एनडीए के हरिवंश चुने गए राज्यसभा के नए उपसभापति

एनडीए के हरिवंश चुने गए राज्यसभा के नए उपसभापति

नई दिल्ली: राज्यसभा उपसभापति पद के लिये हुए चुनाव में एनडीए उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह को जीत मिली है। तीन बार हुई वोटिंग में उन्हें 125 वोट मिले जबकि विपक्ष के उम्मीवार बीके हरिप्रसाद को 105 वोट मिले। हरिवंश की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी। वहीं विपक्ष ने भी हरिवंश को बधाई दी।

सदन की कार्यवाही शुरु होने पर सभापति एम वैंकेया नायडू ने सदन पटल पर आवश्यक दस्तावेज रखवाने के बाद उपसभापति पद की चुनाव प्रक्रिया शुरु करवायी। हरिवंश के पक्ष में 125 और हरिप्रसाद के पक्ष में 105 मत पड़े। मतदान में दो सदस्यों ने हिस्सा नहीं लिया। सदन में कुल 232 सदस्य मौजूद थे।

हरिवंश के पक्ष में जदयू के आर सी पी सिंह, भाजपा के अमित शाह, शिव सेना के संजय राउत और अकाली दल के सुखदेव सिंह ढींढसा ने प्रस्ताव किया। वहीं हरिप्रसाद के लिये बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, राजद की मीसा भारती, कांग्रेस के भुवनेश्वर कालिता, सपा के रामगोपाल यादव और राकांपा की वंदना चव्हाण ने प्रस्ताव पेश किया।

इन प्रस्तावों पर मत विभाजन के बाद सभापति नायडू ने हरिवंश को उप-सभापति निर्वाचित घोषित किया। इसके बाद हरिप्रसाद ने हरिवंश को उनके स्थान पर जाकर बधाई दी। नेता सदन अरुण जेटली, नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार और संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल ने हरिवंश को बधाई देते हुये उन्हें उपसभापति के निर्धारित स्थान पर बिठाया।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरिवंश को शुभकामनायें देते हुये उनके विभिन्न क्षेत्रों के अनुभव के हवाले से उनके निर्वाचन को सदन के लिये गौरव का विषय बताया।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस सदस्य पी जे कुरियन के पिछले महीने सेवानिवृत्त होने के बाद उपसभापति का पद खाली हुआ था।

वोटिंग से पहले ही हरिवंश की जीत तय मानी जा रही थी। बीजू जनता दल ने हरिवंश का समर्थन करने के संकेत देकर जहां विपक्ष की उलटफेर करने की उम्मीदों को झटका दे दिया। वहीं भाजपा से नाराज शिवसेना ने हरिवंश के समर्थन में प्रस्ताव देकर एनडीए को सियासी राहत दी।

जहां एनडीए उच्च सदन में बहुमत के आंकड़ों में कमी के बावजूद जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिख रही थी तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस को सदन के अंदर एंटी बीजेपी मोर्चा के खिलाफ कांग्रेस कांग्रेस के अपने नामित उम्मीदवार के पक्ष में क्षेत्रीय पार्टियों को एकजुट करने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

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