पिछली सरकारों में केवल अपराध ओैर अराजकता का किया गया भारी निवेश

पिछली सरकारों में केवल अपराध ओैर अराजकता का किया गया भारी निवेश

मृत्युंजय दीक्षित

वर्तमान समय में प्रदेश की राजनीति में विपक्षी दलांे की ओर से महागठबंधन बनने के बाद अब इन दलों के सभी नेता प्रदेश की भाजपा सरकार और केंद्र की मोदी सरकार को पूरी तरह से नाकाम बताने के लिये पूरी तरह से अपनी ताकत और बुद्धि लगा दी हेै। यह प्रदेश की जनता अच्छी तरह से देख व समझ रही है कि कि पूर्व मंे किन दलों की सरकारंे थीं तथा उन सरकारों मंे कैसे -केैसे गुल खिलाये गये थे। अपने उन सभी पापों को छुपाने के लिये तथा अपने राजनैतिक अस्तित्व को बचाये रखने के लिये अब यही दल महागठबंधन बनाकर जनता की आंखों में बुरी तरह से धूल झोंकने का अक्षम्य अपराध कर रहे हैं। सपा और बसपा कभी एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते थे, वहीं दोनों आज अपने पापांे को छुपाने के लिये एक होकर हमला बोल रहे हैं। सबसे अधिक हंसी इस बात पर आ रही है कि जिसके कार्यकाल में रोज औसतन दस युवतियों के साथ बलात्कार और सामूहिक बलात्कार की घटनाओं को सरेआम अंजाम दिया जाता था तथा आज उसी सरकार का मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव महिला डकैत स्वर्गीय फूलन देवी को पुष्पांजलि व श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बीजेपी व योगी सरकार को बच्चियों की सुरक्षा करने में नाकाम बता रहा है। जबकि आज वास्तव मं योगी सरकार मंे महिलाओं मंे सुरक्षा की भावना एक बार फिर जागृत हो रही है। समाजवादी सरकार वह सरकार थी जिसमें महिलाओं व बच्चियांे का भरी दोपहरी घर से बाहर निकलना दुश्वार हो गया था। सपा नेता मुलायम सिंह यादव कभी कहते थे कि लड़कांे से गलतियां हो जाती हैं। समाजवादी नेता तो संसद में महिला आरक्षण के सबसे बडे़ प्रबल विरोधी रहे हैं। समाजवादियों को पता नहीं कबसे महिला सुरक्षा व महिला सशक्तीकरण की ंिचंता सताने लग गयी है। बसपा सुप्रीमो मायावती को अपने विधायकों की करतूत तो अवश्य याद रखनी चाहिये। प्रदेश के राजनैतिक इतिहास में सबसे अधिक बलात्कारी और छेड़छाड़ के आरोपी विधायक बसपा में ही हैं। बसपा सरकार के कार्यकाल में इन विधायकों का खौफ सिर चढ़कर बोल रहा था तथा कई विधायकों को सरकार व पार्टी से निकालना तक पड़ गया था। आज वहंी मुख्यमंत्री बीजेपी को महिला सुरक्षा के नाम पर अपनी सीख दे रही हैं और सरकार को नाकाम बता रही है। इन सभी सरकार सरकारों में हिंदू - मुस्लिम तनाव बराबर बना रहता था।

आज प्रदेश का मुसलमान एक बार फिर बीजेपी को हराने के लिये सपा -बसपा की गोद मंे जाने को तैयार बैठा है लेकिन उसे समाजवादी सरकार का मुजफ्फरनगर दंगा याद रखना चाहिये। समाजवादी सरकार मंे तो दंगो की एक लम्बी श्रृंखला चल गयी थी जिसमें प्रदेश की जनता ने उनको अच्छी तरह से बाहर का रास्ता दिखा दिया। आज वही सपा और बसपा सरकोर बीजेप को कानून व्यवस्था के मामले मेें नाकाम बता रही है। सपा और बसपा की सरकारों मंे केवल भीड़ तंत्र की हिंसा , हर प्रकार के जयराम के अपराधों तथा अराजकता का ही बोलबाला रहा है। असल बात यह है कि समाजवादी और बसपा की सरकारांे ने प्रदेश को इस कदर लूटा है तथा जमकर अराजकता मचायी है कि उसके कारणइन सभी लोगां में अंदर ही अंदर भय व्याप्त हो गया है। आज मांब लिंचिंग भीड़ की हिंसा पर बीजेपी व संघ को बिनासही तथ्यो की जांच पड़ताल के घेरने में लगे हुये हैं। लेकिन बसपा नेत्री मायावती को वह बात नहीं भूलनी चाहिये कि उन्ही की पार्टी के नेताओं नसीमुददीन सिददीकी आदि ने भीडत्र को एकत्र करके किस प्रकार बीजेपी नेत्री व प्रदेश सरकार की मंत्री स्वाति सिंह व उनकी बेटी को डराया धमकाया था तथा एक औेर मंत्री श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी के घ को भी माब लिंचिंग के सहारे ही जलाया गया था। माब लिचिंग के सहारे ही इन दलांे के कार्यकर्ता ब्राहमण समाज सहित समस्त सवर्ण समाज के लोगों पर अत्याचार किया करते थे। आज जो माब लिचिंग हो रही है उसमेे भी कहीं न कहींे इन्ही दलांे का हाथ है।

