यूपीईआरसी का निर्णय बिजली उपभोक्ताओं को परेशान करने वाला

सिंगल को मल्टीप्वाईंट कनेक्शनों में बदलने का फैसला एकतरफा: आरडब्लूए

लखनऊ। यूपी इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (यूपीईआरसी) के सिंगल प्वाईंट इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन को मल्टी प्वाईंट कनेक्शनों में बदले जाने के फैसले को रेजिडेंट्स वेलफेयर सोसायटी (आरडब्लूए) ने एकतरफा बताते हुये कहा है कि कदम को उठाने से पहले कई अन्य मुद्दों का समाधान करना जरूरी है। यूपीईआरसी के इस फैसले से लोगों को अब दुबारा से एक नया पावर स्टेशन लगाना होगा और साथ ही नए मीटर भी लगवाने होंगे। इतना ही नहीं उन्हें पावर-बैकअप के लिए भी फिर से एक अलग सेटअप कराना होगा और इन सबका खर्चा लाखों में आएगा। जो विद्युत उपभोक्ताओं के साथ सीधे-सीधे ज्यादती है। उल्लेखनीय है यह फैसला दिल्ली-एनसीआर के लोकप्रिय डेस्टीस्टीनेशन नोएडा एवं गाजियाबाद में मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट सोसायटीज के लिये सुनाया है। आरडब्लूए के नमित अरोड़ा व प्रतीक फेडोरा ने कहा कि यह दुखद है कि इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि यह खर्च कौन वहन करेगा जबकि हम पहले ही इन सबका खर्च उठा चुके हैं। उपभोक्ताओं को परेशान करने वाले इस मसले का समाधान तुरंत निकालना आवश्यक है। हम उम्मीद करते हैं यूपीईआरसी पूरी सहानुभूति के साथ उपभोक्ताओं के हित में ही कदम उठाएगी।”

उन्होंने कहा,“हम यूपीईआरसी का ध्यान इस ओर भी दिलाना चाहते हैं कि जो मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के पावर सप्लाई का मेन मीटर होगा उससे जब इंडिवुजुअल कंजप्शन वाले मीटरों को आगे सप्लाई किया जाएगा तो हमारे अनुभव का अनुसार निश्चित रूप से 4-5 प्रतिशत बिजली का नुकसान होता ही है तो मल्टी कनेक्शन को लागू होने के बाद अगर यह नुकसान 5 प्रतिशत से उपर गया तो इसका भुगतान उपभोक्ताओं की ही जेब पर भारी पड़ेगा।” साथ ही, इलेक्ट्रीसिटी डिपार्टमेंट जो कि कॉन्ट्रेक्ट पर लाईन मैन और मीटर रीडर हायर करते हैं इनका बैकग्राउंड भी चेक नहीं किया जाता जो कि इन मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट सोसाईटियों की सिक्योरिटी के लिए एक चिंताजनक स्थिति पैदा कर सकती है। पंकज चौधरी, आरडब्ल्यूए, लीला होम्स ने कहा, “क्या यूपीईआरसी ने इन मुद्दों पर कोई विचार किया है। बिना सोच-समझे इस तरह की बचकाने फैसले उपभोक्ताओं के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति उत्पन्न कर सकती है। ऐसा लगता है कि यूपीईआरसी ने बिना किसी तैयारी के और जल्दबाजी में यह फैसला लिया है क्योंकि इस फैसले की वजह से कन्ज्यूमर पर जहां एक तरफ भारी आर्थिक दबाव पड़ेगा वहीं इतनी बड़ी संख्या में मल्टी प्वाईंट कनेक्शनों को मैनेज करना भी अपने-आप में एक चैलेंज होगा।”

एक उपभोक्ता ने अपनी चिंता दर्शाते हुए बताया, “यूपीईआरसी के अबतक के रवैये को देखते हुए तो हम यही उम्मीद कर सकते हैं कि आने वाले समय में उपभोक्ताओं को हर दिन मीटर से संबधित विभिन्न समस्याओं से जूझना पड़ेगा। सबसे बड़ा विवाद का विषय तो यह बनने वाला है कि कॉमन एरिया में लगने वाले विभिन्न फैसिलिटिज जैसे कि लिफ्ट, स्ट्रीट लाईट्स, कॉमन एरिया लाईटिंग इत्यादि में लगने वाले इलेक्ट्रिक प्वाईंट्स के मीटरों व बैकअप का खर्च कौन उठाएगा, निश्चित रूप से इसमें कई लाख खर्च होने वाले हैं, इसका भुगतान क्या यूपीईआरसी करेगी।”

इन हाउसिंग सोसाईटियों में घर खरीदारों को पार्किंग स्पेस एवं कॉमन एरिया का पैसा भी देना होता हैं। जहां पार्किंग स्पेस का इस्तेमाल वे वाहनों को खड़ा करने के लिए करते हैं वहीं कॉमन एरिया का इस्तेमाल सभी लोग करते है। हालांकि अब इस नई घोषणा से उपभोक्ताओं को यह डर सता रहा है कि यूपीईआरसी के ये सिंगल प्वाईंट्स कनेक्शन के मीटरों एवं उनके बैकअप को लगाने के लिए इन जगहों का ही इस्तेमाल होने वाला है।

गौरतलब है कि अगर पार्किंग स्पेस का इस्तेमाल अगर इस कार्य के लिए किया जाएगा तो फिर ये घर खरीदार अपनी गाड़ियां कहां पार्क करेंगे। साथ ही इन सभी लोगों ने कॉमन एरिया एवं पार्किंग की जगहों के लिए भारी रकम चुकाई है उसका क्या होगा। इन्होंने यूपीईआरसी से ही जवाब मांगा है कि क्या वे इस रकम का भुगतान उपभोक्ताओं को करेगी। उनका यह भी कहना है कि अगर कॉमन एरिया में ये इतने सारे मीटर और बैकअप लगेंगे तो उनकी फैमिली कॉमन एरिया की सुविधाएं कैसे उठा पाएंगी। तारों के जंजाल में उनके बच्चों का ध्यान कौन रखेगा। उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि यूपीईआरसी उनकी परेशानियों पर गौर करते हुए कुछ न कुछ समाधान अवश्य निकालेगी।