64 प्रतिशत भारतीय घर की सुरक्षा से सम्बंधित खतरों से निपटने के लिए सुसज्जित नहीं हैं

64 प्रतिशत भारतीय घर की सुरक्षा से सम्बंधित खतरों से निपटने के लिए सुसज्जित नहीं हैं

घर की सुरक्षा के मामले में भारतीयों को जोखिम है, क्योंकि 64 प्रतिशत लोग चोरी, डकैती, आदि खतरों से निपटने के लिए सुसज्जित नहीं हैं। ऐसा रिसर्च नाऊ द्वारा की गई गोदरेज लॉक्स हर घर सुरक्षित 2018 रिपोर्टः इंडियाज सेफ्टी पैराडॉक्स- होम सेफ्टी वर्सेस डिजिटल सेफ्टीज् कहती है। यह रिपोर्ट गोदरेज लॉक्स के राष्ट्रव्यापी कैम्पेन हर घर सुरक्षित के एक हिस्से के तौर पर जारी की गई है, ताकि भारतीयों के बीच घर की सुरक्षा को बढ़ावा दिया जा सके। गोदरेज लॉक्स हर घर सुरक्षित 2018 रिपोर्टः इंडियाज सेफ्टी पैराडॉक्स- होम सेफ्टी वर्सेस डिजिटल सेफ्टीज् डिजिटल युग में घर की सुरक्षा के प्रति लोगों की धारणा पर केन्द्रित है। भारत में घर केवल ठहरने के लिये नहीं हैं, बल्कि परिवारों के लिये सुरक्षित आवास भी माने जाते हैं। भारतीय धन, आभूषण और अन्य सामग्री के साथ अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज और पत्र घर में रखते हैं। सुरक्षा बहुत सी चीजों के लिये जरूरी है, लेकिन भारतीय अपने घरों की सुरक्षा के प्राथमिक स्रोत, यानि तालों को भी अपग्रेड नहीं करते हैं, क्योंकि केवल 40 प्रतिशत भारतीय 2-3 वर्षों में अपने ताले बदलते हैं और 20 प्रतिशत लोग तो ऐसा भी नहीं करते हैं। गोदरेज लॉक्स हर घर सुरक्षित 2018 रिपोर्टज् बताती है कि भारत में होने वाली चोरियों में से 70 प्रतिशत चोरियां घरों में होती हैं और अन्य 30 प्रतिशत डिजिटल चोरियाँ हैं। भारतीय घर की सुरक्षा से अधिक डिजिटल संपत्तियों की सुरक्षा पर ध्यान देते हैं। 83 प्रतिशत भारतीय प्रत्येक 6 माह में अपने डिजिटल पासवर्ड बदलते हैं, जो कि घर की सुरक्षा पर कम ध्यान देने की आदत दर्शाता है। प्रत्येक 2 माह में 67 प्रतिशत लोग अपने पीसी पासवर्ड बदलते हैं और 50 प्रतिशत लोग डेबिट कार्ड पिन बदलते हैं। 50 प्रतिशत लोग यह भी सुनिश्चित करते हैं कि उनके कंप्यूटर या मोबाइल की सुरक्षा किसी प्रतिष्ठित एंटी-वायरस से हो। अनाधिकृत उपयोग की रोकथाम के लिये करीब 55 लोग अपने फोन में फिंगरप्रिंट सेंसर्स का उपयोग करते हैं। हालांकि, दैनिक उपयोग और प्रौद्योगिकी की जागरूकता के बावजूद गोदरेज लॉक्स च्हर घर सुरक्षित 2018 रिपोर्टज् बताती है कि भारतीय अपने घरों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते हैं। रिपोर्ट कहती है कि 83 प्रतिशत भारतीयों को डिजिटलध्इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग टेक्नोलॉजीस के बारे में पता है, लेकिन 61 प्रतिशत से अधिक लोग अपने घरों के लिये टेक्नोलॉजी को अपनाकर उच्च तकनीक वाले सुरक्षा समाधानों से अपग्रेड नहीं होना चाहते। गोदरेज लॉक्स च्हर घर सुरक्षित 2018 रिपोर्टज् और उसके परिणामों पर टिप्पणी करते हुए गोदरेज लॉकिंग सॉल्यूशंस एंड सिस्टम्स के कार्यकारी वाइस प्रेसिडेन्ट एवं व्यवसाय प्रमुख श्री श्याम मोटवानी ने कहा, एक ब्राण्ड के तौर पर गोदरेज लॉक्स विश्वास और सुरक्षा का पर्याय है और लोगों को घर की सुरक्षा के महत्व पर जागरूक करना चाहता है। हर घर सुरक्षित रिपोर्ट कहती है कि भारतीय घर में सुरक्षित तो अनुभव करते हैं, लेकिन घर की सुरक्षा से सम्बंधित समस्याओं के लिये तैयार नहीं हैं। और तो और, इस डिजिटल युग में घर की सुरक्षा द्वितीयक बन चुकी है। हम लोगों को घर की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिये प्रोत्साहित करना चाहते हैं, जैसा कि वह डिजिटल संपत्तियों के लिये करते हैं। इस विजन के अनुसार हर घर सुरक्षित कैम्पेन शहरी और ग्रामीण भारत में लोगों को अपने घर की सुरक्षा पर चिंतन के लिये प्रेरित करेगा।