई लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।विपक्ष योगी सरकार को कच्ची शराब से हुई मौतों को योगी सरकार को ज़िम्मेदार बता रहा है।प्रशासन के मुताबिक मरने वालों में ज्यादातर लोग सहारनपुर से पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में तेरवहीं के संस्कार में गए थे जहां उन्होंने शराब का सेवन किया यह दलील देकर अफसर अपना पिंड छुड़ाने में कामयाब हो जाते है यह मामला दब जाएगा और फिर नए कांड का इंतज़ार होता है और यूँही चलता रहता है अफसर मौज करते रहते है जनता यूँही मरती रहती है।लगातार बढ़ रहे मौत के आंकड़ों से सरकार सकते में है और पूरे उत्तर प्रदेश में छापेमारी और गिरफ्तारी की कार्रवाई जारी है।देश में जहरीली शराब पिछले एक दशक में हजारों लोगों की जिंदगी तबाह कर चुकी है।जहरीली शराब का सिर्फ सेवन करने वाला ही नहीं मरता वे भी मरते हैं जो इन पर आश्रित होते हैं।सस्ते नशे के लालच में गरीब परिवारों का घर लगातार अवैध शराब के सेवन से तबाह हो रहा है।इसके बावजूद न तो इस तरह की घटना पर रोक लगी और न ही जहरीली शराब का कारोबार कम हुआ।आइए देश में अब तक हुई जहरीली शराब से मौत की बड़ी त्रासदियों पर नजर डालते हैं.मुंबई, 2015: मुंबई के उपनगरीय इलाके मलाड में जहरीली शराब पीने से 100 लोगों की मौत हो गई,इनमें से ज्यादातर लोग वाहन चलाक या दिहाड़ी मजदूरी थे, इन सभी ने रात में राठोड़ी गांव की अवैध शराब का सेवन किया।सस्ती शराब पीने वाले लोगों में सुबह से जहर के लक्षण दिखने लगे,सभी उल्टियां करने लगे, उनके पेट में दर्द और आंखों में जलन हो रही थी।पश्चिम बंगाल,2011: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में जहरीली शराब के सेवन से 172 लोगों की मौत हुई।जांच में पता चला कि पुलिस और नेताओं के संरक्षण में अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा था।साल 2018 में इस मामले में जिला अदालत ने 4 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।यूपी में गाजियाबाद-बुलंदशहर, 2010: मार्च 2010 में होली के अवसर पर अवैध शराब के सेवन के 35 लोगों की मौत हो गई,तो वहीं उसी साल फरवरी में वाराणसी के लालपुर में जहरीली शराब का सेवन करने वाले 12 लोगों की मौत हो गई।इससे पहले भी सहारनपुर में कच्ची शराब के सेवन से मौतें हो चुकी है।उधर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अब्दुल हफ़ीज़ गांधी ने कुशी नगर सहारनपुर और मेरठ में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के लिये योगी सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि ये एक संवेदनहीन सरकार है।इतनी संख्या में मौत हुई और सरकार अब भी नही जागी।इनका कोई मंत्री पीड़ितों के हाल जानने उनके घर नही गया।घटना पर दुख व्यक्त करते हुए सपा प्रवक्ता गांधी ने कहा कि यह सरकार के ढीले रवैए का नतीजा है।सरकार की भाषा भी जहरीली है और शराब भी जहरीली।जो ग़ैरक़ानूनन शराब का कारोबार चल रहा है इसमें अधिकारी व सरकार के लोग सीधे लिप्त हैं, इन्हीं अधिकारियों की देखरेख में यह गोरखधंधा चल रहा है । पिछले कुछ महीने पहले कानपुर में जहरीली शराब से काफी लोगों की मौत हो गई थी। सरकार ने कानपुर के मसले में सख्त कार्यवाही नही की यही कारण है की घटनाओं की पुनरावृत्ति हो रही है।समाजवादी पार्टी सरकार से मांग करती है कि इस मसले में सख्त से सख्त कार्रवाई हो।कोई भी बड़े से बड़ा अधिकारी या और कोई भी प्रभावशाली व्यक्ति हो उसे बख्शा न जाये।भारतीय जनता पार्टी के लोग पवित्र मंदिर के प्रांगण से अपने कार्यकर्ताओं को शराब जैसी चीजें वितरित करते हैं और सरकार गाय सुरक्षा के नाम पर शराब को प्रोत्साहन देती है, इसलिए भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से जहरीली शराब से हुई मौतों के लिए जिम्मेदार है।पश्चिम से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक हाहाकार मचा हुआ है।इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में शराब माफिया कितने सक्रिय हैं।सरकार का यह दावा कि अपराधी और माफिया प्रदेश छोड़कर चले गए हैं बिल्कुल निराधार और झूठा है।प्रदेश में अपराध बढ़ रहे हैं।महिलाएं सुरक्षित नहीं है।आम आदमी की जिंदगी दुश्वार होती जा रही है और ऐसे में सरकार इवेंट मैनेजमेंट कराकर जनता से झूठ बोलने का काम कर रही है। इन घटनाओं में जहरीली शराब से मारे गए व्यक्तियों के परिवारों के प्रति समाजवादी पार्टी अपनी संवेदना व्यक्त करती है और इस मसले में सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग करती है।