आज सपा और बसपा प्रदेश की जनता से पूरी तरह से कट चुकी है तथा इन नेताओं को रैलियां करने व उनमें भीड़ बुलाने मे पसीना आ रहा है। बसपा नेत्री मायावती की हालत इतनी दयनीय है कि वह अपने लिये सुरक्षित संसदीय क्षेत्र नहीं तलाश कर पा रही हैं और कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास न ध्वस्त हो जाये इसलिये स्वयं ाके पीएम के पद के लिये प्रोजेक्ट करने का प्रयास कर रही हैं। सपा और बसपा अब अपना क्षेत्रीय पार्टी का रूतबा भी खो रही और यही कारण है कि यह सभी दल कांग्रेस की गोद में बैठकर महागठबंधन के सहारे अपनी राजनीति को जीवित रखने का सपना संजो रही हंै।

पिछली सरकारों मे इतनी घोर अराजकता व्याप्त थी कि प्रदेश के सभी 745 जिलों के परिषदीय विद्यालयों मेे की गयी भर्तियों की सीबीआई जांच की जा रही है। प्रदेश के कई जिलों में प्राथमिक विद्यालयों के नाम मंे इस्लामिया जोड़कर रविवार के बजाय शुक्रवार को अवकाश रखनेे का महापाप किया जा रहा था। ऐसा सुनियोजित तरीके से किया गया। इन सभी मामलों की जांच की जा रही है। एक प्रकार से सपा राज में सरकारी स्कूलों का इस्लामीकरण करने की महा साजिश चल रही थी। यह एक बेहद गम्भीर मामला है जिसकी जांच चल रही है तथा प्रदेश सरकार व स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रूख अपनाया हुआ है।

आज प्रदेश में नयी सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कड़ी मेहनत व पीएम मोदी के प्रयासों से भारी मात्रा में निवेश आ रहा है तथा विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास, लोकार्पण व उदघाटन तक हो रहे हैं उस समय पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव यह झूठा दावा कर रहे हैं कि अब तक जो लोग केवल हमारे कामों का ही उदघाटन कर रहे थे वो अब हमारी निवेश की योजनाओं को भी नया जामा पहनाकर फिर से निवेश कर रहे हैं। वह बीजेपी सरकार की योजनओं को हवा हिवाई बताकर उनका मजाक उड़ा रहे है। यह बात साफ प्रतीत हो रही हे कि अखिलेश यादव व अन्य विरोधी दलों के नेता केवल अपने कुकृकत्यांें को छिपाने के लिये इस प्रकार की ओछी हरकते कर रहे हैं तथा अपनी विफलता की महा भड़ास निकाल रहे हैं। यदि इन सरकारांें ने कोई काम किया होता तो आज प्रदेश का यह हाल होता। सपा और बसपा की सरकारोे मंे केवल लूट और अराजकता का माहौल था। इन सभी दलों ने अपने हिसाब से प्रदेश को लूटा है तथा जनता को ठगा है। यहां तक कि अंतिम क्षणों में तो सरकारी बंगले तक को लूटकर ले गये। जिन फाइलां को आज खोला जा रहा हैं हर फाइल से घोटालोें की बुं आ रही है तथा उनमें स्वयं पूव मुख्यमंत्री तथा उनके सभी रिश्तेदार व सहयोगी फंसते नजर आ रहे है। लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट घोटाले से लेकर यमुना -एक्सप्रेस वे सहित सपा के सबसे मनपसंद आजम खां तक सभी भ्रष्टाचार के दलदल में गहरे तक फंसे हैं। अगर इन लोगों ने बड़ा काम किया है तब बहिन मायावती व सपा मुखिया अखिलेश यादव को एक- एक सीट जीतने के लिये महागठबंधन करना पड़ रहा है तथा फतवे जारी करवाने पड़ रहे हंै।

यह सभी दल बहुरूपिया हैं तथा आजकल एक नया अभियान भी चला रखा है कि कंेद्र में पांच साल तथा यूपी मंे योगी सरकार के 16 माह होने को आ रहे हैं। लेकिन यह लोग अभी तक राम मंदिर नहीं बनवा सके तथा यह जनमानस को बरगला रहे हें । हिंदू जनमानस यह अच्छी तरह से देख रहा है कि भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनवाने में कौन -कौन से दल सबसे बड़ा रोड़ा अटका रहे हंै। अयोध्या में गोलियां तो यादव परिवार ने ही चलवायी थीं और हिंदुओं पर सबसे अधिक अत्याचार सपा और बसपा सरकारों में ही हुये थे। आज इन लोगों से राम मंदिर क्यों नहीं हो रहा कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण व दुखद है। यह सभी दल आस्तीन के जहरीले सांप है। जो समय के साथ और अधिक निखरते जा रहे हंै। एक तरफ कहते हैं कि राम मंदिर नहीं बन रहा वहीं दूसरी ओर जब श्रीराम का नाम लोग बोलते हैं तो वह हाय हाय करने लग जाते हैं। इन दलांे की सरकारांे ने केवल अपराध ,अराजकता, घोटालोें तथा भ्रष्टाचार का ही घोर निवेश किया है। अतः बीजेपी से सवाल करने की बजाय स्वयं का आत्मचिंतन करना चाहिये और शांति व धैर्य के साथ समय का इंतजार करना चाहिये।